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जिस घी से बनता था तिरुपति का मशहूर लड्डू, उसमें मिला था बीफ-सूअर की चर्बी और मछली का तेल: लैब रिपोर्ट ने किया कन्फर्म, बोले हिंदू- इस पाप का प्रायश्चित नहीं

गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की "पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र" (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी।

तिरुपति के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता पर उठाए गए सवाल सच थे। जाँच नतीजों में पता चला है कि जगन सरकार ने तिरुपति मंदिर में जिस घी से लड्डू बनाने की अनमुति दी थी उसमें हकीकत में जानवरों की चर्बी थी। उसमें बीफ फैट, मछली का तेल और लार्ड (सूअर की चर्बी), ताड़ का तेल और अन्य चीजें शामिल थीं।

गुजरात स्थित राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की “पशुधन एवं खाद्य विश्लेषण एवं अध्ययन केंद्र” (सीएएलएफ) प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, प्रसाद तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले घी में जानवर की चर्बी थी। रिपोर्ट में देख सकते हैं साफ-साफ इन सारी चीजों का जिक्र है। रिपोर्ट में लिखा है- घी में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहूं के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, नारियल, पाम कर्नेल फैट और पाम ऑयल के अलावा बीफ टैलो, लार्ड और मछली का तेल आदि है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद इस हरकत से हिंदू आहत हैं।

इस मामले को जहाँ स्वयं प्रदेश मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू द्वारा उठाया गया तो वहीं केंद्रीय मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव बंदी संजय ने कहा, “तिरुमाला के लड्डू को बहुत ही ‘पवित्र प्रसाद’ माना जाता है, इसे दूषित करना अक्षम्य पाप है… पिछली सरकार के कार्यकाल में, अन्य धर्मों के कुछ लोगों को टीटीडी (तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम) बोर्ड में शामिल किया गया था… इसलिए ऐसी घटना हुई। मैं आंध्र प्रदेश सरकार से तुरंत जाँच करने और सख्त कार्रवाई करने का अनुरोध करता हूँ।”

तिरुपति मंदिर और लड्डू का महत्व

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के तिरुमाला में स्थित तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित हिंदू मंदिरों में से एक है। यह मंदिर तिरुमाला पहाड़ियों के ऊपर स्थित है। दुनिया भर से भक्त प्रार्थना करने और आशीर्वाद लेने के लिए मंदिर आते हैं, जिससे यह भारत के सबसे समृद्ध और व्यस्ततम तीर्थ स्थलों में से एक बन गया है। इस मंदिर को तिरुमला तिरुपति देवस्थानम(एक स्वतंत्र ट्रस्ट) द्वारा मैनेज किया जाता है। मंदिर जितना अपनी रीतियों के लिए प्रसिद्ध है उतना ही लड्डू के लिए है। यहाँ रोजाना 3.5 लाख लड्डू बनते हैं जिनके लिए 400-500 किलो घी लगता है, 750 किलो काजू, 500 किलो किशमिश और 200 किलो इलायची लगती है।

हालिया विवाद के बाद टीटीडी ने एक कमेटी बनाई है जो लड्डुओं के लिए गुणवत्तापूर्ण घी खरीदने के लिए नियम व शर्तों पर सलाह देगी। वहीं आम हिंदू इस खबर को सुन हैरान हैं। उनका कहना है कि भगवान और भगवान के भक्तों के साथ किया गया ये ऐसा पाप है जिसकी कोई क्षमा नहीं है। भगवान इसका फल YSRCP को जरूर देंगे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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