फैज की "हम देखेंगे... बस नाम रहेगा अल्लाह का" वाले पर इसी मीडिया गिरोह ने संदर्भ की बात करते हुए लेख पर लेख दे मारे। तो क्या दंगे-आगजनी की जगह पुलिस के निर्णय संदर्भ से परे हो जाते हैं? उसकी व्याख्या क्यों नहीं! क्योंकि ये आपके नैरेटिव को सूट नहीं करता।
"हिंसा के दौरान हमने पत्थर खाए। हमारे 263 पुलिसकर्मी घायल हैं। कानपुर में हमारे जवान पर पेट्रोल बम फेंका गया, जिसमें उसका सिर फट गया है। जो भी आरोप लग रहे हैं, उसकी जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। स्थानीय प्रशासन को मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। निर्दोष लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं दोषी बख्शे नहीं जाएँगे।"
शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित। शरारती तत्वों पर ड्रोन से भी नज़र रखी जा रही है। 20 ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद। इसके अलावा, राज्य में पहले से ही धारा-144 लगी हुई है।
फिरोजाबाद पुलिस की ओर से जारी पोस्टर में पुलिस उपाधीक्षक नगर, नगर मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक नगर का फोन नंबर दिया गया है। इसके अलावा पोस्टर में एक लैंडलाइन नंबर भी दिया गया है। जिसके आगे लिखा है कि इस नंबर पर नाम बताए बिना भी सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले का नाम पूर्ण रूप से गोपनीय रखा जाएगा।
पुलिस ने वीडियो जारी करते हुए बताया कि उन्हें दिसंबर 19 से दिसंबर 21 के बीच हुई हिंसा में इस तरह के हमले झेलने पड़े और इसी कारण उन्हें दंगाईयों को पलटकर जवाब देना पड़ा।
"पूरी हिंसा के लिए कट्टरपंथी समूहों और मुख्यधारा की राजनैतिक पार्टियाँ जिम्मेदार हैं। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI), सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) समेत समाजवादी पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भड़की हिंसा के लिए उत्तरदायी हैं।"
प्रधानमंत्री ने सीएए को लेकर हिंसा करने वालों को भी समझाया। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अधिकार के साथ-साथ अपने दायित्व को भी निभाना चाहिए और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से बचना चाहिए। उन्होंने ऐसे लोगों को खुद से पूछने की सलाह दी कि क्या उनका रास्ता सही था, जो जलाया गया वो उनके बच्चों को काम आने वाला भी तो था।
अब तक के आँकड़ों के अनुसार, कुल 5558 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इसके अलावा 925 लोगों को गिरफ़्तार भी किया है। अब तक 213 एफआईआर दर्ज किए गए हैं। अकेले कानपुर में 21,500 उपद्रवियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है।
ये सन्देश जैश के सबसे बड़े सरगना मसूद अजहर का था। इस सन्देश से पता चला है कि कुछ बड़े आतंकी अयोध्या को दहलाने की साज़िश रच रहे हैं। एक टेलीग्राम चैनल में आए सन्देश को इंटरसेप्ट कर भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने इस बड़ी साज़िश की पोल खोली है।
"हमने 28 व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जिनकी भूमिका पुलिस ने जाँच के दौरान पाई। पुलिस ने उनके खिलाफ सबूत जमा किए। उन्हें एक सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा गया है। अगर वो ऐसा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।"