उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में रविवार (21 दिसंबर 2025) को पुलिस ने एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का खुलासा किया। यह मामला रोजा थाना क्षेत्र की कैलाशनगर कॉलोनी का है, जहाँ एक मकान में ईसाईयत में धर्मांतरण कराने के लिए गुप्त रूप से सभा आयोजित की जा रही थी। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मकान में करीब 200 लोग इकट्ठा हुए थे, जिन्हें पैसों और शादी का लालच देकर बुलाया गया था। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद पुलिस ने मौके पर छापा मारा। छापेमारी के दौरान वहाँ चंगाई सभा के नाम पर प्रार्थना सभा चल रही थी, जिसका उद्देश्य हिंदू धर्म के लोगों को ईसाई बनाना था।
इस पूरे मामले से जुड़ी FIR की एक कॉपी ऑपइंडिया के पास मौजूद है, जिसमें धर्मांतरण से जुड़े गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और इसके पीछे की पूरी साजिश की जाँच में जुटी हुई है।
FIR में क्या लिखा है?
इस मामले में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पदाधिकारी अशनील सिंह की शिकायत पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 131, 197, 352 और 351(3) के तहत दर्ज की है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) भी लगाई गई हैं।
इस FIR में एंजेल, विवेक, विपिन, मोनू और रमादेवी को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि ये सभी मिलकर अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराने की गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस मामले की जाँच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

अपनी शिकायत में अशनील सिंह ने बताया कि रविवार दोपहर करीब 1 बजे वह मोहम्मदी रोड से गुजर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने रोजा थाना क्षेत्र की कैलाशनगर कॉलोनी में रमादेवी के घर पर भारी भीड़ देखी। शक होने पर जब वह वहाँ पहुँचे, तो पाया कि रमादेवी के मकान में ईसाई प्रार्थना सभा चल रही थी।
शिकायत के अनुसार, वहाँ मौजूद लोग हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक बातें कर रहे थे और हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक और अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे। अशनील सिंह ने इसे धार्मिक भावनाएँ ठेस पहुँचाने वाला मामला बताया और इसकी शिकायत पुलिस से की।

शिकायत में आगे बताया गया है कि जब अशनील सिंह ने इस गतिविधि का विरोध किया, तो एंजेल, विवेक, विपिन, मोनू और रमादेवी उन पर गाली-गलौज करने लगे और आक्रामक हो गए। आरोप है कि इन लोगों ने अशनील सिंह के साथ मारपीट करने की कोशिश की और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
किसी तरह अशनील सिंह वहाँ से जान बचाकर निकलने में सफल रहे और उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस के मौके पर पहुँचते ही वहाँ मौजूद करीब 150 महिलाएँ वहाँ से भाग गईं। अशनील सिंह ने इस पूरी सभा का एक वीडियो भी पुलिस को सबूत के तौर पर सौंपा है।

जब अशनील सिंह ने सभा में मौजूद लोगों से सवाल किया, तो उन्होंने बताया कि उन्हें धर्म बदलने पर मोटी रकम देने और शादी कराने में मदद का लालच दिया गया था।
मीडिया से बातचीत में पुलिस ने बताया कि रमादेवी के घर में एक मंच बना हुआ था, जिस पर क्रॉस और ईसाईयत से जुड़ी अन्य सामग्री रखी हुई थी। इस मामले में अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपित रमादेवी मौके से फरार हो गई। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।
