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वाजपेयी राज में बना, कॉन्ग्रेस शासनकाल में आया, पर पीएम मोदी ने बनाया काले धन से लड़ने का ‘हथियार’: जानिए कैसे PMLA से कसा शिकंजा, ED ने 20 साल का दिया हिसाब

2005 में लागू हुए गए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) कानून के तहत अब तक जाँच एजेंसी ED ₹1.45 लाख करोड़ की सम्पत्ति अटैच कर चुकी है। अकेले 2024 में ही एजेंसी ने ₹21 हजार करोड़ से अधिक सम्पत्ति अटैच की है।

मोदी सरकार के अंतर्गत प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई में काफी तेजी आई है। ED ने 2014 के बाद से भ्रष्टाचार से कमाई गई लाखों करोड़ की सम्पत्ति को सीज किया है और कई मामलों में उन्हें वापस पीड़ितों या एजेंसियों तक पहुँचाया है। ED ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत सजा दिलाने में भी बीते सालों में बड़ी सफलता पाई है। इसके कुछ आँकड़े भी सामने आए हैं।

95% प्रॉपर्टी मोदी सरकार में हुई सीज

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2005 में लागू हुए गए धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) कानून के तहत अब तक जाँच एजेंसी ED ₹1.45 लाख करोड़ की सम्पत्ति अटैच कर चुकी है। अकेले 2024 में ही एजेंसी ने ₹21 हजार करोड़ से अधिक सम्पत्ति अटैच की है।

इस ₹1.45 लाख करोड़ में से ₹1.40 लाख करोड़ तो मोदी सरकार के अंतर्गत ही जब्त हुए हैं। इसका अर्थ है कि भ्रष्टाचार की कमाई का 95% जब्तीकरण मोदी सरकार में हुआ है। PMLA के तहत ED ने मात्र सम्पत्तियाँ ही जब्त नहीं की बल्कि लोगों को कानून के घेरे में लाने में भी सफलता पाई है।

ED ने 44 मामलों में 100 लोगो को अब तक PMLA के तहत दोषी करार दिलाया है। इस कार्रवाई में तेजी बीते एक वर्ष में आई है। 100 में से 36 लोग 2024-25 के शुरूआती 9 महीनों में ही दोषी करार दिए गए हैं। ED ने अपनी स्थापना के बाद से अब तक 911 लोगों को गिरफ्तार किया है।

वित्तीय मामलों से जुड़े अपराधों पर काम करने वाली एजेंसी बीते कुछ सालों में बड़े नेताओं, हवाला ऑपरेटरों और नौकरशाहों तक को शिकंजे में लेने में कामयाब रही है। एजेंसी की बीते कुछ वर्षों में कार्य क्षमता भी बढ़ी है। उसे कई नए अधिकारी और कर्मचारी मिले हैं। एजेंसी ने माँग की है कि उसके स्टाफ की क्षमता तीन गुना बढ़ाई जाए।

PMLA लागू कॉन्ग्रेस सरकार में हुआ, उपयोग किया मोदी सरकार ने

PMLA कानून अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली वाजपेयी सरकार ने बनाया था। इसे 2002 में संसद ने पास किया था। यह कानून मनी लॉन्ड्रिंग रोकने, इस पैसे से बनाई गई सम्पत्ति को वापस लेने और दोषियों को कठघरे में लाने के लिए बनाया गया था।

इस कानून के प्रावधान काफी कड़े हैं और इसके शिकंजे में आए आरोपित बच नहीं पाते। इसमें बेल मिलना भी कठिन है। इस कानून से पहले भ्रष्टाचार से अर्जित कमाई को लेकर कोई स्पष्ट कानून नहीं था। ऐसे में अलग-अलग कानूनों में लूपहोल को ढूंढ कर लोग बच जाते थे।

लेकिन इस कानून के नए के बाद ED की शक्तियां बढ़ गईं। कानून को कॉन्ग्रेस सरकार ने 2005 में लागू किया था। इसमें 2 बार कॉन्ग्रेस सरकार ने संशोधन भी किया। इस कानून के चलते कॉन्ग्रेस सरकार में कुछ कार्रवाई हुई लेकिन ख़ास कोई भ्रष्टाचार के मामलों में फर्क नहीं पड़ा।

लेकिन मोदी सरकार ने 2014 के बाद इस कानून का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल चालू किया है। इसी का परिणाम है कि 2005-14 के बीच जहाँ ₹5 हजार करोड़ की कालेधन से कमाई गई सम्पत्ति जब्त हुई थी तो वहीं मोदी सरकार में यह आँकड़ा लगभग 28 गुने बढ़ गया।

सिर्फ जब्त करने के मामले में ही नहीं बल्कि उन्हें वापस पीड़ितों को दिलाने में भी ED बड़ी सफलता पा रही है। 2024 में ही ED ₹7 हजार करोड़ की सम्पत्ति को पीड़ितों या फिर बैंकों को वापस दिया है। ऐसे में जो पैसा भ्रष्टाचार से कमाया गया है, उसकी वसूली भी हुई है।

ED ने मेहुल चौकसी, नीरव मोदी और सारदा चिट फंड जैसे घोटालों में पैसा वापस दिलाने में सफलता पाई है। इन मामलों में आम जनता और बैंकों को लंबा चूना लगाया गया था। ED की कार्रवाई के चलते अब राज्यों की पुलिस भी कई आर्थिक अपराधों में उनकी सहायता ले रही हैं।

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अर्पित त्रिपाठी
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