तृणमूल कॉन्ग्रेस के मुर्शिदाबाद जिले के पदाधिकारी अनारुल हक के 2 बेटों को तब किडनैप करने की कोशिश की गई, जब वे दोनों स्कूल जा रहे थे। शमशेरगंज विधान सभा के तृणमूल विधायक अमीरुल इस्लाम पर आरोप लगाते हुए...
हमलावरों ने पहले बीजेपी नेता पर गोली चला दी। गोली बीजेपी नेता के पैरों में जा लगी। जिससे घायल होकर वह जमीन पर गिर गए। इसके बाद उन गुंडों ने धारदार चाकू से उनके दम तोड़ने तक ताबड़तोड़ वार किए।
बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस के बूथ अध्यक्ष मुस्ताक शेख बम बनाते समय हुए विस्फोट में अपने दोनों हाथ गँवा दिए। इस बम की तीव्रता इतनी अधिक थी कि बम विस्फोट की आवाज सुनकर गाँव के कई लोग भाग खड़े हुए। बताया जा रहा है कि मुस्ताक शेख इस बम को भाजपा द्वारा CAA के समर्थन में निकाली जा रही रैली में फोड़ने के लिए बना रहा था।
टीएमसी नेता अमल सरकार और उसके समर्थकों ने शिक्षिका को लोहे की रॉड से मारा। हाथ-पैर बाँध लगभग 30 फीट तक जमीन पर घसीटते हुए ले गए। फिर एक कमरे में बंद कर दिया। शिक्षिका की मॉं और बहन के साथ भी मारपीट की गई।
मुर्शिदाबाद में CAA के विरोध में बुलाई गई बंद के दौरान हिंसा भड़की। टीएमसी, माकपा और कॉन्ग्रेस एक-दूसरे को इसके लिए कसूरवार ठहरा रहे हैं। कई वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
“पश्चिम बंगाल सरकार हमेशा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के रुख का समर्थन करती है, न कि भारतीय प्रधानमंत्री का। यह ताजा उदाहरण है। हम KMC मेयर के इस्तीफे और एक निष्पक्ष एजेंसी द्वारा जाँच की माँग करते हैं। साथ ही मुख्यमंत्री को भी इस मुद्दे पर बयान देना चाहिए।”
सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।
यूपी में सीएए के विरोध में हुई हिंसा में पीएफआई की संलिप्तता सामने आई है। इस कट्टरपंथी संगठन के संबंध आतंकियों से बताए जा रहे हैं। इस पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा गया है। बावजूद बंगाल में उसे प्रदर्शन की इजाजत किसने दी?
"अगर उनमें से 70% लोग अमित शाह का समर्थन करते हैं, तो बीजेपी यहाँ सत्ता में आ जाएगी। तब आप अपना सिर नहीं उठा सकेंगे, जैसा वे (बीजेपी) उत्तर प्रदेश में करते हैं। तब कोई भी सड़कों पर नहीं आएगा।"
"जो ये सवाल उठा रहे हैं कि एनआरसी क्यों जरूरी है, उन्हें बंगाल की हालत पर नजर डालनी चाहिए। यहाँ हिंसा और आगजनी की घटनाओं में वही घुसपैठिए संलग्न हैं, जिन्हें ममता बनर्जी ने वोट बैंक की खातिर राज्य में बसा रखा है। इन्हें खदेड़ने के लिए ही ऐसा कानून जरूरी है।"