पुलिस इस पूरे मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जाँच कर रही है और फंडिंग के स्रोतों की भी पड़ताल की जा रही है। इसमें विदेशी फंडिंग की आशंका भी जताई गई है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले जुलाई महीने में भी शाहजहांपुर में इसी तरह का एक नेटवर्क पकड़ा गया था, जिसमें कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी।
उस मामले में करीब 4 करोड़ रुपए की फंडिंग सामने आई थी, जिसमें विदेश से आने वाला पैसा भी शामिल था। पुलिस के अनुसार, उस केस में मुख्य आरोपित को रोजाना लगभग 48 हजार रुपए (अमेरिकी डॉलर में) की विदेशी फंडिंग मिल रही थी।
शाहजहांपुर में 5 FIR, 4 करोड़ की विदेशी फंडिंग, तमिलनाडु से जुड़े ईसाई धर्मांतरण रैकेट का भंडाफोड़
शाहजहांपुर के सिंधौली क्षेत्र में 13 जुलाई को इसी तरह का एक और मामला सामने आया था। संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने पर हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने एक गुरुद्वारे के पास एक मकान पर छापा मारा। वहाँ पहुँचने पर पता चला कि उस जगह पर धर्म परिवर्तन कराने की गतिविधियाँ चल रही थीं।
हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं के पहुँचते ही कई लोग मौके से फरार हो गए, लेकिन छह लोगों को पकड़ लिया गया, जिन्हें बाद में पुलिस के हवाले कर दिया गया। इस मामले की पुष्टि करते हुए तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) राजेश द्विवेदी ने बताया कि हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ की गई और उनके बैंक खातों की जाँच की गई, ताकि पैसों के लेन-देन और संभावित विदेशी फंडिंग का पता लगाया जा सके।
पुलिस की शुरुआती जाँच में सामने आया कि लोगों को धार्मिक आधार पर संगठित किया जा रहा था और लालच देकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। इसके बाद मामले की गहराई से जाँच शुरू की गई।
13 जुलाई का यह मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। इसके बाद जुड़े मामलों में अगले कुछ दिनों के भीतर कम से कम पाँच FIR दर्ज की गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे रैकेट के मुख्य आरोपित को करीब 4 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली थी और यह धर्मांतरण नेटवर्क तमिलनाडु से चलाया जा रहा था।
ऑपइंडिया ने इस मामले से जुड़ी तीन FIR और कोर्ट के दस्तावेज हासिल किए थे और उस समय हिंदू युवा वाहिनी के जिला संयोजक ठाकुर राघवेंद्र सिंह से बातचीत भी की थी।
केस कैसे सामने आया – FIRs की पड़ताल
इस पूरे मामले की शुरुआत 13 जुलाई 2025 को सिंधौली थाना क्षेत्र में दर्ज पहली FIR से हुई थी। यह FIR राघवेंद्र सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई थी। पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत मामला दर्ज किया।
अपनी शिकायत में राघवेंद्र सिंह ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि सिंधौली गुरुद्वारे के सामने, पूर्व दिशा की ओर स्थित एक मकान में ईसाई मिशनरियों द्वारा धर्म परिवर्तन की गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की, जिसके बाद पूरे धर्मांतरण नेटवर्क का खुलासा होना शुरू हुआ।

