ममता बनर्जी ने सरकारी अस्पतालों में शिकायत निवारण सेल का निर्माण करने के डॉक्टरों के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। ममता ने पश्चिम बंगाल के हर अस्पताल में नोडल पुलिस ऑफिसर तैनात करने का निर्देश दिया है।
टीएमसी विधायक सुनील सिंह ने कहा, “पश्चिम बंगाल की जनता सबका साथ सबका विकास चाहती है। दिल्ली में मोदी जी की सरकार है और हम चाहते हैं कि यही सरकार प्रदेश में भी बने। ताकि हम पश्चिम बंगाल का विकास कर सकें।”
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि भले ही बंगाल में हड़ताल खत्म हो जाए, लेकिन वह डॉक्टरों की सुरक्षा की माँग के लिए सोमवार को देशभर में हड़ताल करेंगे। उनकी ये हड़ताल सेंट्रल एक्ट को लेकर होगी।
इससे पहले डॉक्टरों ने राज्य सचिवालय में बनर्जी के साथ बैठक के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था और इसकी बजाय उनसे गतिरोध सुलझाने को लेकर खुली चर्चा के लिए एनआरएस मेडिकल कॉलेज अस्पताल आने को कहा था।
कानून के अंतर्गत डॉक्टरों के साथ मारपीट या फिर उनके ऊपर हमला करने की घटना संगीन अपराध की श्रेणी में आ सकता है और इस अपराध के लिए दोषियों को कम से कम 12 वर्ष तक की सजा मिल सकती है। इसके साथ ही इस कानून को गैर-जमानती रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
दिल्ली स्थित एम्स के डॉक्टरों की असोसिएशन ने भी ममता सरकार को दो दिन (48 घंटे) का अल्टिमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि दो दिनों में पश्चिम बंगाल सरकार ने डॉक्टरों की माँगें स्वीकार नहीं की, तो फिर एम्स में भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जाएगी।
"उसे (उनके बेटे को) डॉक्टरी सहायता की ज़रूरत थी। मैं उसे कई अस्पतालों में लेकर गया। किसी ने सहायता नहीं की। उसकी गलती क्या थी? इस हड़ताल ने मेरे बेटे की जान ले ली।"
सवाल ज्यों का त्यों है, क्या उनकी सरकार डॉक्टरों के काम करने हेतु सुरक्षित माहौल दे सकेगी? क्या बंगाल में बीजेपी कार्यकर्ताओं की नृशंष हत्या का सिलसिला रुकेगा या राजनीतिक जंग के नाम पर बुरे से बुरे और बर्बर कृत्य को भी जायज ठहराने का सिलसिला यूँ ही जारी रहेगा? यह वक्त ही बताएगा।
डॉक्टरों की माँग है कि उनकी सुरक्षा में कानून लागू हो। आईएमए सेक्रेट्री ने कहा कि उन्हें पता है कि मरीज़ इस 'बंद' से परेशान होंगे, लेकिन उनकी सुरक्षा भी ज़रूरी है।