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वक्फ बिल दोनों सदनों में पास, 12 घंटे चर्चा के बाद राज्यसभा में पड़े 128 वोट: मुस्लिम संगठन भड़के, ओवैसी ने भी लोकसभा में तिलमिलाकर फाड़ी थी विधेयक की कॉपी

लोकसभा के बाद वक्फ संशोधन बिल गुरुवार (4 अप्रैल 2025) की रात राज्यसभा में भी पास हो गया। इस विधेयक के पक्ष में 128 सांसदों ने वोट दिया, जबकि विरोध में 95 वोट पड़े। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद इस बिल को राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद नोटिफिकेशन जारी होते ही यह बिल कानून बन जाएगा।

राज्यसभा में इस पर लगभग 12 घंटे इस पर बहस हुई थी। विधेयक पर विपक्ष की ओर से कई संशोधन पेश किए गए, जिसे सदन ने खारिज कर दिया। बता दें कि बुधवार (3 अप्रैल 2025) की रात को लोकसभा में भी लगभग 12 घंटे तक बहस के बाद इसे पारित किया गया था। लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 288 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 232 वोट पड़े थे।

अंतिम समय में ओडिशा की बीजू जनता दल (BJD) ने सरकार का समर्थन किया। इससे पहले BJD ने बिल का कड़ा विरोध किया था और इसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया था। हालाँकि, बाद में पार्टी ने अपने सांसदों को इच्छा के अनुसार पक्ष में या विपक्ष में वोट करने की अनुमति दी। पार्टी ने कोई व्हिप जारी नहीं किया था और अपनी अंतरात्मा की आवाज पर निर्णय लेने को कहा था।

दरअसल, वर्तमान में राज्यसभा सदस्यों की संख्या 236 हैं। बहुमत का आँकड़ा 119 है। वहीं, राज्यसभा में के सासंदों की कुल संख्या 98 सांसद हैं, जबकि NDA के सदस्यों की संख्या 118 है। वहीं, 6 मनोनीत सदस्य भी हैं। इस तरह NDA के पक्ष में कुल 124 संख्या है। राज्यसभा में कॉन्ग्रेस के 27 सांसद हैं। अगर इंडी गठबंधन की बात करें तो यह संख्या 88 पहुँच जाती है।

राज्यसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक-2025 पर चर्चा का जवाब देते हुए अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड एक वैधानिक निकाय है। इस कारण से इसे धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए। रिजिजू ने कहा कि मुस्लिमों की भावनाओं को देखते हुए फिर भी हमने गैर-मुस्लिमों की संख्या सीमित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियाँ वक्फ विधेयक से मुस्लिमों को डरा रही हैं।

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष के अधिकांश सदस्य सदन से नदारद रहे। वहीं, सत्ता पक्ष सदस्य मौजूद रहे। बिल को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मोर्चा संभाल रखा था। चर्चा के दौरान कई बार खड़े होकर उन्होंने हस्तक्षेप किया। कॉन्ग्रेस सांसद नासिर हुसैन को टोकते हुए उन्होंने कहा कि अब तक ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती थी, लेकिन विधेयक में ऐसा नहीं है।

मुस्लिम संगठनों के पास क्या है आगे का रास्ता

मुस्लिम संगठनों एवं सांसदों के विरोध के बीच वक्फ संशोधन विधेयक लोकसभा और राज्यसभा में पास हो गया। लोकसभा में AIMIM के मुखिया ने इस बिल को फाड़ दिया था। अब ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) इसके खिलाफ कोर्ट जा सकता है। लखनऊ ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने भी इसका संकेत दिया है।

फिरंगी महली ने कहा, “हमारे लिए कोर्ट का दरवाजा खुला है। इनमें से कई प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 के खिलाफ हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि कोर्ट से हमें इंसाफ मिलेगा।” उन्होंने कहा कि AIMPLB के साथ ही अन्य संस्थाओं ने जो सुझाव JPC के सामने रखे थे, उन्हें इस बिल में शामिल नहीं किया गया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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