Homeवीडियोकॉन्ग्रेस अध्यक्ष चुनाव: सोनिया ने, सोनिया को, सोनिया से: अजीत भारती का वीडियो |...

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष चुनाव: सोनिया ने, सोनिया को, सोनिया से: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Sonia vs Sonia vs Sonia at INC CWC

इस बार थोड़ा सा मसाला देखने को मिला। पार्टी के 23 बुजुर्ग नेताओं ने सोनिया को चिट्ठी लिखकर बदलाव की माँग की। कपिल सिब्बल ने कहा कि 30 सालों से उन्होंने बीजेपी के समर्थन में एक शब्द भी नहीं बोला, फिर भी उन पर बीजेपी से मिलीभगत का आरोप...

7 घंटे तक कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी की मीटिंग चली। मीटिंग इस बात पर हुई कि अध्यक्ष कौन बनेगा? हालाँकि, इसका कोई औचित्य नहीं है। ये बस दिखाने के लिए है कि कॉन्ग्रेस में लोकतंत्र है और हर बातें लोकतांत्रिक तरीके से मानी जाती है। ये अलग बात है कि कॉन्ग्रेस की सर्वेसर्वा सोनिया गाँधी हैं, और जब उनका मन इससे उबल जाता है, तो राहुल गाँधी को सर्वेसर्वा बनाया जाता है। बीच-बीच में प्रियंका गाँधी को भी मजबूत और सशक्त नेतृत्व के रूप में दर्शाया जाता है।

इस बार थोड़ा सा मसाला देखने को मिला। पार्टी के 23 बुजुर्ग नेताओं ने सोनिया को चिट्ठी लिखकर बदलाव की माँग की। कपिल सिब्बल ने कहा कि 30 सालों से उन्होंने बीजेपी के समर्थन में एक शब्द भी नहीं बोला, फिर भी उन पर बीजेपी से मिलीभगत का आरोप लगा है। कुछ लोग मीटिंग से भी उठकर चले गए।

पूरा वीडियो इस लिंक पर क्लिक कर के देखें

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -