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मिडिल ईस्ट अपडेट्स 07/04/26:अब तक 1800+ नाविक और 815000 लोग लौटे घर, जानिए सरकार ने और क्या-क्या बताया

28 फरवरी को ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से 815000 यात्री पश्चिम एशिया से वापस आ चुके हैं। 2170 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से बाहर निकाला गया है। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।

ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच, केंद्र सरकार ने 9 अप्रैल को रोज़ाना होने वाली अंतर-मंत्रालयी ब्रीफिंग आयोजित की। हालाँकि अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ़्ते के संघर्ष-विराम पर सहमति बन गई है, लेकिन उल्लंघन, शांति वार्ता की शर्तों में विरोधाभास और हिंसा के फिर से शुरू होने की आशंका के चलते स्थिति अभी भी नाज़ुक बनी हुई है।

MEA ने खाड़ी देशों के साथ भारत के जुड़ाव के बारे में जानकारी दी। प्रेस वार्ता के दौरान, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त अरब अमीरात का दौरा करेंगे, ताकि दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूती मिले।

MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि हम पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे हैं और इस क्षेत्र के देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। जैसा कि पहले बताया गया था, विदेश मंत्री 11-12 अप्रैल 2026 को संयुक्त अरब अमीरात की आधिकारिक यात्रा पर जाएँगे। UAE के साथ संबंध को और मजबूत करने पर जोर देंगे और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाएँगे। खाड़ी के दूसरे देशों से भी संपर्क साधा जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री 9-10 अप्रैल 2026 को कतर की यात्रा पर हैं।

अतिरिक्त सचिव (खाड़ी) असीम आर महाजन ने परिस्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक 24/7 कंट्रोल रूम और मिशन, एडवाइजरी, हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल के जरिए लगातार मदद किया जा रहा है। 28 फरवरी को ईरान और इजराइल-अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से 815000 यात्री पश्चिम एशिया से वापस आ चुके हैं। UAE,सऊदी अरब, ओमान और कुछ हद तक कतर का एयरस्पेस खुला हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि खाड़ी के जिन इलाकों में पाबंदियाँ हैं, वहाँ के लिए वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम किया जा रहा है।

महाजन ने कहा कि भारत खाड़ी और पश्चिम एशिया के हालात पर करीब से नज़र रख रहा है, और एक 24/7 कंट्रोल रूम और मिशन, एडवाइज़री, हेल्पलाइन और स्थानीय अधिकारियों के साथ तालमेल के ज़रिए लगातार मदद दे रहे हैं। 28 फरवरी के बाद से 815,000 से ज़्यादा यात्री वापस आ चुके हैं, और उड़ानें उन देशों से चल रही हैं, जहाँ का एयरस्पेस खुला है। इनमें UAE, सऊदी अरब, ओमान और कुछ हद तक कतर शामिल हैं। जिन इलाकों में पाबंदियाँ हैं, जैसे- कुवैत, बहरीन, इजरायल और इराक, वहाँ के लिए वैकल्पिक रास्तों का इंतजाम किया जा रहा है। 2170 भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते ईरान से बाहर निकाला गया है। भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयास जारी है।

पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है।

बंदरगाह जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के संयुक्त सचिव मुकेश मंगल के मुताबिक, बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (MEA) और भारतीय मिशनों के साथ अच्छा समन्वय है। पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज या नाविक से जुड़ी कोई घटना सामने नहीं आई है और जहाज GreenAsha सुरक्षित रूप से JNPA पहुँच गया है।

उन्होंने कहा कि DG शिपिंग कंट्रोल रूम ने 5600 से ज्यादा कॉल और 12000 ईमेल का निपटारा किया है। इनमें पिछले 24 घंटों में आए 166 कॉल और 317 ईमेल शामिल हैं। अब तक 1800 से ज्यादा भारतीय नाविकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जिनमें हाल ही में लौटे 49 नाविक भी शामिल हैं। बंदरगाहों पर काम सामान्य रूप से चल रहा है और नाविकों के कल्याण और समुद्री गतिविधियों में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने के प्रयास लगातार जारी हैं।

