अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) ने BAPS संस्था और उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ चल रही जाँच को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। यह जानकारी स्वयं न्यूयॉर्क में स्थित BAPS स्वामीनारायण संस्था ने दी। संस्था ने बताया कि जाँच में BAPS या किसी भी संबंधित व्यक्ति पर कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ है। यह जाँच मई 2021 में न्यू जर्सी के रॉबिंसविल स्थित BAPS मंदिर में हुई छापेमारी के बाद शुरू हुई थी।
BAPS स्वामीनारायण संस्था पर लगाए गए थे कई आरोप
संस्था ने बताया, “संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) और न्यू जर्सी के यूनाइटेड स्टेट्स अटॉर्नी ऑफिस द्वारा BAPS और BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम के निर्माण को लेकर चल रही जाँच को बंद करने के फैसले का हम स्वागत करते हैं।”
संस्था ने आगे कहा, “यह फैसला हमारी बात को और भी मजबूती देता है जो हम शुरू से कहते आ रहे हैं कि BAPS स्वामीनारायण अक्षरधाम, जो शांति, सेवा और भक्ति का स्थान है, हजारों श्रद्धालुओं की निष्ठा, प्रेम और स्वेच्छा से की गई सेवा से बना है।”
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2021 में कुछ लोगों ने BAPS पर मुकदमा दायर किया था, जिसमें मानव तस्करी (Trafficking Victims Protection Act – TVPA), श्रम कानून (Fair Labor Standards Act – FLSA) और अन्य संबंधित आरोप लगाए गए थे। इसके चलते कोर्ट ने इस सिविल मुकदमे पर रोक (stay) लगा दी थी, क्योंकि DOJ की आपराधिक जाँच चल रही थी।
अब गुरुवार (18 सितम्बर 2025) को न्यू जर्सी की एक संघीय कोर्ट में दायर एक पत्र में, BAPS के वकीलों ने बताया कि 15 और 16 सितम्बर 2025 को DOJ ने आधिकारिक रूप से उन्हें सूचित किया कि जाँच समाप्त कर दी गई है और संस्था या उससे जुड़े लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
संस्था ने फैसले को को कहा हिंदू समुदाय की जीत
BAPS के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह पिछले चार वर्षों की अनिश्चितता का अंत है। हमने हमेशा कहा था कि हमारे ऊपर लगाए गए आरोप झूठे और बेबुनियाद थे। आज का निर्णय हमारे उस विश्वास को सही ठहराता है। हम अमेरिका और दुनिया भर में अपनी आध्यात्मिक और सेवा गतिविधियों को जारी रखेंगे।”
जाँच खत्म होने के साथ ही अब सिविल मुकदमे पर लगी कोर्ट की रोक भी हट गई है। BAPS के वकील अब वादियों के वकीलों और कोर्ट के साथ मिलकर अगले कदमों पर काम करेंगे।
CasteFiles के एक प्रवक्ता ने कहा, “यह मामला ‘झूठे जातिगत सिद्धांतों’ पर आधारित था और इसका मकसद सिर्फ BAPS ही नहीं, बल्कि पूरे हिंदू समुदाय को निशाना बनाना था। उन्होंने कहा, “इस केस का समाप्त होना हमारे समुदाय के लिए एक बड़ी जीत है, जिसने अमेरिका में जातिगत भेदभाव के झूठे आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।”
BAPS एक वैश्विक हिंदू संस्था है जो आध्यात्मिक विकास, सेवा और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए समर्पित है। अमेरिका भर में इसके अनेक मंदिर और केंद्र हैं, जहाँ यह आपदा राहत, स्वास्थ्य जागरूकता, और शिक्षा जैसी कई सामाजिक सेवाएँ प्रदान करती है।


