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एडिटेड वीडियो के जरिए मथुरा की होली के रंग में डालना चाहते थे भंग, UP पुलिस ने 9 यूट्यूबरों और इन्फ्लुएंसर्स पर दर्ज किया मुकदमा: जानें- FIR की डिटेल्स

बरसाना और नंदगाँव में मनाई जाने वाली 'लट्ठमार' और 'लड्डूमार' होली को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुँचते हैं। इसे ब्रज की लगभग 5,000 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है।

उत्तर प्रदेश पुलिस ने मथुरा की विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार और लड्डूमार होली को लेकर सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी फैलाने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। ब्रज की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक परंपरा को बदनाम करने के आरोप में 9 यूट्यूबरों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

पुलिस की यह कार्रवाई वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्लोक कुमार के निर्देश पर की गई जाँच के बाद हुई। जाँच में सामने आया कि कुछ लोगों ने पिछले वर्षों के विवादित वीडियो क्लिप्स को कुछ इस साल की होली से जोड़कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इन एडिटेड वीडियो के जरिए यह दिखाने की कोशिश की गई कि बरसाना और नंदगाँव की होली के दौरान अव्यवस्था और अभद्रता हुई है।

दरअसल, बरसाना और नंदगाँव में मनाई जाने वाली ‘लट्ठमार’ और ‘लड्डूमार’ होली को देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु और पर्यटक पहुँचते हैं। इसे ब्रज की लगभग 5,000 वर्ष पुरानी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक माना जाता है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए भ्रामक वीडियो से न केवल इस परंपरा की छवि खराब हुई बल्कि स्थानीय लोगों में भी भारी गुस्सा फैल गया।

पुलिस के संज्ञान में जैसे ही यह बात आई कि कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने होली के पुराने वीडियो को आपत्तिजनक तरीके से एडिट कर उन्हें हालिया आयोजन से जोड़ दिया। तुरंत इसकी जाँच की गई, जाँच में ये वीडियो क्लिप भ्रामक और तथ्यों से छेड़छाड़ किए हुए पाए गए। इस मामले में बरसाना थाने में सभी 9 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

FIR में क्या हैं आरोप और किन पर दर्ज हुआ केस?

पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(2) (विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता बढ़ाना) और 353(2) के साथ-साथ IT ऐक्ट की धारा 67/67A के तहत मामला FIR दर्ज की है।

पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR में लिखा गया है, “26 व 27 फरवरी 2026 को सोशल मीडिया सेल व अन्य प्लेटफॉर्म (जैसे वॉट्सऐप/फेसबुक/इंस्टाग्राम/X आदि) से जानकारी प्राप्त हुई कि कई भ्रामक वीडियो अलग अलग मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित किए गए हैं। जिसमें घटनास्थल नंदगाँव व बरसाना दर्शाया गया है।”

इसमें आगे लिखा गया है, “वीडियो में वर्तमान की घटना बताकर शेयर किया जा रहा है जबकि जाँच करने पर ज्ञात हुआ कि यह वीडियो पुरानी हैं। किसी दूसरे स्थान/समय की हैं।” FIR में कहा गया है, “इन भ्रामक वीडियो के कारण क्षेत्र में भ्रम, अफवाह और सामाजिक वैमनस्य की स्थिति उत्पन्न हो रही है। महिलाओं में भय व असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो रही है और सामाजिक तनाव/अफवाह की स्थिति बन रही है।”

FIR में जिन लोगों औ सोशल मीडिया हैंडल्स के नाम हैं उनमें iMayankofficial, पीयूष राय, विशाल ज्योति देव अग्रवाल, Extra2ab (@UdayRoy443477), ममता राजगढ, कवीश अजीज, Prayagraj.vibes, rnagarvlogs और kotafoodexplor शामिल हैं।

FIR का एक हिस्सा

पुलिस ने क्या बताया?

मथुरा में होली से जुड़े भ्रामक वीडियो फैलाने के मामले में पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को बदनाम करने या उनके साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लोगों से अपील की गई है कि बिना जाँचे-परखे कोई भी वीडियो या संदेश सोशल मीडिया पर साझा न करें।

एसपी देहात सुरेश चंद्र रावत ने बताया कि कुछ वीडियो इस तरह से एडिट और प्रस्तुत किए गए थे, जिससे इलाके में अफवाहें फैलने लगीं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस साल होली का त्योहार पूरी तरह शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। किसी भी श्रद्धालु या स्थानीय व्यक्ति की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री फैलाकर गलत तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई।

पुलिस की सर्विलांस टीम आरोपितों की लोकेशन ट्रेस कर रही है और जल्द ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने चेतावनी देते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति सांस्कृतिक परंपराओं को गलत तरीके से पेश करे या समाज में भ्रम और वैमनस्य फैलाए। ऐसे मामलों में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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