वैश्विक आपूर्ति में रुकावट के बावजूद दवाओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। फार्मास्यूटिकल्स विभाग के आधिकारिक प्रतिनिधि और रसायन उर्वरक मंत्रालय के संयुक्त सचिव सत्यप्रकाश ने माना कि ईरान युद्ध के कारण दवा बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की वैश्विक आपूर्ति में रुकावट आई है। हालाँकि, भारत में दवाओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।

संकट में फार्मा क्षेत्र को सहारा देने के लिए केंद्र सरकार ने 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया है।

इसके अलावा, सरकार प्रमुख मंत्रालयों के साथ समन्वय कर रही है ताकि प्रोपलीन, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। ये चीजें आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं के लिए जरूरी हैं। मंत्रालय ने बताया कि मॉर्फोलिन और पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति का प्रबंधन भी किया जा रहा है।

संयुक्त सचिव ने कहा, “पश्चिम एशिया संकट के कारण फार्मा इनपुट की वैश्विक आपूर्ति में रुकावट आई है, जिसका असर सॉल्वैंट्स और APIs (दवाओं में इस्तेमाल होने वाला कच्चा माल) पर पड़ा है। हालाँकि दवाओं की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। इस क्षेत्र को सहारा देने के लिए सरकार ने 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क घटाकर शून्य कर दिया है। फार्मा और पेट्रोकेमिकल्स के बीच मजबूत जुड़ाव को देखते हुए, सरकार प्रमुख मंत्रालयों के साथ समन्वय कर रही है ताकि प्रोपलीन, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण इनपुट की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। ये आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं के लिए जरूरी हैं।”

उन्होंने कहा कि मेथनॉल की आपूर्ति अभी भी हालाँकि चिंता का विषय बनी हुई है। घरेलू उत्पादक आगे आ रहे हैं और लॉजिस्टिक्स को मजबूत किया जा रहा है। मॉर्फोलिन और पैकेजिंग सामग्री जैसे अन्य इनपुट का प्रबंधन भी किया जा रहा है। उम्मीद है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी। कुल मिलाकर, सरकार दवाओं के उत्पादन में किसी भी तरह का व्यवधान नहीं आने देना चाहती है। इस पर सरकार की कड़ी नजर है।

LPG में घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता

पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने गुरुवार को मीडिया को बताया कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत में LPG की सप्लाई पर असर पड़ा है, क्योंकि देश की 60% LPG जरूरतें आयात से पूरी होती हैं। सरकार ने घरेलू ग्राहकों को प्राथमिकता दी है। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग 98% तक पहुँच गई है, और OTP आधारित LPG डिलीवरी 92% पर है।

मंत्रालय ने माना कि सप्लाई चेन में रुकावटों के कारण कमर्शियल LPG पर असर पड़ा है। हालाँकि इसे लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है।

संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के मुताबिक, “घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है, और 100% सप्लाई सुनिश्चित की गई है। किसी भी LPG डिस्ट्रीब्यूटर के पास स्टॉक खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है। 51 लाख से ज्यादा घरों में LPG सिलेंडर की डिलीवरी हुई। हमारी ऑनलाइन बुकिंग 98% तक पहुँच गई है। OTP आधारित LPG डिलीवरी 92% पर है। कमर्शियल LPG पर कुछ असर पड़ा है। हालाँकि इसे लगभग 70% तक बहाल कर दिया गया है। फार्मास्यूटिकल्स, फूड, पॉलीमर्स, कृषि, पैकेजिंग और पेंट्स जैसे सेक्टरों के लिए थोक गैर-घरेलू LPG सप्लाई भी बहाल कर दी गई है।”

इसके अलावा, पेट्रोलियम मंत्रालय ने बताया कि छात्रों और मजदूरों की मदद के लिए 5 kg LPG सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ा दी गई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों ने लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए कैंप भी लगाए गए हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, “छात्रों और मजदूरों की मदद के लिए 5 kg LPG सिलेंडरों की सप्लाई बढ़ा दी गई है। पिछले हफ़्ते में, तेल मार्केटिंग कंपनियों ने 2000 से ज्यादा जागरूकता कैंप लगाए। एक ही दिन में 1.06 लाख से ज्यादा 5 kg सिलेंडर बिके, जबकि फरवरी में औसत बिक्री लगभग 77,000 थी। 23 मार्च से अब तक ऐसे लगभग 10 लाख सिलेंडर बिक चुके हैं।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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