महाराष्ट्र की 288 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो रहा है, जबकि हरियाणा की 90 सदस्यों वाली विधानसभा का कार्यकाल 2 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) सुनील अरोड़ा सहित चुनाव आयोग के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तीनों दलों के प्रतिनिधियों ने इस साल झारखंड, महाराष्ट्र और हरियाणा में और जनवरी 2020 में दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन को सुधारने का मौका माँगा।
तृणमूल और सीपीआई के अलावा एनसीपी के राष्ट्रीय दर्जे पर भी तलवार लटक रही है। अगर किसी पार्टी से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिन जाता है तो वह एक ही चुनाव चिह्न पर पूरे देश में चुनाव लड़ने के योग्य नहीं रह जाती है।
इस पोस्टर पर पंजाब के मंत्री का कहना है कि यह मामला ग़लत पहचान का है। श्याम अरोड़ा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इस मामले की जाँच कराई जाएगी। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि जिस शख़्स की फोटो पर विवाद हो रहा है, उस पर भी संशय बना हुआ है कि वो उसी आरोपित की है भी कि नहीं!
इस पत्र में उसी भावना का इजहार किया गया है जिसका राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देते हुए किया था। उन्होंने कहा था कि चुनाव के दौरान कॉन्ग्रेस का मुकाबला किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि पूरी सरकारी मशीनरी से था। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं के तटस्थ नहीं होने की बात भी कही थी।
मोदी विरोध में यह लोग दिमाग से इतने पैदल हो चुके हैं कि प्राइमरी स्कूल स्तर की गणित भी सर के ऊपर से उड़ रही है। इन्हें दिमाग का इलाज कराना चाहिए। ये लोग 2000 वोट को 20 लाख से गुणा भी नहीं कर पाते हैं और चले पत्रकारिता करने!
इससे पहले, चुनाव आयोग ने मतदान में इस्तेमाल की गई मशीनें, 23 मई को हो रही मतगणना से पहले नई मशीनों से बदलने के आरोपों और शिकायतों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताकर खारिज कर दिया था।
ऑपइंडिया के पास शुंगलू कमिटी का वह रिपोर्ट है जिसमें अशोक लवासा की बेटी और बेटे के अनुचित लाभ उठाने की बात कही गई है। शुंगलू कमिटी ने ये साफ बताया है कि सिलेक्शन कमिटी ने अन्वी लवासा के प्रोजेक्ट ऑफिसर (PO) के रूप में चयन में उन्हें उनके पॉवरफुल संबंधों की वजह से फेवर किया गया।
विपक्षी दलों ने मतगणना के समय किसी भी मतदान केंद्र पर गड़बड़ी पाए जाने की स्थिति में देशभर में सभी विधानसभा क्षेत्रों में EVM के आँकड़ों के साथ VVPAT मशीन की पर्चियों से मिलान की माँग की थी।
टुडे चाणक्य के अलावा किसी भी एजेंसी का एग्जिट पोल सटीक नहीं था। इसलिए एग्जिट पोल को लेकर मीडिया के साथ-साथ जनता की उत्सुकता तो रहती है लेकिन यह उम्मीदों पर भी खरी उतरे, इसकी संभावना नहीं के बराबर मान के चलनी चाहिए।