2015 में इसी प्रकार का एक पीआईएल दाखिल किया गया था जिसमें काग़ज़ातों के साथ राहुल गाँधी की नागरिकता पर सवाल खड़े किए गए थे। इस पीआईएल को सुप्रीम कोर्ट ने रिजेक्ट कर दिया था। अदालत ने इस याचिका को औचित्यहीन और तुच्छ करार दिया था।
ऐसे आदमी के शर्ट में एक छेद हो, तो उँगली डाल कर पूरा फाड़ कर देख ही लेना चाहिए कि भाई तुम्हारे 2009, 2014 और 2019 के चुनावी हलफ़नामे में इतने बदलाव क्यों हैं? आखिर बैकऑप्स नामक कम्पनी का डायरेक्टर प्रियंका को चुनावों के तुरंत पहले क्यों बना दिया गया था?
राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए ख़ुलासा किया था कि राहुल गाँधी ने एक प्राइवेट कम्पनी के रजिस्ट्रेशन काग़ज़ात में ख़ुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था। ये कम्पनी लंदन में स्थित है। इसी आरोप पर गृह मंत्रालय ने...
राहुल गाँधी व्यक्तित्व नहीं, एक मानसिक अवस्था है। कभी-कभी व्यक्ति व्यक्तिवाचक संज्ञा से ऊपर उठ कर जातिवाचक संज्ञा हो जाता है, और उनमें से राहुल गाँधी जैसे महज़ चंद लोग ऐसे होते हैं जो व्यक्ति होते हुए भी विशेषण बन जाते हैं।
"ज्यादातर आर्थिक विकास कॉन्ग्रेस के शासन काल में ही हुआ है और सूई से लेकर विमान तक सब कुछ कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में ही बना है। राफेल सौदे को लेकर हुए विवाद की वजह से इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हार तय है।"
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सुशील मोदी के शपथ-पत्र पर दिए गए बयान और राहुल गाँधी के भाषण की सीडी देखने के बाद आइपीसी की धारा 500 के तहत समन जारी किया है। आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज...
एक और मानहानि की शिकायत में, जो आरएसएस अध्यक्ष द्वारा राहुल की उस टिप्पणी के लिए दायर की गई थी कि जिसमें राहुल ने दावा किया था, “भगवा संगठन महात्मा गाँधी की हत्या के लिए जिम्मेदार था।’ इस मामले में भी राहुल गाँधी ने कोर्ट में यू-टर्न ले लिया था और दावा किया कि उन्होंने ऐसा कभी नहीं कहा था बल्कि उनकी टिप्पणियों की गलत व्याख्या की गई थी।”