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लेफ्ट की हिंसा ‘दादागिरी’ है न कि आंदोलन, खत्म हो जाऊँगी लेकिन वामपंथियों की तरह नहीं करूँगी: ममता बनर्जी

"वामपंथी पार्टियों की कोई विचारधारा नहीं हैं। रेलवे पटरियों पर बॉम्ब बिछाना गुंडागर्दी में आता है। आंदोलन के नाम पर रास्ते में चलने वालों को मारा जा रहा है और उनपर पथराव हो रहा है। ये दादागिरी है, न कि आंदोलन। मैं इस भारतबंद की निंदा करती हूँ।"

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (दिसंबर 8, 2019) को भारत बंद बुलाए जाने के लिए लेफ्ट पार्टियों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने लेफ्ट पर निशाना साधते हुए कहा है कि वामपंथ की कोई विचारधारा नहीं है। वे केवल बंद बुलाकर और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक लेफ्ट द्वारा राज्य में की गई हिंसा सब ‘दादागिरी’ में आती है न कि आंदोलन में। इससे तो बेहतर है राजनैतिक मौत हो जाए।

एएनआई के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कहा, “वामपंथी पार्टियों की कोई विचारधारा नहीं हैं। रेलवे पटरियों पर बॉम्ब बिछाना गुंडागर्दी में आता है। आंदोलन के नाम पर रास्ते में चलने वालों को मारा जा रहा है और उनपर पथराव हो रहा है। ये दादागिरी है, न कि आंदोलन। मैं इस भारतबंद की निंदा करती हूँ।”

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पश्चिम बंगाल की सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।

इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया कि ममता बनर्जी ने कहा है कि वे बंगाल में किसी तरह के बंद की इजाजत नहीं देंगी। उनके अनुसार वे सीएए या एनआरसी के खिलाफ किसी बड़े आंदोलन से नहीं जुड़े हैं, न बंगाल में और न ही देश में कहीं और।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की कथित ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘जन विरोधी’ आर्थिक नीतियों के खिलाफ बुधवार को वाम दल समर्थक 10 ट्रेड यूनियनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था। राहुल गाँधी ने ट्वीट कर भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने लिखा, “मोदी-शाह सरकार की जनविरोधी, श्रमिक विरोधी नीतियों ने भयावह बेरोजगारी पैदा की है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि इन्हें मोदी के पूँजीपति मित्रों को बेचने को सही ठहराया जा सके। आज 25 करोड़ कामगारों ने इसके विरोध में भारत बंद बुलाया है। मैं उन्हें सलाम करता हूँ।” राज्य में सीएए के विरोध के नाम पर भी जमकर हिंसा हुई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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