बड़ी विडंबना है कि सरकार चलेगी शरीयत के अनुसार लेकिन स्ट्रक्चर रहेगा डेमोक्रेटिक वैसे बाइडन की रेटिंग गिर गई। वैसे भी, देखा जाय तो गिरने के लिए यही एक अमेरिकी चीज बची थी।
ऐसा पहली बार नहीं है जब किसी गुरुद्वारे का इस्तेमाल सिख युवाओं को कट्टरपंथी बनाने या केंद्र सरकार या कृषि कानूनों के बारे में गलत सूचना फैलाने के लिए किया गया हो।
"आज हर हिंदुस्तानी मुसलमान को अपने आप से यह सवाल पूछना चाहिए कि उसे अपने मजहब में इस्लाम रिफॉर्म्ड और जिद्दत पसंदी चाहिए या पिछली सदियों के बहशीपन का इकदार (वैल्यूज़)।"