जब शोषित समाज के वंचित कहे जाने वाले तबकों से हो और आरोपित तथाकथित ऊँची मानी जाने वाली जातियों से, तो मीडिया लिंचिंग के लिए एक बढ़िया मौका तैयार हो जाता है।
हाथरस में आरोपित की जाति पर जोर देने वाली रोहिणी सिंह जैसी लिबरल, बलरामपुर में दलित से रेप पर चुप हो जाती हैं? क्या जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता?
आरोपित अब्बू, गुलाम रसूल ने पिछले 1 साल से अपनी ही 16 साल की बेटी को हवस शिकार बनाया। वहीं लगातार दुष्कर्म के बाद जब उसकी बेटी 7 माह गर्भवती हो गई तब मामले का खुलासा हुआ।
प्रियंका गाँधी ने मृतका के पिता का एक ऐसा वीडियो शेयर किया है जिसमें उन्हें सीखा रहे कैमरामैन को आसानी से सुना जा सकता है। प्रियंका गाँधी द्वारा ट्वीट किया गया यह वीडियो विवाद का विषय बन चुका है।