धर्मस्थला में बड़ी संख्या में शव दफन होने के नाम पर एक हिंदू धार्मिक संस्था को बदनाम करने के लिए मीडिया कैंपने चलाने के बाद धन्या राजेंद्रन का ‘द न्यूज मिनट’ अब एक नए विवाद के केंद्र में आ गया है। इस बार आरोप है कि पोर्टल ने किसी व्यक्ति की निजी पीड़ा को भुनाकर उससे व्यावसायिक और नैरेटिव लाभ लेने की कोशिश की है।
हाल ही में प्रकाशित एक तथाकथित ‘एक्सक्लूसिव’ रिपोर्ट में ‘द न्यूज मिनट’ पर जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू के खिलाफ टारगेटेड मीडिया अटैक करने का आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट में उनके तलाक मामले से जुड़े कैलिफोर्निया की अदालत के आदेश को कथित तौर पर तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
इस लेख में ‘द न्यूज मिनट’ ने श्रीधर वेम्बू के तलाक मामले से जुड़े एक साल पुराने अदालती आदेश का सहारा लेते हुए उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। लेख में दावा किया गया कि स्वयं को आदर्श व्यक्तित्व और ‘सादा जीवन, उच्च विचार’ का प्रतीक बताने वाली वेम्बू की छवि, कैलिफोर्निया के अलामेडा काउंटी स्थित सुपीरियर कोर्ट की प्रारंभिक टिप्पणियों से मेल नहीं खाती।
रिपोर्ट के अनुसार, तलाक मामले की सुनवाई कर रही अदालत ने वेम्बू को 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही अदालत ने अमेरिका में स्थित जोहो से जुड़ी कई संस्थाओं और वेम्बू की व्यक्तिगत संपत्तियों पर एक रिसीवर नियुक्त करने का आदेश दिया ताकि उनकी पूर्व पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
रिपोर्ट में कोर्ट के आदेश का एक अंश भी प्रकाशित किया गया, जिसमें कहा गया कि रिकॉर्ड दर्शाता है कि याचिकाकर्ता (श्रीधर वेम्बू) ने सामुदायिक संपत्तियों में प्रतिवादी (प्रमिला) के हितों और कानून की कथित अनदेखी की तथा जोहो कॉरपोरेशन, टी एंड वी होल्डिंग्स, टोनी थॉमस, ZCPL और अन्य संबंधित संस्थाएँ उनके निर्देश पर कार्य कर सकती हैं, जिससे प्रतिवादी के हितों को नुकसान हो।
आलोचकों का आरोप है कि ‘द न्यूज मिनट’ ने प्रमिला श्रीनिवासन द्वारा लगाए गए आरोपों को तथ्यों की तरह पेश करते हुए यह संकेत देने की कोशिश की कि वेम्बू अपनी पत्नी को साझा संपत्तियों में उसका अधिकार नहीं देना चाहते। इसके अलावा, लेख में यह भी दावा किया गया कि ‘द न्यूज मिनट’ जल्द ही टेक अरबपति श्रीधर वेम्बू पर एक विस्तृत प्रोफाइल प्रकाशित करने जा रहा है।
वेम्बू के वकील ने ‘द न्यूज मिनट’ के प्रोपेगैंडा का जवाब दिया
राष्ट्रवादी विचारों के समर्थक श्रीधर वेम्बू की छवि को नुकसान पहुँचाने की ऑनलाइन मीडिया पोर्टल की कोशिश का जवाब उनके वकील ने सार्वजनिक रूप से दिया है। वेम्बू के वकील क्रिस्टोफर सी मेल्चर ने एक ऑनलाइन पोस्ट के जरिए ‘द न्यूज मिनट’ को आड़े हाथों लिया और उसकी रिपोर्टिंग पर गंभीर सवाल उठाए।
मेल्चर ने कहा कि ‘द न्यूज मिनट’ ने जनवरी 2025 के एक कोर्ट के आदेश का हवाला दिया जबकि वह आदेश अपील के तहत है और लेख में कई अहम तथ्यों को जानबूझकर छोड़ दिया गया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वेम्बू की पत्नी द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार हैं।
मेल्चर के अनुसार, वेम्बू की पत्नी के वकील ने जज को गुमराह किया और हैरानी की बात यह है कि वह वकील कैलिफोर्निया में कानून की प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस प्राप्त भी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैलिफोर्निया कोर्ट के जिस आदेश में जोहो से जुड़ी कई कंपनियों पर रिसीवर नियुक्त करने की बात कही गई थी, उस हिस्से पर अपील के दौरान रोक (स्टे) लगा दी गई है।
इसके अलावा, 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करने से जुड़ा आदेश भी अभी अपील में लंबित है। मेल्चर ने आरोप लगाया कि इन महत्वपूर्ण तथ्यों को छुपाकर ‘द न्यूज मिनट’ ने एकतरफा और भ्रामक कहानी पेश की जिससे श्रीधर वेम्बू की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।
As Sridhar Vembu’s counsel, I can add some facts missing from the article. The order was made 1 year ago on an emergency application by his wife, meaning we had little time to response to the outrageously false allegations she made against Sridhar. The judge in California was…
— Christopher C. Melcher (@CA_Divorce) January 8, 2026
न्यूज आर्टिकल में पुराने ऑर्डर का जिक्र है जिस पर अपील पर आंशिक रूप से रोक लगी है: वेम्बू के वकील
वेम्बू के वकील क्रिस्टोफर सी मेल्चर ने गुरुवार (8 जनवरी 2026) को X पर एक पोस्ट में लिखा कि श्रीधर वेम्बू ने अपनी पत्नी को ZCPL में अपनी हिस्सेदारी का 50% देने की पेशकश की थी लेकिन पत्नी ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्होंने यह आरोप लगाया कि वेम्बू तलाक मामले में उनके साथ धोखाधड़ी करने की कोशिश कर रहे हैं। मेल्चर ने यह भी बताया कि वेम्बू पहले ही पारिवारिक घर में अपनी पूरी हिस्सेदारी पत्नी के नाम ट्रांसफर कर चुके हैं।
1.7 अरब डॉलर के बॉन्ड को लेकर मेल्चर ने कहा कि इस आदेश का कोई कानूनी आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि वेम्बू ने पूरी प्रक्रिया में ईमानदारी और सम्मानजनक तरीके से व्यवहार किया, फिर भी जज को गुमराह कर यह आदेश पारित कराया गया कि वेम्बू पत्नी की सुरक्षा के लिए 1.7 अरब डॉलर का बॉन्ड जमा करें। बाद में एक अन्य जज ने भी माना कि इतनी बड़ी रकम अतार्किक और अव्यावहारिक लगती है।
मेल्चर के अनुसार, वेम्बू अपनी शेयरहोल्डिंग के बदले अधिकतम 150 मिलियन डॉलर तक ही राशि उधार ले पाने की स्थिति में थे और उन्होंने उतनी राशि जुटाने की कोशिश भी की लेकिन उनकी पत्नी ने वह पैसा लेने से भी इनकार कर दिया।
वेम्बू के वकील ने आगे कहा कि पत्नी ने भरण-पोषण (एलिमनी) की माँग तक नहीं की है और पूरा मामला केवल वेम्बू का समय बर्बाद करने और उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी के वकील ने कोर्ट को गुमराह किया और संभव है कि वह अपनी मुवक्किल को भी वास्तविक स्थिति से भ्रमित कर रहा हो जबकि वह इस दौरान मिलियन डॉलर की कानूनी फीस वसूल चुका है।
मेल्चर ने यह भी साफ किया कि इस मामले का एलिमनी से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि पत्नी ने अब तक किसी भी तरह की आर्थिक सहायता का आदेश तक नहीं माँगा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रीधर वेम्बू कैलिफोर्निया की कोर्ट के सभी वैध और कानूनी आदेशों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।
‘द न्यूज मिनट’ ने कोर्ट की टिप्पणियों को अंतिम फैसले के तौर पर पेश करने की कोशिश की
‘द न्यूज मिनट’ द्वारा प्रकाशित यह लेख गलत और भ्रामक पत्रकारिता का उदाहरण है। चूँकि, वेम्बू की सोच और विचारधारा इस मीडिया संस्थान से मेल नहीं खाती इसलिए उनके निजी जीवन को निशाना बनाया गया। लेख में अदालत की उन बातों को उठाया गया है जो मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान कही गई थीं। इस चरण में अदालत के पास सभी सबूत मौजूद नहीं होते। इसके बावजूद ‘द न्यूज मिनट’ ने इन शुरुआती टिप्पणियों को ऐसे पेश किया, जैसे वही इस मामले का अंतिम फैसला हों।
