सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।
यूपी में सीएए के विरोध में हुई हिंसा में पीएफआई की संलिप्तता सामने आई है। इस कट्टरपंथी संगठन के संबंध आतंकियों से बताए जा रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है। बावजूद बंगाल में उसे प्रदर्शन की इजाजत किसने दी?
"अगर उनमें से 70% लोग अमित शाह का समर्थन करते हैं, तो बीजेपी यहाँ सत्ता में आ जाएगी। तब आप अपना सिर नहीं उठा सकेंगे, जैसा वे (बीजेपी) उत्तर प्रदेश में करते हैं। तब कोई भी सड़कों पर नहीं आएगा।"
"जो ये सवाल उठा रहे हैं कि एनआरसी क्यों जरूरी है, उन्हें बंगाल की हालत पर नजर डालनी चाहिए। यहाँ हिंसा और आगजनी की घटनाओं में वही घुसपैठिए संलग्न हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने वोट बैंक की खातिर राज्य में बसा रखा है। इन्हें खदेड़ने के लिए ही ऐसा कानून जरूरी है।"
"मैं सम्बंधित मंत्रालयों से दरख्वास्त करती हूँ कि इतने कठोर क़ानून बनाए जाएँ कि कोई व्यक्ति किसी की बलात्कार करना तो दूर, किसी महिला की तरफ़ गलत नज़र से देखने से पहले भी 100 बार सोचे। मैं जया बच्चन के बयान का समर्थन करती हूँ।"
चुनावी नतीजे आने के बाद टीएमसी के गुंडों ने उत्तर 24 परगना जिले के पानपुर, नैहाटी, मद्राल और बैरकपुर में स्थित भाजपा कार्यालयों की दीवारों और छतों पर हरे रंग से पेंट कर दिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा के कार्यालय पर टीएमसी का झंडा फहराया।
बंगाल में घुसपैठियों और शरणार्थियों की अधिकांश बस्तियाँ उन जगहों पर बसी हुई हैं जोकि राज्य सरकार की हैं। मगर यहाँ बसने वाले लोग दरअसल मूल रूप से भारतीय नहीं हैं इसीलिए उन्हें अक्सर विरोध का सामना करना पड़ता है।
सांसद माला रॉय के अनुसार मंत्री ने उन इलाकों की बिजली भी कटवा दी थी जहॉं फिल्म नहीं दिखाई जा रही थी। इससे स्थानीय लोग भड़क गए और प्रदर्शन करने लगे। लेकिन किसी ने चट्टोपाध्याय के साथ मारपीट नहीं की।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने बंगाल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर ट्वीट किया मगर इसके बाद वे खुद ही ट्रोल हो गए। ब्रायन ने एक ट्वीट के ज़रिये यह दिखाने की कोशिश की कि स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करने में बंगाल में उनकी पार्टी की सरकार केंद्र की मोदी सरकार से आगे है। लेकिन...