उत्तर प्रदेश के दादरी का बिसाहड़ा गाँव एक बार फिर चर्चा में है। ऐसा इसलिए कि योगी सरकार ने अखलाक कांड के सभी 18 आरोपितों के केस वापस लेने के लिए कोर्ट में अर्जी डाली है। इसके बाद जहाँ एक ओर आरोपित के परिवारों को एक उम्मीद की किरण जगी है कि उन्हें न्याय मिलेगा तो वहीं दूसरी ओर अखलाक के परिवार ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाए हैं। हालाँकि, 12 दिसंबर 2025 को जिला अदालत इस पर सुनवाई करेगी कि आरोपितों के सभी केस वापस होंगे या नहीं।
इस बहस के बीच ऑपइंडिया की टीम बीते दिन दिल्ली से 50 किलोमीटर दूर दादरी के बिसाहड़ा गाँव पहुँची। गाँव के प्रवेश द्वार के ऊपरी हिस्से पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा लगी है तो वहीं नीचे महाराजा मिहिर भोज के चित्र के साथ लगे बोर्ड पर लिखा है, “लक्ष्मण वंशी राजपूत सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार साठा चौरासी प्रवेश द्वार बाबा अफलातून शाहजी पावन नगरी बिसाहड़ा में आपका हार्दिक स्वागत है”।
इसके बाद हम उस जगह पहुँचे जहाँ मोहम्मद अखलाक ने गाय को काटने के बाद उसके अवशेष सड़क किनारे गोबर के ढेर पर फेंके थे। यहाँ कोई भी गाँव व्यक्ति हमसे बात करने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद हम अखलाक के घर से 50 मीटर दूर उस पशु चिकित्सक अरूण सिसौदिया के घर पहुँचे जिसने अपने अनुभव से अखलाक द्वारा फेंके गए अवशेषों को पहचाना था कि वह गोवंश के ही अवशेष हैं।

पशु चिकित्सक अरुण सिसौदिया बताते हैं कि गाँव के शिवम ने रात में सड़क किनारे अखलाक को पॉलिथिन फेंकते देखा था। इसके बाद जब मैंने पॉलिथिन को देखा तो उसमें गोवंश के अवशेष (मुँह और कान) थे, जो कि एक फ्रीजन गाय के बछड़े के थे। वह कहते हैं कि मेरा यही गुनाह था कि मैंने अपने 21 साल के अनुभव से उन अवशेषों की पहचान की जिसकी पुष्टि बाद में दो लेबों से भी हुई थी।
किसी की माँ तो किसी के पिता का हुआ देहांत
पशु चिकित्सक अरूण आगे बताते हैं कि घटना के बाद पुलिस ने गाँव में आतंक मचाया और हम जैसे बेगुनाह लोगों को राजनीति के तहत फँसाया गया। ये अखिलेश सरकार ने गलत किया था। इसके बाद मैं 23 महीने जेल रहा। सब कुछ बर्बाद हो गया। मैं पशुओं का इलाज करके हर रोज 3-4 हजार कमाता था, लेकिन जेल जाने के बाद धंधा चौपट हो गया। अब योगी जी से ही हमारी उम्मीदें हैं कि वही हमें न्याय दिला सकते हैं।
पशु चिकित्सक अरुण सिसौदिया से मुलाकात के बाद हम आगे बढ़े तो पता चला कि मामले में जिस भाजपा नेता संजय राणा के बेटे विशाल राणा को मुख्य आरोपित बनाया गया उसने भी गाँव छोड़ दिया है। घर पर ताला लगा है। खिड़की की जालियों पर जंग लगी है, कमरे की छत गिर चुकी है। साफ कहें तो गाँव में खंडहर पड़ा मकान बर्बाद होते परिवार का दर्द बयाँ कर रहा था। गाँव वालों की मानें तो इस घटना के बाद संजय राणा का राजनीतिक कैरियर ही समाप्त हो गया।
इसके बाद हमने मामले में आरोपित पुनीत शर्मा के पिता योगेन्द्र शर्मा से बात की। वह बताते हैं कि हमारा घर घटनास्थल से करीब 400 मीटर दूर है। घटना के समय बेटा छत पर सो रहा था। जैसे ही पता चला तो वह नीचे गया, लेकिन मौके पर पहुँचने से पहले ही लोगों ने उसे वहाँ जाने से रोक दिया, लेकिन इसके बाद बेटे को न सिर्फ आरोपित बनाया गया बल्कि बेटा करीब 17 महीने तक जेल में भी रहा।
बुजुर्ग योगेन्द्र शर्मा कहते हैं कि हमारे साथ अखलाक के परिवार को भी पता है कि हमारा बेटा उस घटना में शामिल नहीं था, लेकिन राजनीतिक द्वेष के चलते हमें फँसाया गया। अब योगी सरकार ने हमारी सुनी है और कोर्ट से आखिरी उम्मीद बची है।
मीडिया ने हिंदुओं को आतंकियों के रूप में दिखाया
