मंगलवार की सुबह देशवासियों को सबसे पहली यही खबर मिली कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के घर में घुसकर जैश-ए-मोहम्मद के अड्डे पर ‘एयर स्ट्राइक’ से 1000 किलो बमबारी कर तहस-नहस कर दिया, जिसमें 300 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए।
जहाँ पाक सेना ने 'कुछ भी नहीं हुआ, भारतीय वायु सेना के जहाज जल्दी भाग गए' बोलकर अपनी इमेज बचाई, वहीं पाकिस्तानी नागरिकों ने अपनी सरकार और आर्मी की जमकर क्लास लगाई।
पाकिस्तान को सपने में भी यह अंदेशा नहीं था कि भारतीय वायुसेना इतनी अंदर तक घुस सकती है। सूत्रों के अनुसार, वायुसेना ने बालाकोट में आज मंगलवार (फरवरी 26, 2019) तड़के 3.45 से 3.53 तक बमबारी कर आतंकी कैम्पों को तबाह कर दिया।
"पाकिस्तान को कई बार सबूत दिए गए। लेकिन आतंकी संगठनों के खिलाफ उनकी ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई। पाकिस्तान के रुख को देखते हुए हमने यह रणनीति तैयार की।"
टोंक में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने पाक पीएम इमरान ख़ान को आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने को कहा था। ख़ान ने प्रत्युत्तर में कहा है कि अगर भारत 'कार्रवाई करने योग्य' सबूत देता है तो वह उपयुक्त क़दम उठाएँगे।
पाकिस्तान को अब आर्थिक रूप से नुक़सान उठाना पड़ेगा, क्योंकि पाक कारोबारियों के लिए वाघा (पाकिस्तान) में खड़े ट्रकों को वापस मँगवाना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए कारोबारियों को अपने देश में कई आवश्यक औपचारिकताओं से गुज़रना पड़ता है।
पठानकोट और उरी हमला भी उसकी ही देन है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान पर की कड़ी आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा कि वो टीवी के सामने बैठकर भारत को संदेश देना बंद करें और अपने बनावटीपन से बाहर आएँ।
भारत को इसके लिए आमंत्रित करना सम्मान की बात तो है ही साथ में यह पाकिस्तान के लिए तगड़े झटका देने का काम भी करेगा। यह पहला अवसर होगा जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज इस कार्यक्रम में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।
जैसे-जैसे भारत एक-एक कर कड़े क़दम उठाते हुए पाकिस्तान को घेर रहा है- चाहे पहले पाकिस्तान से ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन‘ का दर्जा वापस ले लेना हो या अब सरकार ने अपने हिस्से का रावी, ब्यास और सतलुज के पानी को पाकिस्तान को देने की बजाय उस से यमुना को सींचने की योजना या उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में घुटने टेकने को मजबूर करना।