मिली सूचना के आधार पर राघवेंद्र सिंह तुरंत हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुँचे और इसकी जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुँची और उस मकान के अंदर से धर्म परिवर्तन कराने या उसमें सहयोग करने वाले कई लोगों को पकड़ लिया।
इस मामले में दर्ज FIR में प्रह्लाद सिंह, मुकेश बाल्मीकि, गुरदास बाल्मीकि, अंशनीत कुमार राठौर, किरण, अंशी देवी, सना, बिमला देवी, आरती, राजवती सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस सभी आरोपियों की भूमिका की जाँच कर रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

राघवेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित अंशनीत के पास से बरामद बैग में एक बाइबिल, ईसाईयत से जुड़ी अन्य सामग्री, आधार कार्ड और कुछ फोटो मिले थे। मौके से कई अन्य सहयोगी आरोपित भागने में सफल हो गए।
हालाँकि इस FIR में पद्मनमन का नाम सीधे तौर पर आरोपी के रूप में दर्ज नहीं है, लेकिन वह आरोपित किरण का पति और अंशी देवी का पिता है। पुलिस ने पद्मनमन को गिरफ्तार किया, क्योंकि जाँच में सामने आया कि वह तमिलनाडु स्थित ईसाई मिशनरी संगठनों से फंडिंग प्राप्त कर रहा था।
FIR दर्ज होने के बाद इस मामले में जमानत से जुड़ा एक आदेश भी सामने आया है, जिसमें पद्मनमन की भूमिका और धर्मांतरण से जुड़ी फंडिंग का पूरा विवरण विस्तार से बताया गया है।

दूसरी FIR
इस क्रम की दूसरी FIR 27 जुलाई को खुटार थाना क्षेत्र में दर्ज की गई। यह FIR हिंदू युवा वाहिनी के सदस्य अवनीश मिश्रा की शिकायत पर दर्ज हुई थी। पुलिस ने यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352 और 351(3) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत दर्ज किया। इस FIR में हरिश्चंद्र जाटव और उसके बेटे शैलेश को आरोपित बनाया गया है।

अपनी शिकायत में अवनीश मिश्रा ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि कुंबिया माफी गाँव के एक मकान में धर्म परिवर्तन की गतिविधियाँ चल रही हैं। जानकारी के अनुसार, वहाँ हिंदू महिलाओं और पुरुषों को पैसों का लालच देकर ईसाईयत अपनाने के लिए उकसाया जा रहा था।
सूचना मिलते ही अवनीश मिश्रा अपने संगठन के अन्य सदस्यों के साथ मौके पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि हरिश्चंद्र अपने घर पर प्रार्थना सभा आयोजित कर रहा था। इस सभा में करीब 30 से 40 हिंदू महिलाएँ और पुरुष मौजूद थे। आरोप है कि इन लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाईयत अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

जब अवनीश और उनके साथियों ने इसका विरोध किया, तो आरोपी उन्हें गाली देने लगे और जान से मारने की धमकी दी। अवनीश ने बताया कि आरोपी खुद कह रहे थे कि उन्हें धर्मांतरण कराने के लिए विदेशी फंडिंग मिल रही है और उन्होंने पहले ही कई सैकड़ों हिंदू लोगों को धर्मांतरित कर दिया है। स्थानीय निवासी ने भी अवनीश को बताया कि उसे ईसाईयत अपनाने के लिए 50,000 रुपये की पेशकश की गई थी।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से बाइबिल, ईसाई प्रार्थना सामग्री और ईसाईयत से जुड़ी अन्य किताबें और साहित्य बरामद किया। मामले की जाँच शुरू कर दी गई है, जिसमें आरोपित से जुड़े संभावित बाहरी या विदेशी फंडिंग की भी छानबीन की जा रही है।
तीसरी FIR
इस मामले की तीसरी FIR भी 27 जुलाई को दर्ज की गई। यह FIR राघवेंद्र सिंह की शिकायत पर दर्ज की गई थी। पुलिस ने यह FIR भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 131 और 351(3) और उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत दर्ज की। इस FIR में हेमराज पासी, ओम पाल, लौंगश्री, लाडली और 20 से 25 अज्ञात व्यक्तियों को आरोपित बनाया गया है।

