अच्छा होता कि अखिलेश यादव अपनी संवेदनहीनता को इस बात तक ही सीमित रखते कि उत्तर प्रदेश में ज़हरीली शराब कौन बना रहा है। उनका ये सवाल उचित होता कि प्रशासन आख़िर क्यों इन शराब की भट्टियों को चलने देता है।
कवाला गाँव की घटना के बाद मुजफ़्फरनगर शहर और शामली में भी दो संप्रदाय के बीच दंगे हुए थे। इस दंगे में लगभग 60 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
योगी आदित्यनाथ रांची से बोकारो होते हुए पुरुलिया जाएँगे। इस राजनीतिक उठा-पटक पर उत्तर प्रदेश सरकार के इकलौते मुस्लिम मंत्री ने तृणमूल से पूछा - हाउ इज द खौफ? यानी डर कैसा है?
योगी आदित्यनाथ ने 2013 में अखिलेश सरकार के दौरान हुए मुज़फ़्फ़रनगर दंगों से जुड़े जिन मुक़दमों को वापस लेने का निर्णय लिया है, उनमे कोई भी भाजपा नेता आरोपित नहीं है।
सरकारी सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले देशहित और जनता की बात करते हैं! अखिलेश यादव जी आप किसी पर भी सवाल उठाने से पहले अपने कार्यकाल का समय आखिर क्यों भूल जाते हैं?
सम्मेलन के दौरान भारत और विदेश दोनों में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले चुने गये भारतीय प्रवासियों को प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किए जाते हैं।