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कॉन्ग्रेस-AIMIM में सीक्रेट अलायंस, सीमांचल में RJD की बर्बादी के पीछे ग्रैंड ओल्ड पार्टी: वक्फ के बहाने ‘हाथ’ में दिखी ‘पतंग’ की डोर

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी देश के हर एक उस राज्य में चुनाव लड़ते हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस के सहयोगी राज्य स्तरीय दल मजबूर स्तर पर होते हैं। ओवैसी उन्हीं का वोट काटते हैं, ताकि कॉन्ग्रेस के पास सौदेबाजी की ताकत रहे।

तेलंगाना के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वक्फ (संशोधन) एक्ट 2025 के तहत UMEED पोर्टल पर संपत्तियों के रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन एक साल बढ़ाने की माँग की है। पत्र में तकनीकी मुश्किलें, पुराने रिकॉर्ड्स की उपलब्धता और पोर्टल की खामियों का जिक्र है।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक्स पर पोस्ट कर रेड्डी के कदम की सराहना की। उन्होंने लिखा, “जैसी उम्मीद थी, वक्फ संशोधन एक्ट के तहत पोर्टल पर अनिवार्य रजिस्ट्रेशन में बड़ी मुश्किलें आ रही हैं। सीएम रेवंत रेड्डी साहब को धन्यवाद, जिन्होंने नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वक्फों को दस्तावेज जमा करने के लिए एक्सटेंशन माँगा। मैंने भी एडवोकेट निजाम पाशा के जरिए सुप्रीम कोर्ट में समय बढ़ाने के लिए केस फाइल किया है।”

ओवैसी का यह पोस्ट दिखाता है कि वे इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। AIMIM मुख्य रूप से मुस्लिम हितों की राजनीति करती है और वक्फ एक्ट उनके लिए बड़ा मुद्दा है। वे दावा करते हैं कि यह एक्ट मुस्लिम संपत्तियों को कमजोर कर सकता है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी ने रेड्डी का खुला समर्थन किया, जो कॉन्ग्रेस के नेता हैं। यह उस बड़े राजनीतिक गठजोड़ की ओर इशारा करता है, जिसके बारे में हम आगे बात करेंगे।

भारत की राजनीति को अगर कोई व्यक्ति सालों से देखता आया है, तो वो जानता है कि यहाँ की हर घटना के पीछे कई परतें होती हैं। कभी ये परतें साफ-साफ दिखती हैं, तो कभी इतनी गहरी होती हैं कि आम आदमी की नजर से ओझल रह जाती हैं। आज हम इसी कड़ी में बात कर रहे हैं वक्फ संपत्तियों के उस बड़े मुद्दे की, जो इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

केंद्र सरकार ने वक्फ (संशोधन) एक्ट, 2025 के तहत वक्फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल-यूएमईईडी (UMEED) पर रजिस्टर कराना जरूरी कर दिया है। इस मुद्दे पर तेलंगाना के कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने PM मोदी से हस्तक्षेप की माँग करते हुए डेडलाइन को एक साल तक आगे बढ़ाने की माँग की है। रेवंत के पत्र पर AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने तुरंत समर्थन जताया और खुद सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने की बात कही।

दरअसल, पत्र में रेड्डी ने लिखा कि सज्जादा नशीन और मुतवल्लियों ने खुद अतिरिक्त समय माँगा। ये पत्र सिर्फ कागजी नहीं है, बल्कि कॉन्ग्रेस की मुस्लिम वोटबैंक की राजनीति का अहम पहलू है। दरअसल, तेलंगाना में मुस्लिम आबादी 12% के करीब है, जो हैदराबाद में काफी ज्यादा है। रेड्डी कॉन्ग्रेस के नेता हैं, सरकार उनकी… ऐसे में मुस्लिम वोटर्स को खुश रखना उनकी राजनीति का हिस्सा है। लेकिन यहाँ सवाल उठता है- क्या ये सिर्फ मुस्लिम समुदाय की मदद है या इसके पीछे बड़ा खेल है? क्योंकि ओवैसी ने तुरंत समर्थन किया।

कॉन्ग्रेस-AIMIM का छिपा गठजोड़, वोट कटवा की पुरानी रणनीति

ये सब सुनने में तो प्रशासनिक मामला लगता है, जिसमें पुराने रिकॉर्ड्स जुटाना, तकनीकी दिक्कतें सुलझाना, मुतवल्लियों को ट्रेनिंग देना जैसे मुद्दे हैं। लेकिन अगर गहराई से देखें, तो ये राजनीति की उस पुरानी किताब का एक नया अध्याय है, जहाँ कॉन्ग्रेस और AIMIM का छिपा गठजोड़ सालों से चलता आ रहा है। बाहर से कॉन्ग्रेस ओवैसी को बीजेपी की ‘बी-टीम’ बताती रहती है, लेकिन अंदरखाने AIMIM कई राज्यों में कॉन्ग्रेस के सहयोगियों का वोट काटकर उसे सौदेबाजी की ताकत देती है।