राघवेंद्र सिंह के अनुसार, उन्हें चेना रुरिया क्षेत्र में धर्म परिवर्तन की गतिविधियों के बारे में सूचना मिली थी। सूचना मिलने के बाद वह अपने संगठन के अन्य सदस्यों के साथ मौके पर पहुँचे। वहाँ उन्होंने देखा कि हेमराज, ओम पाल, लौंगश्री, लाडली और अन्य लोग हिंदू लोगों को लालच और दबाव देकर ईसाईयत में परिवर्तित कर रहे थे।

जब राघवेंद्र और उनके साथियों ने इसका विरोध किया, तो आरोपित लकड़ी से हमला करने लगे और हिंदू युवा वाहिनी के कई सदस्यों को घायल कर दिया। आरोपित यह भी दावा कर रहे थे कि उन्हें 2 लाख से 3 लाख रुपए मिल रहे हैं और भविष्य में और अधिक कमाने का वादा किया गया है।
उन्होंने उन ग्रामीणों को धमकी दी जो हिंदू युवा वाहिनी के सदस्यों के साथ थे, कि उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाया जाएगा। आरोपित खुलेआम कह रहे थे कि उनका पुलिस के साथ सेटिंग है और कोई उन्हें कुछ नहीं कर सकता। इन सभी आरोपों के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की और नामजद और अज्ञात सभी आरोपित के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।

राघवेंद्र ने ऑपइंडिया को क्या बताया
ऑपइंडिया से बातचीत में राघवेंद्र सिंह ने बताया कि सिंधौली में हो रहे धर्मांतरण के मामले हाल ही के नहीं हैं, बल्कि यह लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह कोई अचानक शुरू हुआ मामला नहीं है। यह लगभग एक साल से चल रहा है और कुछ मामलों में तो चार से छह साल से भी अधिक समय से चल रहा है।”
राघवेंद्र के अनुसार, शुरुआत में आरोपित किराए के स्थानों पर बैठकें आयोजित करते थे। लेकिन बाद में उन्होंने जमीन खरीदकर खास तौर पर इस उद्देश्य के लिए मकान बना लिया। उन्होंने कहा, “लोगों को बताया जाता था कि यह एक सत्संग है। गरीब और कम पढ़े-लिखे मजदूर परिवारों, खासकर महिलाओं को जानबूझकर चुना जाता था क्योंकि उन पर आसानी से असर किया जा सकता था।”
उन्होंने आगे बताया कि इन बैठकों में महिलाओं को जुटाने के लिए उन्हें पैसे का लालच दिया जाता था। राघवेंद्र ने कहा, “महिलाओं को बैठकों में आने के लिए 500 रुपए दिए जाते थे और जो अन्य महिलाओं को लाती थीं उन्हें भी 500 रुपए मिलते थे।” इसके अलावा, इन बैठकों में महिलाओं से कहा जाता था कि यीशु मसीह की पूजा करने से उन्हें संतान की प्रापति होगी। उन्होंने बताया, “जब बच्चा पैदा होता था, तो इसे उस विश्वास का प्रमाण बताया जाता था।”
‘एंटरटेनमेंट क्लासेस’ का चौंकाने वाला आरोप
राघवेंद्र सिंह ने इस क्षेत्र में धर्मांतरण नेटवर्क के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि युवाओं को मनोरंजन क्लास या एंटरटेनमेंट क्लास में बुलाया जाता था, जहाँ उन्हें डांस और इसी तरह की गतिविधियों में भाग लेने के लिए कहा जाता था, ताकि धीरे-धीरे उनका मानसिक दृष्टिकोण बदल सके। उन्होंने कहा, “जो जानकारी हमें शुरू में मिली थी, वह इन एंटरटेनमेंट क्लास के बारे में थी।” ये क्लासें धर्मांतरण प्रक्रिया का हिस्सा थीं।
राघवेंद्र ने बताया कि ये सत्र प्रार्थना सभाओं से अलग आयोजित किए जाते थे और केवल युवा प्रतिभागियों के लिए होते थे। लड़कों और लड़कियों को नृत्य करने के लिए कहा जाता था और उन्हें यह बताया जाता था कि वे कपड़े या शिष्टाचार की चिंता किए बिना स्वतंत्र रूप से डांस करें।