गाँव के पूर्व प्रधान राकेश राणा बताते हैं कि सरकार आज तक कोई सबूत नहीं दे पाई कि अखलाक को किन लोगों ने मारा। सभी आरोपितों के नाम लोगों ने एक दूसरे रंजिश में लिखा दिए। सपा की सरकार ने इस घटना को हिंदू-मुस्लिम के नजरिए से देखा और हिंदुओं के सामने एक पक्ष बनकर खड़ी हो गई।
उस समय सपा सरकार की पुलिस का आतंक कुछ ऐसा था कि गाँव में सब्जी वाले सब्जी नहीं बेचने आते थे क्योंकि लोग पुलिस के डर के कारण गाँव छोड़कर चले गए थे। उस समय मीडिया वालों ने हमें आतंकियों के रूप में दिखाया जैसे कि हम मुसलमानों के ऊपर अत्याचार कर रहे हैं। जबकि गाँव के लोगों की सही भावना को मीडिया ने कभी दिखाया ही नहीं।
अखलाक का परिवार पीढ़ियों से गाँव में रहता है। इसके बावजूद आरोपितों के नाम बदले गए ये एक गहरी साजिश थी। जेल में हमारे बच्चों को यातनाएँ दी गईं। जेल में रवि की मौत उसी का परिणाम थी। राकेश राणा आगे कहते हैं कि रही बात योगी सरकार द्वारा केस वापस लेने की तो दूसरी सरकारों ने आतंकियों तक के केस वापस लिए हैं ये तो हमारे निर्दोष बच्चे हैं।
वहीं, अखलाक के घर से करीब 150 मीटर दूर रहने वाले संजीव राणा कहते हैं कि सभी आरोपितों के परिवार पटरी से उतर गए हैं। अखलाक की मौत के बाद सपा सरकार ने गाँव के 20 परिवारों को मार दिया। वह सभी जिंदा रहकर भी मृत के समान हैं। अब समय आ गया है कि राजा से राजा लड़ेगा। सपा सरकार ने मुसलमानों का पक्ष लिया था और योगी सरकार हम हिंदुओं को न्याय दिलाएगी।
पाकिस्तान जाने के बाद कट्टर हो गया था अखलाक
अखलाक के पड़ोसी व पशु चिकित्सक अरुण सिसौदिया कहते हैं अखलाक का परिवार बहुत अच्छा था। हमारे यहाँ अखलाक का भी आना जाना रहता था। यहाँ तक कि वह अपनी शादी की एलबम में अखलाक के फोटो होने की बात कहते हैं। वह आगे बताते हैं कि जब से वह पाकिस्तान गया तब से उसके व्यवहार में बदलाव आया और इसके बाद से उसके घर पर 50-50 जमाती आने लगे थे। सभी को वह भोजन भी कराता था। तभी से अखलाक और ज्यादा कट्टर होने लगा था।

अखलाक के बारे में पड़ोसी संजीव राणा कहते हैं कि अखलाक लोहार का काम करता था। एक बार तो वह किसी से संदिग्ध बात कर रहा था। इस पर वहाँ खड़े व्यक्ति को शक होने पर मोबाइल दिखाने के लिए बोला तो उसने अपना मोबाइन न दिखाकर आग की भट्टी में झोंक दिया था। अखलाक जमातियों के संपंर्क में आने के बाद से ज्यादा कट्टर हो गया था और उसका पाकिस्तान प्रेम उजागर होता जा रहा था।
हिंदुओं ने कई बार पेश की भाईचारे की मिशाल
पशु चिकित्सक अरुण सिसौदिया बताते हैं कि अखलाक के भाई मोहम्मद अफजाल की लड़की कमरजहाँ का हिंदुओं ने तलाक नहीं होने दिया था। हिंदुओं ने मिलकर उसका साथ दिया था। गाँव के पूर्व प्रधान राकेश राणा कहते हैं कि हमारे यहाँ हमेशा से भाईचारा रहा है। गाँव में मस्जिद, ईदगाह के लिए जमीन हिंदुओं ने दी थी। यहाँ तक कि उनके निर्माण में भी हिंदुओं ने सहयोग किया था।
अखलाक घटना के बाद भी गरीब मुस्लिम हकीम की दो लड़कियों का निकाह गाँव के हिंदुओं ने मिलकर के ही कराया था। प्रधान कहते हैं कि अखलाक की घटना से न पहले गाँव में कुछ ऐसा हुआ और न उसकी घटना के बाद कुछ गलत हुआ। यहाँ तक कि अखलाक के किसी भी भाई को एक खरोंच तक नहीं आई।
वहीं गाँव के संजीव राणा कहते हैं कि अखलाक के परिवार का लेन-देन और आना-जाना हमेशा हिंदुओं के बीच रहता था, लेकिन उसने जघन्य अपराध किया और उसने गाँव के भाईचारे को गहरा धब्बा लगाया।
आपको बता दें कि 28 सितंबर 2015 को दादरी विधानसभा के बिसाहड़ा गाँव निवासी अखलाक ने ईद के बाद गोवंश को काटा था। इस घटना से गुस्साई हजारों लोगों की भीड़ ने अखलाक और उसके बेटे दानिश को घर से खींचकर पिटाई की थी, जिसमें घायल अखलाक की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी। अखलाक द्वारा गाय को काटने की घटना को पहले अफवाह बताया गया था, लेकिन दो लेबों से हुई जाँच के बाद साफ हो गया था कि अखलाक द्वारा फेंका गया मांस गोवंश का ही था।


