मौलवी अब्दुल्ला ने पूरे हमले की साजिश रची थी। वह पाकिस्तानी नागरिक है और पहले आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ था। इसके बाद वो तहरीक-ए-तालिबान में सक्रिय रहा। फिर आईएसकेपी का प्रमुख बना। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई थी।
इरफान अहमद और आदिल बशीर पाकिस्तानी आतंकियों के संपर्क में थे। युवाओं को आतंकी समूह के साथ जुड़ने के लिए बरगलाते थे। इनके पास से एके-47 भी बरामद किया गया है।
टॉप 10 वॉन्टेड आतंकियों में से एक रियाज नाइकू कहता है, “सड़क, पानी, सोशल मीडिया हमारे लक्ष्य नहीं हैं... भारत अनुच्छेद 370 और सोशल मीडिया प्रतिबंध जैसे ट्रिक्स का उपयोग करके डेमोग्राफी को बदलना चाहता है। यह पाकिस्तान और कश्मीर को हथियार उठाने के लिए मजबूर करता है।”
जगनेश्वर रॉय संत गौरियो मंदिर के प्रमुख महंत थे। कुछ हथियारबंद बदमाशों ने उनकी गला काटकर निर्ममता से हत्या कर दी थी। इस मामले में कोर्ट ने जहाँगीर हुसैन उर्फ राजीब गाँधी, रजीबुल इस्लाम उर्फ बादल, आलमगीर हुसैन और रमजान अली को फाँसी की सजा सुनाई है।
आतंकी जलीस अंसारी ने बताया है कि वह कुछ समय के लिए पाकिस्तान जाने वाला था। वहॉं से लौटकर असम में एक गुप्त ठिकाना बनाने की योजना थी। वहीं से फिर वह देश के बड़े शहरों में आतंकी घटनाओं को अंजाम देता।
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने PFI के दानिश को दबोचा था। उसने पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। उससे मिली जानकारी के आधार पर फंडिंग और हिंसा भड़काने में शामिल रहे लोगों की धर-पकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने इस एनकाउंटर की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि शोपियाँ जिले के खाजपुरा रेबन इलाके में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच आज हुई मुठभेड़ में दो आतंकियों को ढेर किया गया। उनके शव बरामद कर लिए गए हैं और पहचान की जा रही है।
किश्तवाड़ पुलिस को सूचना मिली थी कि मारवा इलाके के रहने वाले गुलाम हुसैन, मोहम्मद यासीन, जाकिर हुसैन, मोहम्मद इकबाल और बशीर अहमद हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकियों को पनाह देने के साथ उनकी मदद करते थे।
महबूब पाशा ने हथियार खरीदे। शरीफ ने अपने घर में इन्हें इकट्ठा किया। मोइदीन और उसके साथी बीते साल ट्रेनिंग के लिए देश से बाहर गए। फिर हिंसक जिहाद छेड़ने के लिए लौट आए। इससे पहले कि वे अपने मॅंसूबे में कामयाब होते दबोच लिए गए।
अलकायदा ने जम्मू कश्मीर को 'हिन्दुओं से आज़ाद' करा के यहाँ शरिया क़ानून लागू करने की बात कही है। संगठन ने कहा कि जब तक जेरुसलम का मस्जिद-ए-अक़्सा और अयोध्या का बाबरी मस्जिद 'काफिरों' से मुक्त नहीं हो जाता, तब तक जंग जारी रहेगी।