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जामिया मिलिया इस्लामिया ग़रीबों को नहीं देगा 10% आरक्षण

"चूँकि हम एक अल्पसंख्यक संस्थान हैं, हमारे यहाँ EWS कोटा लागू नहीं होगा। यूजीसी ने पहले ही कहा है कि कुछ संस्थान और अल्पसंख्यक संस्थान इस नई प्रणाली के तहत नहीं आएँगे। जामिया ने ओबीसी विस्तार कोटा भी लागू नहीं किया था।"

जामिया मिलिया इस्लामिया ने अपने ‘अल्पसंख्यक दर्जे’ का हवाला देते हुए आर्थिक रूप से विपन्न (EWS) कोटे के छात्रों को 10% आरक्षण देने से इनकार कर दिया है। सोमवार (फरवरी 4, 2019) को विश्वविद्यालय के अकादमिक परिषद की बैठक में फ़ैसला लिया गया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को अपनी सीट मैट्रिक्स संबंधी आवश्यकताओं और बुनियादी सुविधाओं की जरूरतों का विवरण नहीं भेजा जाएगा।

बता दें कि 17 जनवरी को केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों को 2019-20 सत्र से ईडब्ल्यूएस कोटा लागू करने के लिए कहा था। संस्थानों को 31 जनवरी तक संभावित वित्तीय आवश्यकताओं के साथ कोर्स के अनुसार सीट मैट्रिक्स प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था। जेएनयू ने इसे 1 फरवरी को भेजा, जबकि डीयू अभी भी अपने कॉलेजों के डेटा की जाँच करने में जुटा हुआ है।

जामिया मिलिया के एक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा:

“चूँकि हम एक अल्पसंख्यक संस्थान हैं, हमारे यहाँ EWS कोटा लागू नहीं होगा। यूजीसी ने पहले ही कहा है कि कुछ संस्थान और अल्पसंख्यक संस्थान इस नई प्रणाली के तहत नहीं आएँगे। जामिया ने ओबीसी विस्तार कोटा भी लागू नहीं किया था।”

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों, उनसे सम्बद्ध कॉलेजों एवं केंद्र द्वारा वित्त पोषित डीम्ड विश्वविद्यालयों को इस आरक्षण व्यवस्था को लागू करने के लिए बजट की ज़रूरतों के बारे में पूछा था। उनसे EWS आरक्षण व्यवस्था को तुरंत लागू करने को कहा है। देश के सभी उच्च शैक्षणिक संस्थानों में 10% आरक्षण 2019-20 सत्र से ही लागू हो जाएगा।

सामान्य वर्ग के ग़रीबों को 10% आरक्षण संबंधी विधेयक को लोकसभा और राज्यसभा में भारी बहुमत से पारित किया गया था। इसके बाद इस विधेयक पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के साथ ही इसने क़ानून का रूप ले लिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे ऐतिहासिक विधेयक बताते हुए प्रशंसा की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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