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कर्नाटक में सभी नौकरी की भर्तियों पर रोक: आरक्षण के भीतर आरक्षण लेकर आ रही कॉन्ग्रेस सरकार, SC वर्ग के सब-कोटे के लिए बनाई कमिटी

इस आयोग का नेतृत्व एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज करेंगे और तीन महीनों के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस आयोग की सिफारिशों के आने तक, कर्नाटक सरकार सरकारी नौकरियों में नई भर्ती के लिए अधिसूचना जारी नहीं करेगी।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने अनुसूचित जाति (SC) समुदायों के लिए आंतरिक आरक्षण (Internal Reservation) को लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए एक एक सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है, जो जरूरी डेटा जुटाकर आगे के कदम उठाएगा। सोमवार (28 अक्टूबर 2024) को मंत्रिमंडल की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया।

कानून मंत्री एच.के. पाटिल के अनुसार, इस आयोग का नेतृत्व एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज करेंगे और तीन महीनों के भीतर इसकी रिपोर्ट पेश की जाएगी। इस आयोग की सिफारिशों के आने तक, कर्नाटक सरकार सरकारी नौकरियों में नई भर्ती के लिए अधिसूचना जारी नहीं करेगी।

कर्नाटक सरकार का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश पर आधारित है। सोशल वेलफेयर मंत्री एच. सी. महादेवप्पा के अनुसार, इस आयोग को आंतरिक आरक्षण के लिए राष्ट्रीय जनगणना डेटा या फिर अपने स्तर पर डेटा जुटाने की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि फिलहाल जनगणना में आंतरिक आरक्षण से संबंधित कोई डेटा नहीं है। नई रिपोर्ट राज्य कैबिनेट में चर्चा के लिए प्रस्तुत की जाएगी और फिर इसे राज्य विधानसभा में रखा जाएगा।

ग्रामीण विकास मंत्री प्रियंक खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने आंतरिक आरक्षण देते समय व्यावहारिक डेटा का उपयोग करने का निर्देश दिया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार का सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सर्वेक्षण का डेटा कोर्ट में मान्य होगा और क्या इसे केंद्र सरकार द्वारा मंजूरी मिल सकती है। मंत्री महादेवप्पा ने यह भी बताया कि सरकार सभी 101 अनुसूचित जाति समुदायों को भरोसे में लेकर ही आंतरिक आरक्षण लागू करेगी। इस मुद्दे पर SC लेफ्ट, SC राइट, लम्बानी और भोवी जैसे समुदायों से चर्चा की गई, और सभी ने व्यावहारिक डेटा पर आधारित आंतरिक आरक्षण की इच्छा व्यक्त की है।

बीजेपी सरकार ने दिया था आरक्षण, कानूनी दाँवपेंच में उलझकर रुका

बता दें कि पिछली बीजेपी सरकार के समय सदाशिवा आयोग ने अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत कोटा को आंतरिक रूप से 6 प्रतिशत SC लेफ्ट, 5 प्रतिशत SC राइट, और 3 प्रतिशत भोवी, लम्बानी, कोरचा और कोरमा समुदायों के लिए बाँटने की सिफारिश की थी। जिसके बाद अक्टूबर 2022 में बसवराज बोम्मई की सरकार ने आरक्षण को बढ़ाकर 15 से 17 प्रतिशत कर दिया था, जिसका काफी विरोध हुआ। यहाँ तक कि पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के घर पर पथराव तक किया गया था। बाद में कानूनी अड़चनों की वजह से ये आरक्षण रोक दिया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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