CAA के समर्थन और पुलवामा आतंकी हमले की बरसी पर पुलवामा के बलिदानी जवानों की याद में साहेबपुर कमाल से बलिया तक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने 'भारतवंशी जागृति यात्रा' निकाली थी। यात्रा के दौरान उन्होंने बलिया प्रखंड कार्यालय स्थित अंबेडकर पार्क में लगी भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का माल्यार्पण किया था, जिसको लेकर...
RJD के राज्यसभा सांसद अशफाक करीम ने CAA और NRC के विरोध में खड़े होकर भाषण देना शुरू ही किया था और भाषण देते हुए महज 17 सेकेंड ही बीता था कि उनकी पैंट ही खुलकर गिर गई।
विधायक फराज फातमी ने न केवल पार्टी के स्टैंड का विरोध किया है, बल्कि नीतीश कुमार को राज्य का सबसे बड़ा चेहरा भी बताया है। उन्होंने कहा, "बिहार में नीतीश कुमार से बड़ा कोई चेहरा नहीं है। 2020 में भी वही सरकार बनाएँगे।"
रंगदारी नहीं देने पर तीन भाइयों को एक जगह लाया गया। इनमें से राजीव को रस्सी से बाँध दिया जबकि सतीश और गिरीश के ऊपर तेज़ाब से भरी बाल्टी उड़ेल दी गई। राजीव को आँखें खोल कर दोनों भाई को तेज़ाब से जलकर मरते देखने की धमकी दी गई। इसके बाद...
वीडियो में उपद्रवियों की भीड़ को मंदिर में प्रवेश करते हुए और मूर्ति को तोड़ते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में मौजूद शख्स बोलते हुए सुना जा सकता है, “हिंदुओं के साथ खिलवाड़ किया गया है। वो लोग हमारे मंदिर में घुसकर मूर्तियों को तोड़ रहे हैं।”
उपद्रवियों ने पटना के एक मंदिर में तोड़-फोड़ और आगजनी की। क्यों? क्योंकि यह उग्र भीड़ मंदिर के पास से गुजर रही थी। स्थानीय निवासियों और पुलिस ने इन्हें आगे बढ़ने से मना किया। बस, इतनी सी बात पर उपद्रवियों ने मंदिर में तोड़-फोड़ करनी शुरू कर दी, फिर आगजनी भी की।
पटना और भागलपुर में RJD कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर चल रहे वाहनों तक में जमकर तोड़फोड़ की। एक ऑटो पर हमलावर होते हुए RJD कार्यकर्ताओं को इतना भी होश नहीं रहा कि वो जिस ऑटोरिक्शे पर लाठी बरसाते हुए उसके शीशे तोड़ रहे थे, उसके अंदर बैठी सवारियों में एक बच्ची भी मौजूद थी।
पटना के इस हनुमान मंदिर का संचालन महावीर ट्रस्ट करता है। पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल इसके अध्यक्ष हैं। मंदिरों में दलित पुजारियों की नियुक्ति के सामाजिक परिवर्तन में उनका बड़ा योगदान है। अयोध्या मामले से भी वे जुड़े रहे हैं।
"महागठबंधन को बाँधने वाली गाँठे कितनी मजबूत हैं, इसका अंदाजा इसी से लग रहा है कि उपचुनाव की पाँच सीट आपस में बाँटने में ही टूट गई। ये 2020 में 243 सीटों पर कैसे फैसला कर पाएँगे?"
मामला सामने आने के बाद से विधायक गायब हैं। उनके मोबाइल का अंतिम लोकेशन झारखंड में मिलने के कारण माना जा रहा है कि वे बिहार के बाहर छिपे हुए हैं। विधायक के करीबियों पर किशोरी को धमकाने के आरोप भी हैं।