बाला साहेब के बेटे और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा के साथ 30 साल पुराना गठबंधन लगभग खत्म कर दिया है। वे अड़े हैं कि भाजपा के साथ सरकार तभी शिवसेना बनाएगी जब उसे ढाई साल के लिए सीएम की कुर्सी मिलेगी।
राज्यपाल ने एनसीपी को भी सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया क्योंकि वो राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। कॉन्ग्रेस द्वारा शिवसेना को समर्थन के सम्बन्ध में रुख स्पष्ट न किए जाने के कारण शिवसेना के नेतृत्व में सरकार का गठन नहीं हो सका।
NCP के एक नेता का कहना है कि जब तक तीनों पार्टियाँ- कॉन्ग्रेस, NCP और शिवसेना, सरकार में शामिल नहीं हो जातीं, तब तक कोई स्थिरता नहीं आएगी। उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि कॉन्ग्रेस सरकार का हिस्सा हो।"
कॉन्ग्रेस और एनसीपी के सहयोग से सरकार बनाने को लेकर उत्साहित शिवसेना को तगड़ा झटका लगा है। सोनिया गॉंधी ने उसे समर्थन देने को लेकर आखिरी पलों में पत्ते खोलने से इनकार कर दिया। इसके बाद गवर्नर ने एनसीपी को बुलावा भेजा।
शिवसेना को कॉन्ग्रेस के समर्थन पर व्यंग्य करते हुए हिन्दी फ़िल्म करन-अर्जुन की एक तस्वीर ट्विटर पर शेयर की गई। इस तस्वीर में अभिनेत्री राखी को सोनिया गाँधी, शाहरुख खान को उद्धव ठाकरे और सलमान ख़ान को आदित्य ठाकरे के रूप में दर्शाया गया।
शिवसेना ने राज्यपाल से कहा कि उन्हें सरकार बनाने के लिए विधायकों का समर्थन-पत्र सौंपने हेतु 3 दिनों का समय चाहिए। हालाँकि, राज्यपाल ने उन्हें तय समय-सीमा से ज्यादा समय देने से इनकार कर दिया।
कॉन्ग्रेस के सभी विधायक जयपुर में एक रिसॉर्ट में रुके हुए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेतागण वहीं पर नव-निर्वाचित विधायकों के साथ लगातार मंत्रणा कर रहे हैं। अभी उद्धव ठाकरे कॉन्ग्रेस की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद वो आगे की रणनीति तैयार करेंगे।
एनसीपी नेता नवाब मलिक ने कहा कि यदि शिवसेना को हमारा समर्थन चाहिए तो उसे बीजेपी के साथ सारे रिश्ते तोड़ने का ऐलान करना होगा। और अब अरविंद सावंत के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे के ऐलान के साथ ही यह साफ हो गया है कि शिवसेना ने एनडीए छोड़ने का मन बना लिया है।
एनसीपी ने कहा है कि यदि शिवसेना को हमारा समर्थन चाहिए तो उसे बीजेपी के साथ सारे रिश्ते तोड़ने होंगे। उसे एनडीए से बाहर आना होगा। मोदी कैबिनेट में शामिल उसके नेताओं को इस्तीफा देना होगा।