लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष का जमावड़ा लगाने वाली ममता अब उनसे कन्नी काटने लगी है। बंगाल में कॉन्ग्रेस ने विधायक दल का नेता अब्दुल मन्नान को बनाया जाना भी उन्हें रास नहीं आया। मन्नान राज्य के प्रमुख मुस्लिम नेता है। इसके अलावा ओवैसी की गतिविधियों से भी उनकी चिंता बढ़ी हुई है।
ममता बनर्जी ने दिल्ली में होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक का बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस और वामदल पश्चिम बंगाल में गंदी राजनीति कर रहे हैं। वह अब अकेले नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी।
सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।
TMC द्वारा पोस्टर लगाए गए थे जिसमें दावा किया गया था कि CAA और NRC को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी CAA और NRC के ख़िलाफ़ अपना विरोध दर्ज कराने के लिए कम से कम चार मौकों पर सड़क पर उतरीं।
राज्यपाल धनखड़ जादवपुर यूनिवर्सिटी में चांसलर के तौर पर बैठक में हिस्सा लेने गए थे लेकिन छात्रों ने इसका बहिष्कार किया। छात्रों ने अचानक राज्यपाल की कार घेर ली और नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान राज्यपाल तकरीबन 45 मिनट अपनी कार में ही बंद रहे। बाद में सुरक्षा गार्ड उन्हें निकाल कर बाहर ले गए।
कलकत्ता हाई कोर्ट ने ममता बनर्जी से CAA और NRC के खिलाफ लगाए गए सभी विज्ञापनों को हटाने का आदेश दिया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब 9 जनवरी 2020 को होगी।
''अगर जरूरत पड़ी तो हम लोग उन्हें (शाह को) शहर के हवाई अड्डे के बाहर कदम नहीं रखने देंगे। उन्हें रोकने के लिए हम लोग एक लाख लोगों को वहाँ जमा कर सकते हैं।"
ममता बनर्जी ने केंद्र की मोदी सरकार के सबका साथ सबका विकास नारे पर निशाना साधते हुए कहा था, "केवल बीजेपी यहाँ बचे और बाकी सब चले जाएँ, यही बीजेपी की राजनीति है। यह कभी नहीं हो पाएगा। भारत सभी का है। अगर सबका साथ नहीं रहेगा तो सबका विकास कैसे होगा? नागरिकता क़ानून किसके लिए है?"
"मुर्शिदाबाद जाते हुए मुझे नवग्राम के पास मुस्लिमों की बड़ी भीड़ ने घेर लिया है। मेरी गाडी के दोनों तरफ भीड़ जमा है। प्रशासन कोई सुनवाई नहीं कर रहा। SP और DG भी फ़ोन नहीं उठा रहे।"