ब्राह्मण हितैषी होने की छवि गढ़ने की कोशिश कर रहे समाजवादी पार्टी के मुखिया और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का असली चरित्र समय-समय पर सामने आता रहा है। इस कथित ब्राह्मण प्रेम का इतिहास खूनी रहा है। कन्नौज के नीरज मिश्रा का नाम शायद बहुत से लोग नहीं जानते हों लेकिन नीरज वो शख्स थे जिन्होंने कभी अखिलेश यादव से टक्कर ली और 24 घंटों के भीतर उनकी सिर कटी लाश मिली थी। नीरज के भाई मुनीष मिश्रा ने ऑपइंडिया से बातचीत में अपने भाई की हत्या का सीधा आरोप अखिलेश यादव पर लगाया है।
आज तक नहीं मिला नीरज का कटा हुआ सिर
मामले की शुरुआत 5 मई 2004 से होती है, जब उत्तर प्रदेश के कन्नौज लोकसभा क्षेत्र में आम चुनाव के लिए मतदान हो रहा था। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से उम्मीदवार थे तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव जबकि उनके मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामानंद यादव मैदान में थे। ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई कर लौटे अखिलेश यादव के लिए यह पहला लोकसभा चुनाव था।
मतदान के दौरान कन्नौज के छिबरामऊ क्षेत्र के कसावां गाँव में स्थित बाबा हरिपुरी इंटर कॉलेज के बूथ पर स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। बूथ लूटने को लेकर भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस शुरू हुई जो जल्द ही हिंसा में बदल गई। इसी दौरान भाजपा के बूथ प्रमुख नीरज मिश्रा अचानक लापता हो गए।
अगले दिन यानी 6 मई 2004 को नीरज मिश्रा का धड़ ईशन नदी से बरामद किया गया जबकि उनका सिर कभी नहीं मिल सका। नीरज मिश्रा कसावां गाँव के ही निवासी थे और मतदान के दिन उसी बूथ पर तैनात थे, जहाँ विवाद हुआ था। इस हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई चली। बाद में अदालत ने दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई लेकिन समय के साथ सभी आरोपी जमानत पर रिहा हो गए।
नीरज मिश्रा के परिजनों का आरोप था कि तत्कालीन सांसद से जुड़े लोग बूथ पर कब्जा करने के इरादे से वहाँ पहुँचे थे। जब नीरज मिश्रा ने पोलिंग बूथ पर कब्जा करने का विरोध किया, तो दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान नीरज ने एक नेता को धक्का दे दिया जिसके बाद उनके साथ मौजूद लोगों ने नीरज मिश्रा को जबरन उठा लिया। अगले दिन उनकी बिना सिर की लाश मिली।
अखिलेश यादव ने कराई मनीष की हत्या: ऑपइंडिया से बोले मुनीष मिश्रा
मुनीष मिश्रा ने अपनी भाई की भयावह हत्या को लेकर ऑपइंडिया के अर्पित त्रिपाठी से बातचीत की है। मुनीष ने बातचीत में ही कहा, “अखिलेश ने भाई का सर कटवा दिया था।” मुनीष बताते हैं “कसावा गाँव में बूथ था और नीरज मिश्रा भाजपा के बूथ एजेंट थे। पहले वहाँ आसपास के यादव गाँवों के लोग भी वोट डालने आते थे लेकिन अब वो बूथ हटा दिया गया है।”
