एसआईआई के अनुसार कोविशील्ड की कीमत की तुलना में अमेरिका की वैक्सीन की कीमत 1500 रुपए से अधिक है जबकि बाजार में रूस और चीन की वैक्सीन की कीमत 750 रुपए से अधिक है।
स्वदेशी वैक्सीन पर दिन-रात अफवाह फैलाने वाले आज पूछ रहे हैं कि सब को वैक्सीन पहले क्यों नहीं दिया? क्या कोरोना वॉरियर्स और बुजुर्गों को प्राथमिकता देना 'भूल' थी?
देश में वैक्सीनेशन के तीसरे चरण के तहत सोमवार को सरकार ने 18 साल से अधिक आयु के सभी लोगों को टीकाकरण की इजाजत दे दी है। बता दें कि देश में 1 मई से वैक्सीनेशन के तीसरे चरण की शुरुआत हो रही है।
NDTV की खबर में फर्जी दावा किया गया कि कोरोना के टीके का स्टॉक राजस्थान के पास खत्म हो रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार की तरफ से अभी राजस्थान की माँग के बाद भी उसे टीका मुहैया नहीं कराया गया है।
अब तक विश्व समुदाय के लिए 229.7 लाख यानी सवा दो करोड़ से ज्यादा कोरोना टीकों की खुराक की आपूर्ति की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि टीकों की 64.7 लाख डोज अनुदान के तौर पर मुहैया कराए गए हैं, जबकि 165 लाख डोज व्यावसायिक आधार पर दिए गए।
"भारत में बड़े पैमाने पर वैक्सीन का उत्पादन हो रहा है इसलिए हम भारतीय संस्थानों के लगातार संपर्क में हैं। दुनिया को समझना चाहिए कि इसका पूरी तरह से उपयोग किया जाना चाहिए।"