प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार को बांग्लादेश में एक बार फिर भड़की हिंसा पर चिंता सताई है। शेख हसीना की सरकार गिरने के समय फैली हिंसा को उचित ठहराने वाले रवीश कुमार इस बार कुछ अलग अंदाज में सामने आए हैं। अपनी नई वीडियो में उन्होंने शेख हसीना की सरकार गिरने के समय हुई हिंसा में हिंदुओं पर हुए अत्याचार को झुठलाया है और मीडिया पर अनाप-शनाप खबरें चलाने का आरोप लगाया है।
दरअसल, रवीश कुमार ने हाल ही में उस्मान हादी की मौत पर बांग्लादेश में भड़की हिंसा पर 18 मिनट का वीडियो अपलोड किया है। वीडियो में वह खुद को ‘निष्पक्ष’ दिखाने की पूरी कोशिश करते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट पढ़ते-पढ़ते बीच में अपना प्रोपेगेंडा उजागर कर ही देते हैं। रवीश कुमार कहते हैं, “शेख हसीना को हटाने के समय जब हिंदुओं के साथ अत्याचारों की खबरें सामने आईं। तब गोदी मीडिया में अनाप-शनाप और झूठी खबरें चलने लगीं, जिसका बांग्लादेश में विरोध भी हुआ और वहाँ की जनता हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गई।”
यहाँ रवीश कुमार शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अगस्त 2024 से हिंदुओं पर बड़े पैमाने पर हुए हमलों को झूठी और अनाप-शनाब खबरें बता रहे हैं, जिनमें मंदिरों पर तोड़फोड़, घरों और दुकानों में आगजनी, महिलाओं के रेप और हत्याएँ शामिल रहीं। ऑपइंडिया ने इन घटनाओं की विस्तृत कवरेज की है।
रवीश कुमार को यह जानने की जरूरत है कि शेख हसीना की सरकार गिरते ही केवल 4 से 20 अगस्त 2024 के भीतर ही हिंदू अत्याचार की 2000 से अधिक घटनाएँ दर्ज हुईं। इनमें 5 हिंदू मारे गए, 157 हिंदू परिवारों के घर लूटे, 70 से अधिक हिंदू मंदिर तोड़े गए, 219 से अधिक हिंदू महिलाओं से गैंगरेप के मामले सामने आए और 78 लड़कियों का जबरन धर्मांतरण हुआ। उसी अगस्त 2024 में 4 हजार से अधिक हिंदुओं को देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
उन्हें पता होना चाहिए कि यह घटनाएँ अनाप-शनाप नहीं है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की OHCHR रिपोर्ट में भी इसे सही ठहराया गया है। रिपोर्ट में साफतौर से कहा गया है कि बांग्लादेश में शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने का जश्न मना रहे लोगों के ‘जुलूस’ के दौरान हुए। हमलावर BNP और जमात-ए-इस्लामी के कट्टरपंथी नेता थे।
इतना ही नहीं रवीश कुमार ने भारत-विरोधी उस्मान हादी को ‘उभरता छात्र नेता’ बताया है और उसे ‘उन्हें’ और ‘थे’ भाषा का प्रयोग करते हुए सम्मान दिया है। संतुलन बनाने के लिए उस्मान हादी को भारत-विरोधी बातें करने का जिक्र तो किया है, लेकिन अगले ही पल उसे सम्मानपूर्वक दर्शकों के सामने पेश किया है। यहाँ तक कि उस्मान हादी की हत्या को साजिश करार देने की भी पूरी कोशिश की, जबकि बांग्लादेश पुलिस की जाँच अब भी जारी है।
लेकिन रवीश कुमार ने इसका कहीं जिक्र नहीं किया कि इसी हादी ने पूर्वोत्तर राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा बनाने वाला नक्शा भी शेयर किया था। रवीश कुमार उस्मान हादी को ‘छात्र नेता’ बताकर अपने देश में भ्रष्टाचार और सही मुद्दों पर लड़ने वाला ‘सच्चा देशभक्त’ बताना भी नहीं भूले। वह हिंदू युवक दीपू चंद्र दास और इस्लामी कट्टरपंथी उस्मान हादी की हत्या को समान नजरिए से देख रहे हैं।
रवीश कुमार को यह समझना होगा कि दोनों हत्याएँ अलग हैं। दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या हिंदूओं पर अत्याचार का हिस्सा है, जिसमें पूरी हिंदू समाज को उदाहरण देने की कोशिश की गई है कि अगर वह बांग्लादेश में आवाज उठाएँगे तो उनका भी यही हाल किया जाएगा। जबकि उस्मान हादी की हत्या सांप्रदायिक हिंसा नहीं है, उस पर गोली चलाने वाले नकाबपोश का कोई अता-पता नहीं है। हादी के हत्यारों के भारत का हाथ होने और भारत भागने वाले दावे को भी बांग्लादेश पुलिस पहले ही खारिज कर चुकी है,।
यहाँ दिलचस्प बात यह है कि रवीश कुमार पहले मान चुके हैं कि शेख हसीना की सरकार गिरने के लिए हुए प्रदर्शनों में हिंसा फैली थी और इन प्रदर्शनकारी की पैरवी भी कर चुके हैं। लेकिन यह मानने को तैयार नहीं है कि यह हिंसा साफतौर पर हिंदू-विरोधी थी। यहाँ उन्हें मुस्लिमों को अत्याचारी और हिंदुओं को पीड़ित बताने में डर लगता है। इसमें उस्मान हादी जैसे इस्लामी कट्टरपंथ को वह ‘छात्र नेता’ का सम्मान देकर बांग्लादेश की हिंसक भीड़ का समर्थन नहीं तो और क्या कर रहे हैं?


