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शंभू बॉर्डर पर ‘किसान’ कर रहे इंतजार, गुजरात में घूम रहीं ‘हमदर्द’ रिहाना: अंबानी के आँगन में नाचने की लेंगी ₹74 करोड़, नेटिजन्स ने घेरा

रिहाना भारत में पिछली दफा तब चर्चा में आई थीं तब आई थीं, जब उन्होंने किसान आंदोलन के नाम पर विदेश में बैठकर भारत को बदनाम करने का प्रयास किया था। संयोग से इस बार वह जब भारत में आई तो भी किसान आंदोलन चल रहा है।

गुजरात के जामनगर में अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट की शादी से पूर्व अंबानी परिवार द्वारा आयोजित कार्यक्रम में देश-विदेश से कई हस्तियाँ शामिल होने आई हैं। इन्हीं जानी-मानी हस्तियों में एक नाम विदेशी सिंगर रिहाना का भी है। उन्होंने कार्यक्रम में स्टेज परफॉर्मेंस देने के लिए 66 करोड़ से लेकर 74 करोड़ रुपए के बीच की रकम ली है।

यही मशहूर सिंगर रिहाना भारत में पिछली दफा तब चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने किसान आंदोलन के नाम पर विदेश में बैठकर भारत को बदनाम करने का प्रयास किया था। संयोग से इस बार वह जब भारत में आई हैं तो भी कथित किसानों का आंदोलन चल रहा है। ऐसे में सवाल उठना तो लाजिमी है कि क्या किसानों से तब विदेश में बैठकर हमदर्दी दिखाने वाली रिहाना इस बार किसानों से मिलने शंभू बॉर्डर जाएँगी या फिर उनकी वो हमदर्दी नकली थी।

पत्रकार राजीव सचान ने रिहाना के पाखंड पर गौर कराते हुए लिखा, “चार साल पहले तीन कृषि कानूनों को जब अंबानी -अडानी कानून करार देकर किसान रास्तों पर बैठ गए थे, तब जिस रिहाना ने उनसे नकली हमदर्दी जताई थी, वही अब अंबानी के यहाँ शादी में नाचने- गाने आई है, जिसमें अडानी भी मेहमान हैं।”

बाला नाम के एक्टिव एक्स यूजर ने रिहाना के प्रोग्राम में जाने की वीडियो को शेयर करते हुए तंज भरे अंदाज में लिखा- “रिहाना जामनगर में अनंत-राधिका की प्री वेडिंग के लिए पहुँच गई है। हमें लगा था कि वो पहले किसानों के प्रदर्शन में जाएगी।”

मेघ अपडेट्स ने इस पर लिखा, “दो साल पहले रिहाना कथित किसान आंदोलन की ब्रांड अंबेसडर बन गई थीं लेकिन अब इस बार वो अंबानी के बेटे की शादी में नाचने आई हैं जब दूसरी बार वही ड्रामा चालू है।”

मालूम हो कि रिहाना के भारत आने पर जो लोग उनपर सवाल उठा रहे हैं वो बिलकुल निराधार नहीं हैं। साल 2021 में कथित किसानों के आंदोलन पर उन्होंने ट्वीट शेयर करके कहा था- ‘आखिर लोग इस बारे में क्यों नहीं बात कर रहे हैं।’

उनके इसी ट्वीट पर कुछ भारत विरोधी लोगों ने उनकी खूब वाह-वाही की थी लेकिन कुछ दिन बाद ही ये रिपोर्ट्स आ गई थी कि रिहाना के खालिस्तानी लिंक हैं जिन्होंने इस प्रदर्शन पर ट्वीट करने के लिए 18 करोड़ रुपए तक दिए।

अगर उनसे जुड़ी ये रिपोर्ट झूठी थी और रिहाना की किसानों के प्रति संवेदना सच्ची थी तो उन्हें कथित किसानों की भावनाओं से अब भी मतलब होना चाहिए था। उन्हें अब भी भारत आकर एक बार शंभू बॉर्डर पर डटे किसानों से मुलाकात कर ही लेनी चाहिए थी। लेकिन नहीं, वो भारत आईं और उसी कार्यक्रम में गईं जहाँ जाने के लिए उन्हें मोटी रकम मिली है। इससे ये तो साफ होता ही है कि 2021 में किया गया ट्वीट सिर्फ प्रोपेगेंडा का हिस्सा था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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