विश्लेषण करेंगे तो पाएँगे कि ओवैसी देश के हर एक उस राज्य में चुनाव लड़ते हैं, जहाँ कॉन्ग्रेस के सहयोगी राज्य स्तरीय दल मजबूर स्तर पर होते हैं। ओवैसी उन्हीं का वोट काटते हैं, ताकि कॉन्ग्रेस के पास सौदेबाजी की ताकत रहे।

सबसे पहले बिहार की बात करें तो पिछले विधानसभा चुनाव में AIMIM ने सीमांचल इलाके में 6 सीटें जीतीं। ये सीटें मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल थीं, जहाँ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) मजबूत था। अगर AIMIM नहीं लड़ती, तो ये वोट RJD को जाते और RJD की सीटें बढ़तीं।

नतीजा? कॉन्ग्रेस जो RJD की सहयोगी है वो सौदेबाजी में मजबूत रहती। क्योंकि अगर RJD ज्यादा मजबूत हो जाती, तो कॉन्ग्रेस को गठबंधन में कम हिस्सा मिलता। इसी तरह इस बार भी बिहार में AIMIM पूरी ताकत से लड़ रही है, जहाँ कॉन्ग्रेस कमजोर है लेकिन RJD को कमजोर रखना चाहती है। इस बार 6 सीटों का बदला 36 पर लेने की तैयारी है। यही वजह है कि ओवैसी ने बिहार में तेजस्वी यादव को सीधा निशाना बनाया, जबकि राहुल या कॉन्ग्रेस पर बहुत हल्का हाथ रखते रहे।

ऐसा ही हाल महाराष्ट्र में है। एनसीपी को नुकसान पहुँचता है। सीट भले ही किसी विपक्षी बीजेपी-शिवसेना को मिलती हो, लेकिन सहयोगियों की संख्या कम होने से कॉन्ग्रेस अपनी प्रासंगिकता बरकरार रख पाती है और बाकी जगहों पर अच्छा प्रदर्शन करके सहयोगियों को दाबे रखती है।

उत्तर प्रदेश में भी AIMIM ने जो नुकसान किया, वो कॉन्ग्रेस या बीजेपी का नहीं, सपा का हुआ। इसी तरह से राजस्थान, एमपी जैसे राज्यों में है। जिन राज्यों में कॉन्ग्रेस है ही नहीं, वहाँ AIMIM नहीं है, जैसे बंगाल में। या जहाँ कॉन्ग्रेस मजबूत है, वहाँ AIMIM नहीं है, जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, ओडिशा… इसी बात से समझ सकते हैं कि कॉन्ग्रेस और AIMIM का गठजोड़ कितना भीतर तक है।

कॉन्ग्रेस-AIMIM का गठजोड़ जटिल है। बाकी काम आम जनता को मूर्ख बनाने वाला कॉन्ग्रेस इको-सिस्टम और उनका भोंपू-तंत्र कर ही देता है। ऐसे में लोग कॉन्ग्रेस के हल्ले को सही मान लेते हैं कि ओवैसी और उनकी पार्टी बीजेपी को फायदा पहुँचाती है, जबकि अंदरखाने वो सिर्फ कॉन्ग्रेस को समर्थन देती है।

ओवैसी सदन में वो मुद्दे उठाती है, जो कॉन्ग्रेस किसी मजबूरी के चलते उठा नहीं पाती और वोटिंग के समय अक्सर ओवैसी कॉन्ग्रेसी ग्रुप में खड़े दिखते हैं। हालाँकि दिखाने के लिए वो कभी कभी राहुल को निशाने पर भी लेते हैं, लेकिन उनके निशाने पर बीजेपी-हिंदुत्ववादी राजनीति और कॉन्ग्रेस के सहयोगी ही रहते हैं।

इस मुद्दे पर मैंने कई एक्सपर्ट्स से बात की। एक पॉलिटिकल एनालिस्ट ने कहा, “AIMIM कॉन्ग्रेस के लिए सेफ्टी वॉल्व है। वे मुस्लिम गुस्से को हैंडल करते हैं, ताकि कॉन्ग्रेस सेक्युलर बनी रहे।”

इसकी पुष्टि इस बात से भी होती है कि तेलंगाना जो ओवैसी का गृह प्रदेश है, वहाँ पार्टी सिर्फ हैदराबाद में लड़ती है, लेकिन जुबली हिल्स जैसी प्रीमियम सीट वो कॉन्ग्रेस के लिए छोड़ती है और उसका खुलेआम समर्थन करती है।

कुछ दिन पहले तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने ‘‘मुस्लिम मतलब कॉन्ग्रेस, कॉन्ग्रेस मतलब मुस्लिम’ वाला बयान दिया था। अब ओवैसी ने रेवंत रेड्डी का खुला समर्थन किया है। वक्फ को लेकर रेड्डी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। एक तरफ बिहार में रेड्डी सीधे तेजस्वी को चुनौती दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस को हैदराबाद में समर्थन कर रहे हैं। ये छिपा पॉलिटिकल मोटिव नहीं तो और क्या है, जो धीरे-धीरे इस गठजोड़ को सामने ला रहा है।

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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