"दानिश और उसके तीन अन्य दोस्तों ने रेप करने में नाकाम रहने के बाद रिया और आसिफ दोनों को गोली मार दी। दानिश ने आसिफ को फोन कर मिलने के लिए बुलया था। आसिफ और रिया साथ-साथ गए थे। वहॉं दानिश और उसके तीन अन्य दोस्तों ने फब्तियाँ कसी और रिया के साथ जबर्दस्ती करने की कोशिश की।"
पुलिस ने आसिफ़ के दोस्त दानिश को हिरासत में ले लिया है। कथित तौर पर उसने आसिफ़ को पिस्तौल दी थी। दानिश के पास से दो राउंड गोली और मृतक का मोबाइल बरामद हुआ है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि आत्महत्या का संभावित कारण असफल प्रेम संबंध हो सकता है। फ़िलहाल, मामले की जाँच जारी है।
18 जुलाई को पीड़ित लड़की ने अपने बयान में कहा था कि लड़कियों को आरा की एक इंजीनियर के आवास पर और होटलों में ले जाया जाता था। इसके बाद बीते 6 सितंबर को सेक्स रैकेट कांड में पीड़ित किशोरी का दोबारा बयान आरा कोर्ट में दर्ज कराया गया था।
कल तक लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव के कसीदे पढ़ने में नहीं अघाने वाले नेता भी अब जमीनी हकीकत भॉंप ऐसे चेहरे की तलाश कर रहे हैं जो चुनावी नैया पार लगा सके। तेजस्वी के नेतृत्व पर साथी दलों के असमंजस के बाद अब राजद में भी दिख रही बेचैनी।
बिहार पुलिस का आँकड़ा कहता है कि जनवरी 2019 से मई 2019 तक (सिर्फ 5 महीनों में) 1277 हत्याएँ, 605 बलात्कार, 3001 दंगे, 4589 अपहरण जैसे संगीन जुर्म इस राज्य में हुए (हुए शायद ज्यादा होंगे!) और जो आधिकारिक तौर पर दर्ज किए गए।
2 अगस्त 2005 को तब के विधायक सुनील ने गाड़ी से उतर कर अपने हाथ में लिए बंदूक के कुंदे से गर्भवती मंजू देवी के पेट पर मारा था। मार के बाद मंजू देवी का गर्भपात भी हो गया था और इलाज के दौरान उनकी मौत भी हो गई थी। इसे मामले में कोर्ट ने...
फ़िलहाल, लालू यादव जेल में ही रहेंगे क्योंकि इसी चारा घोटाला में उन्हें दुमका और चाईबासा कोषागार मामले में ज़मानत नहीं मिली है। हालाँकि, लालू यादव के वकील ने कहा है कि वो इन दोनों मामलों में भी ज़मानत याचिका दायर करेंगे।
“मैं और झारखंड के राष्ट्रीय जनता दल के 90 फीसदी कार्यकर्ता व नेता लालू प्रसाद यादव से नाराज हैं। अब राष्ट्रीय जनता दल में लोकतंत्र नहीं बचा है, लिहाजा हमने नई पार्टी बनाई है और अब हम खुद झारखंड के लोगों की सेवा करेंगे।”
विपक्ष को आम जनता की आवाज़ बनने की ज़रूरत थी, मगर उनकी आवाज़ को बुलंद कर सरकार तक पहुँचाने की बजाए ऐसे संवेदनशील मामले पर चुप्पी साध लेना, नेता प्रतिपक्ष का इस तरह अज्ञातवास पर चले जाना, विपक्ष की संवेदनहीनता को दर्शाता है।