उनके अनुसार, प्रतिभागियों को अपनी रोक-टोक छोड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाता था, जिससे भावनात्मक और नैतिक रूप से वे कमजोर हो जाते थे। राघवेंद्र ने कहा, “एक बार जब वह अवस्था पहुँच जाती थी, तो उन्हें बताया जाता था कि वे जो चाहें वह करें। यह पूरी तरह गलत और अस्वीकार्य था।”
उन्होंने बताया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य धीरे-धीरे उपस्थित लोगों को प्रभावित करना और उन्हें नियंत्रित करना था। हालाँकि, जब पुलिस ने उस स्थान पर छापा मारा, तो इस तरह की गतिविधियाँ उस समय नहीं चल रही थीं और न ही इनका जिक्र FIR या कोर्ट के दस्तावेजों में था। ऑपइंडिया यह स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं कर पाया कि इन गतिविधियों का आयोजन उन लोगों की गिरफ्तारी से पहले हो रहा था या नहीं।
करोड़ों की फंडिंग का खुलासा
राघवेंद्र सिंह ने आगे बताया कि गिरफ्तार व्यक्तियों के बैंक खातों की जाँच में लगभग 4.25 करोड़ रुपए के लेन-देन का पता चला। उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे हम गहराई में गए, यह सामने आया कि ऐसे गतिविधियाँ जिले के लगभग 200 स्थानों पर हो रही थीं।” उन्होंने यह भी बताया कि मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है, लेकिन “ऐसी गतिविधियों की जानकारी समय-समय पर लगातार सामने आती रहती है।”
राघवेंद्र ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने अवैध धर्मांतरण के खिलाफ प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से मजबूत रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “यह केवल महाराज योगी आदित्यनाथ जी की वजह से संभव हुआ। उनका स्पष्ट रुख जमीनी स्तर पर कार्रवाई को मजबूत बनाता है।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले ऐसे मामलों को नजरअंदाज किया जाता था, लेकिन अब जाँच एजेंसियाँ इन्हें गंभीरता से ले रही हैं।
हाल ही की न्यायिक टिप्पणियों का जिक्र करते हुए राघवेंद्र ने बताया कि उच्च न्यायालय ने राज्य में धर्मांतरण के मुद्दे पर भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा, “हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई धर्मांतरण करता है, तो उसे आरक्षण या सरकारी सुविधाओं का हक नहीं होना चाहिए। उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जानी चाहिए।”
राघवेंद्र के अनुसार, इन घटनाओं और न्यायिक रुख की वजह से लोग आगे आकर जानकारी देने और ऐसी गतिविधियों का विरोध करने के लिए प्रेरित हुए हैं। उन्होंने कहा, “संदेश अब स्पष्ट है। सनातन धर्म की रक्षा प्राथमिकता है और जहाँ भी उल्लंघन पाया जाएगा, कार्रवाई की जाएगी।”
कोर्ट ने पद्मनाभन उर्फ पादरी जोशुआ को जमानत देने से इनकार कर दिया
ऑपइंडिया को एक जमानत आदेश भी मिला, जिसमें शाहजहांपुर जिला और सत्र न्यायालय ने पद्मनमन उर्फ पास्टर जोशुआ को जमानत देने से इनकार किया। यह जमानत 11 अगस्त 2025 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश आशिष वर्मा, शाहजहांपुर की कोर्ट ने खारिज की।
कोर्ट ने नोट किया कि जमानत अर्जी पद्मनमन उर्फ पद्मनवन उर्फ पास्टर जोशुआ और उनकी पत्नी किरण जोशुआ ने दाखिल की थी, जो इस मामले में जिला जेल में बंद हैं। आदेश में दर्ज अभियोजन मामले के अनुसार, यह मामला सीधे 13 जुलाई 2025 को हिंदू युवा वाहिनी जिला अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह की शिकायत पर दर्ज पहली FIR से शुरु हुआ है।
