जिस इलाके में शादी के लिए लोग जमा हुए थे वह कोरोना संक्रमण के लिहाज से काफी संवेदनशील है। यहॉं से दो दिन पहले आठ संदिग्ध केस मिले हैं। इन सभी को आइसोलेशन में रखा गया है।
सत्तो वाली घाटी की मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए इकट्ठा हुए थे। पुलिस को मस्जिद की तरफ आते देख सभी अलग- अलग गलियों में घुस गए। धारा 144 उल्लंघन करने के आरोप में मस्जिद के मौलवी अब्दुल मद सहित 20- 25 अज्ञात नमाजियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक ट्वीट के द्वारा बताया कि उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए बुजुर्ग की दवा मँगवाकर उनके घर तक पहुँचाई। इसी के साथ जरूरतमंद लोगों के घरों तक किचन से सम्बंधित खाने की वस्तुएँ भी उपलब्ध करवा रही है।
उत्तराखंड में 22 मार्च से ही पूरी तरह से लॉकडाउन है। बावजूद विदेशी महिला राज्य में दाखिल हो गई। काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर अकेली महिला को देख अधिकारियों के होश उड़ गए।
“हमारे परिवार के सदस्यों को मार दिया गया है, बेटियों का धार्मिक रुपांतरण करा दिया और संपत्तियाँ छीन ली गई है। वहाँ पर जिंदगी मौत से भी बदतर है। हमें भारत सरकार द्वारा बनाए गए नए कानून के तहत कुछ उम्मीद है।”
24 फरवरी की रात को जब दिलबर नेगी दुकान की बेकरी के गोदाम में सो रहा था, उसी समय दंगाइयों ने गोदाम में आग लगा दी। दंगाइयों ने दिलबर के हाथ-पैर काटे और अधमरी अवस्था में ही उसे आग के हवाले कर दिया। दिलबर के साथी श्याम का कहना था कि दंगाइयों ने उस पर भी हमला किया, जिससे वो गंभीर रूप से घायल हो गया।
दिग्गज क्रिकेटर रहे जॉन्टी रोड्स ने ऋषिकेश में गंगा में डुबकी लगाई। ट्विटर पर इस पल को साझा करते हुए लिखा कि पवित्र माँ गंगा में डुबकी लगाने से न सिर्फ़ भौतिक बल्कि दैविक रूप से भी मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जब दुकान मालिक अनिल पाल पुलिस के साथ अपनी दुकान का हाल जानने वहाँ पहुँचे तो उन्हें मृतक नेगी का शरीर दूसरी मंजिल पर सीढ़ी के पास मिला, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो दंगाइयों को देखकर बिल्डिंग से कूदने की कोशिश कर रहे थे।
23 फ़रवरी की शाम दंगाई शाहदरा में घुसे। दिलबर सिंह नेगी को निशाना बनाया। हाथ, पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया। इसके बाद वहॉं भगदड़ मच गई। नेगी के परिजन इतने दहशत में हैं कि अब भी मौके पर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे।