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ईसाई हॉस्टल, ब्रेनवॉश, 60 बच्चे…अलवर में 15 साल से जारी था धर्मांतरण का खेल, चेन्नई में होती थी ट्रेनिंग: जोसेफ-जॉय जैसे नाम रखकर मनवाई जाती थी बात, न सुनने पर मारपीट

अलवर जिले के ईसाई मिशनरी हॉस्टल में हिंदू धर्म के बच्चों से कहा जाता था हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं। रविवार की प्रेयर ना करने पर बच्चों को मारा भी जाता था।

राजस्थान के अलवर जिले में बीते दिनों एक ईसाई मिशनरी हॉस्टल में छोटे बच्चों के धर्म परिवर्तन का चौंकाने वाला मामला सामने आया था। अब आरोपितों से पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यहाँ छोटी उम्र से ही बच्चों का ब्रेनवॉश शुरू कर दिया जाता था, ताकि वे बचपन से ही ईसाई धर्म अपना लें।

इन बच्चों से कहा जाता था कि हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं। रविवार की प्रेयर ना करने पर बच्चों को मारा भी जाता था। एमआईए थाना क्षेत्र की सैय्यद कॉलोनी में यह हॉस्टल पिछले 15 साल से चल रहा था, जिसमें करीब 60 बच्चे रखे गए थे। ये सभी बच्चे गरीब हिंदू या सिख परिवारों से थे। हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

कैसे किया जा रहा था बच्चों का ब्रेनवॉश?

बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ने के लिए भेजा जाता था ताकि उनके परिवारों को शक न हो। स्कूल से लौटने के बाद हॉस्टल में उन्हें ईसाई धर्म की किताबें पढ़ाई जाती थीं। नाम बदलकर ईसाई नाम दिए जाते थे। यहाँ 8 साल के बच्चे का नाम जोसेफ, दूसरे का योहना और किसी को जॉय बुलाया जा रहा था जबकि उनका असली नाम कुछ और है।

रोज सुबह बच्चों से ईसाई प्रार्थना करवाई जाती थी और रविवार को उनके माता-पिता को बुलाकर धर्म प्रचार किया जाता था। जो बच्चा प्रेयर नहीं करता था, उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। हॉस्टल में हिंदू धर्म की देवी-देवताओं की मूर्तियों को पानी में डूबाकर बच्चों से कहा जाता था, “हिंदू देवी-देवता तो पानी में डूब जाते हैं लेकिन क्रॉस नहीं डूबता। हिंदू भगवान नरक में भेजते हैं, जबकि ईसाई गॉड स्वर्ग में ले जाते हैं।”

किसने किया खुलासा?

इस पूरे मामले का खुलासा विश्व हिंदू परिषद (VHP) के शहर महामंत्री वीरेंद्र ने किया। उन्होंने पुलिस को जानकारी दी, जिसके बाद एमआईए थाना पुलिस ने छापेमारी कर दो आरोपितों बोध अमृत सिंह और सोहन सिंह को गिरफ्तार किया।

विहिप के वीरेंद्र ने बताया कि संस्था के हॉस्टल में सालों से ये खेल चल रहा है। पहले भी बच्चों के नाम पर उनके परिवार के सदस्यों को संस्था से जोड़ा था। इसके अलावा संस्था के कई सदस्यों ने लोगों का धर्म परिवर्तन करवाया था। 7 साल पहले भी इसी हॉस्टल से जुड़े लोगों के संपर्क में आने के बाद धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों की घर वापसी करवाई गई थी।

आरोपित बोध अमृत मूल रूप से गुजरात का रहने वाला है। अमृत ने साल 2006 में ईसाई धर्म अपनाया था। उसकी ट्रेनिंग चेन्नई में हुई थी। उसके साथ 15 ट्रेनी और थे लेकिन संस्था ने अमृत को ट्रेनर के तौर पर चुना था। ट्रेनिंग में उसे सिखाया गया कि कैसे लोगों को ईसाई धर्म में कन्वर्ट करना है। कैसे बच्चों का ब्रेनवॉश करना है। इसके बाद वह अलवर के हॉस्टल में वार्डन बनकर आया था।

जाँच अधिकारी मनोहर लाल ने बताया कि एक महीने पहले ही सीकर में धर्मांतरण गैंग को पुलिस ने पकड़ा था। वहाँ से बोध अमृत भी गिरफ्तार किया गया था। हाल में ही वह जमानत पर छूटा था। अलवर से पहले वह श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, बीकानेर में था और वहां धर्मांतरण की गतिविधियाँ कर रहा था।

पुलिस अमृत के बारे में और ज्यादा जानकारी जुटाने में लगी है। सीकर में वह सेल्वा के साथ इस काम में लगा था। सेल्वा सीकर में धर्मांतरण गैंग का मास्टरमाइंड है। वहीं दूसरा आरोपित सोहन सिंह पहले हॉस्टल निर्माण में बेलदारी करता था, बाद में उसका भी ब्रेनवॉश कर धर्म परिवर्तन करवाया गया। जिसके बाद वह भी इस काम में शामिल हो गया था।

जानिए कौन दे रहा था फंड ?

सेल्वा नाम का व्यक्ति, जो पहले सीकर में पकड़ा गया था, उसने ही अलवर में हॉस्टल शुरू करवाया था। इनका टारगेट छोटे बच्चों का ब्रेनवॉश कर उन्हें बचपन से ही ईसाई बनाना था। एमआईए थाने के जाँच अधिकारी मनोहर ने बताया कि इस हॉस्टल का संचालन चेन्नई की संस्था Friends Missionary Prayer Band (FMPB) करती है।

ये संस्था अलग-अलग राज्यों में इस तरह की प्रेयर, मीटिंग करवाती है। इसकी कई राज्यों में शाखाएँ हैं, जो हॉस्टल भी ऑपरेट करती हैं। इसके लिए चेन्नई की संस्था ही पैसे जुटाती थी। बड़ी मात्रा में इन्हें फंडिंग मिलती है। इन पैसों का इस्तेमाल गरीब लोगों को लालच देने में किया जाता है।

हॉस्टल में स्थानीय बच्चों को नहीं लिया जाता था, सिर्फ बाहर के बच्चों को लाया जाता था। हॉस्टल की दीवार 10 फीट ऊँची थी और ऊपर 2 फीट तारबंदी भी की गई थी ताकि कोई भाग न सके या बाहर से कोई अंदर न झाँके।

फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। बच्चों के बयान लिए जा रहे हैं। इसके अलावा संस्था के बैंक अकाउंट्स की भी जाँच की जा रही है। आरोपितों के पास से ट्रांजैक्शन डिटेल्स भी मिली हैं।

यह मामला सिर्फ एक हॉस्टल का नहीं, बल्कि देशभर में फैले धर्मांतरण नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। बच्चों के मासूम दिमाग को निशाना बनाकर लालच और झाँसे में लेकर उन्हें धर्म बदलने के लिए मजबूर किया जा रहा था। पुलिस अब इस पूरे मामले की गहराई से जाँच कर रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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