FIR में बताया गया था कि सिंधौली गुरुद्वारे के सामने स्थित एक मकान में ईसाई मिशनरियों द्वारा पैसों का लालच देकर धर्मांतरण कराया जा रहा था। इसके बाद पद्मनमन, उनकी पत्नी किरण और कई अन्य लोगों को मौके से गिरफ्तार किया गया था।
जमानत आदेश में दर्ज है कि छापेमारी के दौरान पद्मनमन और उनकी पत्नी किरण के पास से एक बैग बरामद हुआ, जिसमें बाइबिल, अन्य ईसाईयत से जुड़ी सामग्री, आधार कार्ड और कुछ फोटो थे।
कोर्ट ने केस डायरी पर भी भरोसा किया, जिसमें बताया गया कि तमिलनाडु निवासी पद्मनमन ने धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों के लिए काफी फंडिंग प्राप्त की थी। बैंक रिकॉर्ड से पता चला कि पद्मनमन के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में कुल ₹25,75,642.99 जमा हुए, जो जीजस रिडीम्स मिशनरी, मिशनरी यूपी होल्डर ट्रस्ट और द पॉकेट टेस्टामेंट लीग जैसी संस्थाओं से आए। आदेश में कई हाई-वैल्यू लेन-देन का भी जिक्र है, जिसमें मुंबई स्थित डिजिटल खातों से UPI ट्रांसफर भी शामिल हैं।

इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पद्मनमन की पत्नी किरण जोशुआ के बैंक खाते में भी इन मिशनरी संस्थाओं से ₹4,76,029 जमा हुए थे। आदेश में यह भी दर्ज है कि किरण मूल रूप से एक हिंदू महिला थीं और पद्मनमन से संपर्क में आने के बाद उन्होंने ईसाईयत अपनाया। यह तथ्य केस डायरी और सहायक दस्तावेजों में भी दर्ज है।
आदेश में उद्धृत स्वतंत्र गवाहों के बयानों के अनुसार, पद्मनमन, किरण और अन्य आरोपित अंशनीत कुमार राठौर सप्ताहिक प्रार्थना सभाओं का आयोजन हिंदू बहुलता वाले क्षेत्रों में कर रहे थे, जिसका उद्देश्य गरीब और कमजोर ग्रामीणों को लालच देकर धर्मांतरित करना था।
आरोपों की गंभीरता, वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड और कथित गतिविधियों के सामाजिक प्रभाव को देखते हुए अदालत ने यह माना कि अपराध गंभीर प्रकृति का है। मामले की सार्थकता पर जाए बिना, कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि आरोपितों को जमानत देने के पर्याप्त आधार नहीं हैं और इसलिए पद्मनमन उर्फ पास्टर जोशुआ और किरण जोशुआ की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।
किन संगठनों से फंडिंग मिली?
शाहजहांपुर के धर्मांतरण मामलों में फंडिंग ट्रेल में एक संगठन का नाम सामने आया है, जो है जीजस रिडीम्स मिनिस्ट्रीज। यह एक ईसाई प्रचारक संगठन है, जिसका नेतृत्व तमिलनाडु स्थित प्रचारक मोहन सी लाजरस करते हैं।
संगठन की अपनी साहित्यिक सामग्री में दावा किया गया है कि लाजरस ने ईसाईयत अपनाने के बाद चमत्कारिक रूप से स्वस्थ होने का अनुभव किया। यह कथा संगठन के प्रचार और अभियान की विचारधारा की नींव बनाती है।
संगठन की सामग्री बार-बार बीमारी, कष्ट, इलाज और मुक्ति जैसे विषयों को प्रमुखता से प्रस्तुत करती है, जो कई धर्मांतरण मामलों में कमजोर और संवेदनशील लोगों को भावनात्मक रूप से प्रभावित करने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं।
संगठन का दावा है कि वह बड़े पैमाने पर प्रार्थना अभियान, उपवास प्रार्थनाएँ, रातभर प्रार्थना सत्र और तथाकथित मुक्ति महोत्सव आयोजित करता है और ईसाईयत का प्रचार पत्रिकाओं, टीवी प्रसारण, ईमेल और अन्य आयोजनों के माध्यम से करता है।
संगठन खासकर बच्चों, किशोरों, युवाओं और महिलाओं को अपने प्रचार के लक्षित समूह के रूप में चुनता है। बच्चों को धर्मांतरण केंद्रित अभियानों में शामिल करना उनकी सहमति, संवेदनशीलता और नैतिक सीमाओं पर गंभीर सवाल उठाता है, खासकर ऐसे देश में जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता कानून स्पष्ट रूप से लालच, दबाव या अल्पसंख्यकों का शोषण करके धर्मांतरण को निषिद्ध करता है।
