Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयस्टेडियम में चल रहा था फुटबॉल का मैच, बिजली गिरी और खिलाड़ी की हो...

स्टेडियम में चल रहा था फुटबॉल का मैच, बिजली गिरी और खिलाड़ी की हो गई मौत : पैर-सीना झुलसा, Video देख लोगों को नहीं हो रहा विश्वास

बिजली गिरने से मरने वाले खिलाड़ी की पहचान 35 वर्षीय सेप्तियन रेहरजा के रूप में हुई है। बिजली गिरने के कारण उनके पैर और सीना जल गए थे। उनकी इस अप्रत्याशित मौत से उनके फैन्स में शोक की लहर है।

इंडोनेशिया से एक हैरान करने वाला वीडियो सामने आया है। यहाँ एक फुटबॉल खिलाड़ी पर बीच मैदान बिजली गिर गई। बिजली गिरने के कारण उसकी मौत हो गई। यह सब इतनी तेजी से हुआ कि कोई कुछ समझ ही नहीं पाया। इस घटना का वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, यह घटना शनिवार (10 फरवरी, 2024) की है। मैच इंडोनेशिया के बड़े शहर बांडुंग में एक स्टेडियम में हो रहा था, यह एक मैत्री मैच था जो कि FBI सुबांग और 2 FLO फुटबॉल क्लब के बीच खेला जा रहा था। इस खेल में जिस खिलाड़ी की बिजली गिरने से मौत हुई, उसकी पहचान 35 वर्षीय सेप्तियन रेहरजा के रूप में हुई है।

इस घटना के वायरल वीडियो में दिखता है कि रेहरजा फील्ड में बाकी साथी खिलाड़ियों से दूर खड़े होते हैं और थोड़ा आगे बढ़ते हैं। इसी बीच यहाँ तेज रोशनी होती है और उन पर बिजली गिर जाती है। बिजली गिरने से खिलाड़ी रेहरजा की मौके पर ही जमीन पर गिर जाते हैं और अचेतन अवस्था में चले जाते हैं।

उन्हें देख मैदान में एकाएक बिजली गिरने से हलचल मच जाती है। एक दूसरा खिलाड़ी रेहरजा के पास दौड़ कर जाता है। इसके बाद बाकी खिलाड़ी भी यहाँ पहुँचते हैं। बताया गया है कि बिजली गिरने के कुछ मिनट बाद तक रेहरजा की साँसे चल रही थी लेकिन बाद में उनकी मौत हो गई।

बिजली गिरने के कारण उनके पैर और सीना जल गए थे। उनकी इस अप्रत्याशित मौत से उनके फैन्स में शोक की लहर है। उनकी टीम के समर्थक सोशल मीडिया पर दुख प्रकट कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक वर्ष के भीतर ऐसी ही दूसरी घटना है। इससे पहले के अंडर 13 खिलाड़ी की भी बिजली गिरने से मौत हो गई थी। आकाशीय बिजली गिरने से होने वाली मौतों का अभी तक कोई आधिकारिक आँकड़ा तो नहीं एकत्र किया जा सका लेकिन अलग-अलग रिपोर्ट बताती हैं कि प्रतिवर्ष इससे 6000-24000 तक मौत होती हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

क्या भारत की राजनीति पहली बार पूरी तरह ‘हिन्दू-केंद्रित’ हो गई है?

क्या भारत की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव चुनावी नतीजों में नहीं, बल्कि राजनीतिक बहस के केंद्र में हुआ है? PM मोदी मजबूत हों या कमजोर, सत्ता में BJP रहे या विपक्ष आए, क्या हिन्दू पहचान और हिन्दू समाज से जुड़े सवाल अब भारतीय राजनीति के केंद्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुके हैं?

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।
- विज्ञापन -