गुजरात विधानसभा चुनाव के दौरान रोहन गुप्ता पर चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप लगे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर पहले चरण के चुनाव के बाद एग्जिट पोल शेयर कर दिया था। इस मामले में क्राइम ब्रांच ने उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था।
एक ही तरह के पोस्ट पर दो नीति अपनाने का अर्थ यह हुआ कि किसी खास संस्था पर इनका काँटा ज्यादा संवेदनशील हो जाता है, और वो भी शायद तब जब किसी खास पहचान वाले लोग एक साथ ऐसी खबरों को रिपोर्ट करते हैं।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि निखत पर उसका पति और ससुर लाठी-डंडे बरसा रहे हैं। बीच में उसकी सास अपनी बहू को बचाने आती है तो ये दोनो उन्हें भी नहीं बख्शते और उनपर लाठी-डंडे चलाने लगते हैं।
गुलाम सरवर खान अपनी हरकत से सोशल मीडिया में मजाक का केंद्र बन गए। एक यूजर ने कहा कि पाकिस्तान को मनोरंजन इंडस्ट्री की जरूरत नहीं है, क्योंकि मंत्री काफी मनोरंजन कराते हैं। एक अन्य ने मंत्री जी को पासपोर्ट नहीं होने पर हिजाब पहनने की सलाह दी।
एक यूजर कहता है, "और कितना नीचे गिरेंगे जनाब, इसके नीचे दोजख में ही जाना होगा।" जबकि दूसरा यूजर कहता है कि ऐसा ही (गिरना) पाकिस्तान सरकार के साथ होने वाला है। इस वीडियो को देखने के बाद ऐसे ही मजेदार कॉमेंट लोगों ने किए।
इस ट्वीट पर भारतीयों द्वारा भी उन्हें जमकर खरी खोटी सुनाई गई। उन्हें कहा गया कि उनके पास दिमाग बच्चों वाला है और पाकिस्तान ने उन्हें विज्ञान और तकनीक मंत्री बनाया हुआ है।
सोशल मीडिया पर वायरल होती वीडियो पाकिस्तान के पार्लियमेंट हाउस की है, जहाँ पर पाक मंत्री एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे थे। तभी नूर नाम के शख्स ने वहाँ पहुँचकर राशिद खान का कॉलर पकड़ लिया और अपने 22 लाख...
जब से इसकी शुरुआत हुई थी, तभी से हिन्दू-विरोधी प्रोपेगंडा के सबसे मुखर स्वरों में इसकी गिनती होने लगी थी। जिस भी अपराध में आरोपित हिन्दू हो और पीड़ित गैर-हिन्दू, वह अपने-आप 'Hate Crime' हो जाता था लेकिन इसी के उलट वाले मामलों में लीपापोती करते थे।
गौतम गंभीर को जीप से बाँधे जाने का यह मीम तथ्यात्मक रूप से झूठा है। झूठ तो यह भी है कि PM मोदी चोर हैं, क्योंकि किसी अदालत में भी ऐसा कोई मामला नहीं। तो इन दोनों मामलों में शेहला के साथ कानून क्या करे?
हड़प्पा वैदिक नहीं था, जबकि वैदिक जो थे वो हड़प्पन ही थे। क्योंकि हड़प्पा सभ्यता पुरानी और वेद बाद में आया। हड़प्पा में दफनाने को प्राथमिकता दी जाती थी जबकि वेद में दाह संस्कार। हड़प्पा सिंधु-सरस्वती के किनारे समृद्ध हुई है जबकि वेद गंगा-यमुना के किनारे। दोनों का हिदू धर्म में योगदान हैं। स्पष्ट!"