साल 2047 तक ‘विकसित भारत’ के संकल्प को पूरा करने के लिए मोदी सरकार नवाचार पर लगातार जोर दे रही है। 2 लाख से अधिक स्टार्टअप्स, 21 लाख नौकरियाँ, एआई, डीपटेक, रिसर्च और Bharat Innovates 2026 जैसी पहल इस दिशा में मजबूत कदम है। इसी कड़ी में फ्रांस के नीस शहर में 14 से 16 जून तक ‘भारत इनोवेट्स 2026’ का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन इसलिए खास है क्योंकि यह भारत की डीप-टेक क्षमता को वैश्विक निवेशकों, उद्योगपतियों और राष्ट्रों के सामने प्रस्तुत करने वाला अब तक का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग से आगे बढ़कर भारत की नई तकनीकी पहचान बना रहा है। मोदी सरकार भी इनोवेशन के दम विकास पर खासा जोर दे रही है। ऐसे में भारत इनोवेट्स 2026 केवल सिर्फ स्टार्टअप सम्मेलन नहीं, बल्कि भारत की डीप-टेक (Deep Tech) क्षमता को दुनिया के सामने लाने का मंच भी है।
क्या है भारत इनोवेट्स 2026
भारत इनोवेट्स 2026 भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की पहल है, जिसका उद्देश्य भारत के सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करना है।
‘भारत इनोवेट्स’ का ध्यान 13 अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों पर केंद्रित है। इनमें एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर्स, अगली पीढ़ी के संचार माध्यम, एडवांस्ड मटीरियल्स और रेयर मिनरल्स, बायोटेक्नोलॉजी, अंतरिक्ष और रक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और उद्योग 4.0 शामिल हैं। इसका लक्ष्य भारतीय युवाओं, निवेशकों और उद्योगों के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करना तथा स्टार्टअप्स को कमर्शियलाइजेशन के अवसर देना है।
फ्रांस के कार्यक्रम में कौन-कौन पहुँचे
फ्रांस के दो दिवसीय सम्मेलन में 120 भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप, 15 से अधिक IIT, IISc जैसे हाई एजुकेशन संस्थान, 500 से अधिक वैश्विक निवेशक, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के CEO, वेंचर कैपिटल फर्म और रिसर्च इंस्टीट्यूट शामिल हो रहे हैं।
इस सम्मेलन के माध्यम से भारत की तकनीकी ताकत का वैश्विक प्रदर्शन होगा। अब तक भारत की पहचान IT सेवाओं और सॉफ्टवेयर आउटसोर्सिंग से जुड़ी रही है। भारत इनोवेटिव्स का लक्ष्य यह दिखाना है कि भारत अब सेमीकंडक्टर, स्पेस टेक, एआई, बायोटेक, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, हेल्थ टेक, क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी दुनिया को नई दिशा दिखाने का माद्दा रखता है।
आज भारत की कई कंपनियाँ ऐसी तकनीकों पर काम कर रही हैं जो वैश्विक स्तर पर प्रभाव डालने वाली हैं। भारतीय स्टार्टअप्स क्वांटम साइबरसिक्योरिटी प्लेटफॉर्मस (Quantum Cybersecurity Platforms) विकसित कर रहे हैं। एआई की मदद से औद्योगिक सुरक्षा सिस्टम विकसित कर रहे हैं।
एडवांस रोबॉटिक्स, बहुभाषावाली एआई मॉडल्स, क्लाइमेट तकनीक और अगली पीढ़ी के हेल्थकेयर सोल्यूशन पर काम कर रही हैं। ऐसी कई कंपनियाँ भारत की यूनिवर्सिटी और रिसर्च इंस्टीट्यूट्स से निकली हैं। इससे पता चलता है कि भारत में उच्च शिक्षा और इनोवेशन में संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
IIT Madras और IIT Bombay आज देश के प्रमुख DeepTech Incubation Hubs बन चुके हैं। इन दोनों संस्थानों से जुड़े 1000 से अधिक स्टार्टअप्स की संयुक्त वैल्यूएशन 9 अरब डॉलर से अधिक बताई जा रही है। इन कंपनियों ने हजारों रोजगार भी पैदा किए हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में अकेले IIT Madras ने 100 से अधिक डीपटेक स्टार्टअप्स को इनक्यूबेट किया।
