नेहरू से लेकर सोनिया तक कॉन्ग्रेस हिंदू घृणा में सनी रही। फिर भी राम की मर्यादा का पालन कर उसके नेताओं को न्योता दिया गया। पर उसने वही चुना जो उसकी नियति है।
इस ऐतिहासिक क्षण का हिस्सा बनते हुए यूरोप के लोग पेरिस में 'राम रथ यात्रा' में भाग लेंगे और एफिल टॉवर के पास प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का लाइव प्रसारण देखेंगे।
वैष्णव समाज में रामानुज की परंपरा में ही संत रामानंदाचार्य हुए, जिन्होंने विशिष्टाद्वैत सिद्धांत को आगे बढ़ाया। अहं का त्याग और समर्पण - रामानंदी भक्ति धारा इन्हीं पर आधारित है। रामलला एक बालक हैं, इसीलिए संरक्षक बन कर पुजारी पूजा करेंगे।