शाहजहांपुर मामले में पुलिस रिकॉर्ड और कोर्ट के दस्तावेज दिखाते हैं कि जीजस रिडीम्स मिनिस्ट्रीज से जुड़े फंड उन लोगों के बैंक खातों में आए, जो अवैध धर्मांतरण में शामिल थे।
संगठन का दावा है कि वह पूरे भारत में वर्ल्ड रिवाइवल प्रेयर सेंटर का एक व्यापक नेटवर्क चलता है। इसका नेटवर्क आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, झारखंड, पंजाब, पुडुचेरी, दिल्ली और तमिलनाडु तक फैला हुआ है।
इसके केंद्र चित्तूर और तिरुपति, सिकंदराबाद, बेंगलुरु के कई स्थान, हासन, मैसूरु, तुमकुर, KGF, कोट्टायम, तिरुवनंतपुरम, मुंबई के धारावी और मलाड, रांची, चंडीगढ़, पुडुचेरी और नई दिल्ली जैसी जगहों में हैं।
केवल तमिलनाडु में ही संगठन के कम से कम दस केंद्र हैं, जिनमें आदम्बक्कम, अंबत्तूर, चेंगलपट्टू, कांचीपुरम, एग्मोर, पुरासावल्कम, रॉयपुरम, शांति निलयम, ताम्बरम और तिरुवल्लूर शामिल हैं।
मिशन अपहोल्डर्स ट्रस्ट
शाहजहांपुर के धर्मांतरण मामलों की जाँच के दौरान एक और संगठन सामने आया है, जो है मिशन अपहोल्डर्स ट्रस्ट। यह तमिलनाडु स्थित संगठन वेलोर में मुख्यालय रखता है। ट्रस्ट खुद को मिशनरियों और पादरियों का समर्थन करने वाला संगठन बताता है और अपने मिशन बयान में कहता है कि यह मिशनरी समुदाय की जरूरतों को पूरा करने का काम करता है।
इनमें स्वास्थ्य देखभाल, परेशान और संकट की देखभाल, भावनात्मक और नए अध्यात्म से जुड़ना,आराम, तथा मिशनरियों के बच्चों और सेवानिवृत्त मिशनरियों के सामाजिक और आध्यात्मिक सुदृढ़ीकरण शामिल हैं।
अपने उद्देश्यों के अनुसार, मिशन अपहोल्डर्स ट्रस्ट का लक्ष्य है कि मिशनरियों को सुसज्जित, सक्रिय और प्रोत्साहित किया जाए ताकि वे हमेशा समाज में नमक और प्रकाश की तरह काम कर सकें।
हालाँकि भाषा कल्याणकारी दिखाई देती है, लेकिन जब ऐसे संगठन अवैध धर्मांतरण मामलों के वित्तीय ट्रेल में सामने आते हैं, तो यह सवाल उठता है कि इसका उद्देश्य केवल मिशनरी गतिविधियों को बढ़ावा देना और उन्हें मजबूत करना है। ट्रस्ट का ध्यान आम जन कल्याण पर नहीं है, बल्कि मिशनरियों को उनके धार्मिक प्रचार को जारी रखने और गहराई तक पहुँचाने में सक्षम बनाना है।
आधिकारिक रिकॉर्ड दिखाते हैं कि मिशन अपहोल्डर्स ट्रस्ट FCRA पंजीकृत है, जिससे यह कानूनी रूप से विदेशी योगदान प्राप्त कर सकता है। वित्तीय विवरणों के अनुसार, ट्रस्ट ने वित्तीय वर्ष 2023–24 में ₹49,52,936 और 2022–23 में ₹56,53,856.76 की विदेशी फंडिंग प्राप्त की।
कुल मिलाकर, गिरफ्तारियाँ, कई FIR, कोर्ट के फैसले और वित्तीय ट्रेल यह दर्शाते हैं कि यह केवल एक धर्मांतरण का मामला नहीं है, बल्कि एक गहन और संगठित ऑपरेशन है।
शाहजहांपुर के मामलों से यह पैटर्न सामने आता है कि इसमें लालच, बार-बार आयोजित सभा, विभिन्न थाना क्षेत्रों में समन्वित गतिविधियाँ और तमिलनाडु स्थित मिशनरी संगठनों से विदेशी फंडिंग के जरिए पैसा शामिल है।
जिले में धर्मांतरण नेटवर्क में शामिल मिशनरियों के खिलाफ अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई की जा रही है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण गंभीर चिंता का विषय हैं और इसके जाँच की आवश्यकता है।
(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में अनुराग ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)