विदेशी निवेश आकर्षित करने का मंच
भारत के कई स्टार्टअप्स के पास तकनीक है, लेकिन पूँजी और वैश्विक बाजार तक पहुँच काफी कम है। फ्रांस में हो रहा ‘भारत इनोवेस्ट 2026’ भारतीय कंपनियों को सीधे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और उद्योगों से जोड़ने के दिशा में भी अहम कदम है। भारत लगातार ‘मेक इन इंडिया’ पर जोर देता रहा है। अब इसका अगला कदम ‘इनोवेट इन इंडिया’ है।
मोदी सरकार लंबे समय से भारत को केवल मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं, बल्कि नवाचार और अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार की नीतियाँ देश में अनुकूल माहौल बना रही है। विश्वविद्यालय और शोध संस्थान प्रतिभा, प्रयोग और खोज को आगे ले जा रहे हैं। सब मिल कर काम करेंगे तभी ‘इनोवेशन क्रांति’ देश में संभव है। भारत इनोवेस्ट इसी रणनीति का हिस्सा है।
यह आयोजन ‘India-France Year of Innovation 2026’ के तहत हो रहा है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच तकनीक, अनुसंधान, रक्षा और उद्योग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना है।
भारत इनोवेट्स 2026 के माध्यम से भारत का लक्ष्य
- भारतीय डीप-टेक स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार से जोड़ना।
- विदेशी निवेश और तकनीकी साझेदारी आकर्षित करना।
- भारतीय विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना।
- तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना, ताकि इनोवेशन को नई धार मिले।
- भारतीय इनोवेशन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना और कॉमर्शियलाइजेशन करना है।
भारत इनोवेट्स 2026 को सफल बनाने के लिए सरकार ने क्या-क्या किया
राष्ट्रीय स्तर पर चयन प्रक्रिया- देशभर से हजारों आवेदनों के बीच चयन कर सर्वश्रेष्ठ डीप-टेक स्टार्टअप्स को चुना गया। इसके लिए वैज्ञानिकों और उद्योग विशेषज्ञों की तकनीकी निगरानी समिति बनाई गई थी, जिसकी अगुवाई भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद ने किया। IIT नेटवर्क को जोड़ा गया। IIT गाँधीनगर में राष्ट्रीय बेसकैम्प लगाया गया। IIT बॉम्बे में डीप-टेक प्री-समिट आयोजित किया गया।
इसके अलावा दूसरे देश के प्रमुख तकनीकी संस्थानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई। स्टार्टअप्स की मॉनेटरिंग की गई और वैश्विक प्रस्तुति के लिए तैयार किया गया।
सरकार ने वैश्विक VC फंड्स, कॉर्पोरेट्स, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को इस कार्यक्रम में आमंत्रित किया ताकि भारतीय स्टार्टअप्स को फंडिंग, पायलट प्रोजेक्ट्स और व्यावसायिक अवसर मिल सकें।
फ्रांस के नीस शहर को इसलिए चुना गया क्योंकि यह यूरोपीय इनोवेशन, अनुसंधान और निवेश नेटवर्क से जुड़ा प्रमुख केंद्र माना जाता है। इससे भारतीय कंपनियों को यूरोपीय बाजार तक पहुँच बनाने में मदद मिल सकती है।
यदि G20 भारत की कूटनीतिक शक्ति का प्रदर्शन था, तो भारत इनोवेस्ट 2026 को मोदी सरकार की ‘तकनीकी डिप्लोमैसी’ का प्रदर्शन माना जा सकता है। इसका संदेश साफ है कि भारत अब केवल दुनिया का बाजार नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों का निर्माता और निर्यातक देश भी बनना चाहता है।
एक तरह से देखा जाए तो भारत इनोवेस्ट 2026, स्टार्टअप इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और भारत की डीप-टेक रणनीति को एक वैश्विक मंच पर एक साथ प्रदर्शित करने वाला पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन है।