आरोप यह भी है कि लेख में जरूरी जानकारी छिपाई गई। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि जिस अदालती आदेश का हवाला दिया गया है, उसके खिलाफ अपील दायर की जा चुकी है और आदेश के कुछ हिस्सों पर रोक भी लग चुकी है।
भारत विरोधी ताकतों की पसंद है यह मीडिया आउटलेट
यह पूरा मामला दिखाता है कि कैसे ‘द न्यूज मिनट’ पत्रकारिता का इस्तेमाल एक हथियार की तरह करता है और उन लोगों को निशाना बनाता है जो उसकी वैचारिक लाइन में फिट नहीं बैठते। आरोप है कि यह पोर्टल निष्पक्ष रिपोर्टिंग के बजाय अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तियों को चुनकर बदनाम करता है।
यहाँ यह बताना करना भी जरूरी है कि अक्टूबर 2025 में ‘द न्यूज मिनट’ की एडिटर-इन-चीफ धन्या राजेंद्रन को रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा इम्पैक्ट प्राइज ऑफ द ईयर 2025 के लिए नामाँकित किया गया था। यह उसी समय हुआ था जब धर्मस्थला विवाद के जरिए हिंदुओं को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी।
गौर करने वाली बात यह है कि पेरिस स्थित NGO RSF को फंड देने वालों में फ्रांस का विदेश मंत्रालय, यूरोपीय आयोग, स्वीडन की SIDA, फोर्ड फाउंडेशन, नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (NED) और जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसाइटी फाउंडेशंस (OSF) शामिल हैं। NED को अमेरिका सरकार द्वारा फंड किया जाता है और इसे अक्सर CIA का सॉफ्ट आर्म कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल कई देशों में शासन परिवर्तन (रेजिम चेंज) के लिए किया जाता रहा है।
वहीं, OSF नेटवर्क पर आरोप है कि वह भारत में कई एनजीओ, मीडिया पोर्टल्स और तथाकथित सिविल सोसायटी समूहों को फंड करता है, जो लगातार भारत-विरोधी और हिंदू-विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं। आलोचकों के मुताबिक, इन्हीं अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क्स के सहारे कुछ मीडिया संस्थान अपने एजेंडे को पत्रकारिता के नाम पर आगे बढ़ा रहे हैं।
श्रीधर वेम्बू को लेफ्ट क्यों टारगेट कर रहा है?
यह पहली बार नहीं है जब सिलिकॉन वैली से आकर भारत में zoho कंपनी खड़ी करने वाले श्रीधर वेम्बू और जोहो को कथित तौर पर लेफ्ट-लिबरल इकोसिस्टम के निशाने पर लिया गया हो। इससे पहले जनवरी 2020 में भी वेम्बू और जोहो के खिलाफ बहिष्कार अभियान चलाया गया था। यह अभियान तब शुरू हुआ था, जब श्रीधर वेम्बू को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था।
हालाँकि, वेम्बू ने इस वामपंथी दबाव और ट्रोलिंग के आगे झुकने से इनकार कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि ट्विटर पर होने वाले हमलों से उनके विचार और सोच प्रभावित नहीं होंगे। वेम्बू ने उस समय भी अपनी बात मजबूती से रखी और किसी तरह की माफी या सफाई देने से इंकार किया।
आलोचकों के अनुसार, श्रीधर वेम्बू का खुला राष्ट्रवाद और भारत समर्थक विचारधारा ही उन्हें लेफ्ट-लिबरल मीडिया के निशाने पर ले आई है। आरोप है कि विदेशी हितों से जुड़े इस मीडिया इकोसिस्टम को वेम्बू की प्रो-इंडिया सोच रास नहीं आती, इसलिए उन्हें बार-बार टारगेट किया जाता रहा है।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में अदिति ने लिखी है जिसको पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करे)