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर मुनीष मिश्रा ने विस्तार से बताया, “अखिलेश जी ने बटेला, जाफराबाद आसपास की पोलिंग लूटते हुए कसावा में 25-30 गाड़ियों के काफिले से साथ एंट्री ली। एक पीठासीन अधिकारी से बदतमीजी की गई जिस पर उन्होंने रिएक्ट कर दिया। (अखिलेश यादव ने) रुतबे में एक आदमी को हाथ मार दिया। मेरे भाई ने उसका विरोध किया और उनकी अखिलेश यादव से धक्का मुक्की हो गई।”
‘जिंदा या मुर्दा- नीरज मिश्रा मुझे चाहिए’
मुनीष ने आगे कहा, “धक्का-मुक्की ज्यादा हुई तो युवराज को ये नागवार गुजरा कि किसी ने मेरे हाथ क्यों लगा दिया। पुलिस बल, सीईओ, उमाशंकर यादव इंस्पेक्टर इनके साथ चल रहा था। यह इतना बौखला गया कि अखिलेश यादव ने वहीं से अपने पिताजी को फोन किया और चिल्ला कर कहा कि नीरज मिश्रा मुझे जिंदा या मुर्दा चाहिए।”
भाई की हत्या को लेकर मुनीष बताते हैं, “शाम को जैसे ही पोलिंग खत्म हुई तो इन्होंने (सपा कार्यकर्ताओं) तांडव शुरू किया। हमारा खेती-बाड़ी देखने वाले एक बसपा कार्यकर्ता के घर तोड़-फोड़ कर दी। उसकी माताजी मौके पर थी, महिलाओं के सामने अभद्रता की। इन कार्यकर्ताओं ने उनकी योनि में पंखे की डंडी डाल दी।” उन्होंने कहा, “इसके बाद फायरिंग में एक सपा कार्यकर्ता मारा गया। जिसमें नीरज का कहीं कोई इन्वॉल्वमेंट नहीं था।”
सपा कार्यकर्ताओं ने नीरज की बेरहमी से क्रूरतम हत्या कर दी: मुनीष
मुनीष ने आगे कहा, “इसके बाद फिर इन्होंने हमारे घर पर चढ़ाई की। नीरज ट्यूबवेल की तरफ निकल गया। वो अकेला था, निहत्था था और सिपाही ने उसकी घेराबंदी कर दी। नीरज मिश्रा को पुलिसवालों ने पकड़ा और बाद में सपा के कार्यकर्ताओं को दे दिया। फिर वो अपने गाँव की तरफ मारते-पीटते, बाद में घसीटते हुए ले गए। और बेरहमी से सपा के कार्यकर्ताओं ने क्रूरतम, निर्मम तरीके से उसकी मारते-मारते हत्या कर दी।”
मुनीष ने अपनी बातचीत में हत्या करने वालों में मुख्य तौर पर अशोक यादव, अवनीश यादव, राम शरण उर्फ मुन्नू सिंह, पप्पू सिंह, सुनील यादव और राम विलास यादव का नाम लिया। उन्होंने कहा, “ये अखिलेश के बिल्कुल राइट आर्म थे। अखिलेश से फोन से बात हो रही थी। आसपास लोगों की हिम्मत नहीं पड़ी किसी की भी उनसे बोलने की। क्योंकि पूरे जनपद की फोर्स चल रही थी। मारने के बाद सीओ ने इंस्पेक्टर से कहा कि इसको अब तुम लाश गायब कर दो और फिर हम देख लेंगे।”
मुनीष ने आगे कहा, “इन लोगों ने उसका सिर काट दिया और अखिलेश को खुश करने के लिए सिर को अपने पास रख लिया। सिर कटे शव को नदी में डाल दिया। जब शव मिला तो सपा के कार्यकर्ता लाश छीनने के लिए आगे बढ़े क्योंकि ये लाश गायब करना चाहते थे ताकि केस खत्म हो जाए। सिर आज तक नहीं मिला वो ब्रीफकेस में रख के अखिलेश यादव के पास लखनऊ भेजा गया था। 10 साल तक केस लड़ते रहे और 2014 में अशोक, अवनीश और मुन्नू, पप्पू-विलास को आजीवन कारावास हुआ।”
कोर्ट केस लड़ते वक्त भी मुनीष को धमकियाँ मिलती रहीं, उन्हें झूठे मुकदमे तक में फँसाया गया। मुनीष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालने के बाद उन्हें बुलाया और सुरक्षा के लिए उन्होंने गनर दिया है।


