मृतका के पति के अनुसार लंबे समय से तृणमूल के दो गुटों में रस्साकशी चल रही थी। इसकी वजह से वह घर छोड़कर कहीं और रह रहा था। शनिवार की रात तृणमूल यूथ विंग के स्थानीय कार्यकर्ता उसकी तलाश में पहुँचे और उसकी पत्नी से गैंगरेप किया।
अर्जुन सिंह ने आरोप लगाया कि बैरकपुर के पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा ने उनके सिर पर लाठी से मारा और गालियाँ दी। सिंह ने कहा कि उनके आवास पर भी पुलिस और तृणमूल कार्यकर्ताओं ने हमला किया। उनके सिर में 12 टाँके लगे हैं।
लोकसभा चुनाव से पहले टीएमसी छोड़ भाजपा में आए अर्जुन सिंह पर पहले भी हमले हो चुके हैं। इसी साल 25 जुलाई की रात उनके घर पर बम फेंके गए थे। आम चुनावों के दौरान भी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें निशाना बनाया था।
"वह लोगों से बातचीत कर रहे थे। उसी समय स्थानीय पार्षद के नेतृत्व में करीब 250 तृणमूल गुंडे एकत्र हुए और उन पर हमला कर दिया। उन्हें बचाने की कोशिश में भाजपा के दो कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।"
कई राजनेताओं ने केंद्र सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि ये भारत की क्षेत्रीय संप्रभुता और उसके लोगों के कल्याण के हित में लिया गया फैसला है। हालाँकि, इनमें से सभी नेता अपनी पार्टी के रुख का खुलकर विरोध नहीं कर रहे हैं।
"तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुंडा वाहिनी ने अचानक से बाजार में आकर BJP पार्टी ऑफिस तोड़ दिया। पुलिस को खबर देने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने इलाके को अशांत कर रखा है। अगर पुलिस की तरफ से जल्द ही इन पर कार्रवाई नहीं की जाती है, तो हमें मजबूरन बड़े आंदोलन पर उतरना होगा।"
जब सरकार संवैधानिक दायरे में रह कर, तय तरीके से, तय समय में, वोटिंग के जरिए बिल पास करा रही है तो एक हिस्से को इससे समस्या क्या है? डेरेक की आपत्ति का मूल बेहद खोखला है। उन्हें यह बताना चाहिए कि क्या किसी तरह का कोई गलत बिल पास हुआ है?
बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा की अब तक कई भाजपा कार्यकर्ता भेंट चढ़ चुके हैं। बीते दिनों बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के घर पर भी हमला किया गया था।
इसी इलाके में भाजपा-टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच संघर्ष में दो लोगों की मौत हो गई थी और तीन घायल हो गए थे। हाल के दिनों में राज्य में राजनीतिक हिंसा में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता और समर्थकों की हत्याएँ हुई है।