बिहार के भोजपुर (आरा) में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत भूषण तिवारी को लेकर बिहार पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की न्यायिक जाँच के आदेश दिए हैं। भरत तिवारी को लेकर सोशल मीडिया भी दो गुटों में बँटा नजर आ रहा है। कुछ लोग उसके समर्थन में हैं तो कई उसे पुलिस पर गोली चलाने वाला अपराधी बता रहे हैं। इस लेख में समझेंगे कि इस मामले में अब तक क्या हुआ और भरत तिवारी का सोशल मीडिया खँगालने पर हमें क्या पता चला है?
अब तक क्या-क्या हुआ?
इस मामले की शुरुआत 15 जून को हुई। 15 जून 2026 को और उससे पहले भी फेसबुक पोस्ट में उसने देश में क्रांतिकारी युद्ध छेड़ने और जगदीशपुर के SDM का एनकाउंटर करने की बात कही थी। इसके बाद पुलिस 15 जून को दो बार उसके घर पहुँची, एक बार वह नहीं मिला और उस दिन वह थाने नहीं पहुँचा।
इसके बाद पुलिस ने बताया कि 16 जून को भोजपुर के शाहपुर थाने को सूचना मिली थी कि एक शख्स हथियार लेकर घूम रहा है। वह शख्स बिलौटी गाँव का रहने वाला भरत भूषण तिवारी ही था। भरत की अवैध हथियार लिए कई तस्वीरें सामने आई हैं। उसी दिन पुलिस पूछताछ के लिए भरत तिवारी के घर पहुँची। पुलिस जब पूछताछ कर रही थी तो उस दौरान भी भरत हाथ में बंदूक लिए हुए था। उसके अपने फेसबुक पेज पर एक लाइव किया जिसमें वह पुलिस के सामने हथियार लिए दिख रहा है।
भरत के इस फेसबुक पोस्ट पर लिखा गया, “आज हुआ कुछ ये की बिहार सरकार और बिहार के सिस्टम के द्वारा खास करके वही सा** जगदीशपुर का वो जो बोकवा SDM है जिसका एनकाउंटर होने वाला है उसके द्वारा मेरे साथ कुछ हरकत की गई।”
पोस्ट में आगे लिखा गया, “गनीमत है की शाहपुर के अभी कुछ दिनों पहले आए नए थाना प्रभारी ने मैटर सँभाल लिया नहीं तो कहीं आज साला प्रशासन में से ही कुछ रंगबाज छपरियों का एनकाउंटर हो जाता या तो मेरा ही हो जाता और इसी के साथ इस देश में एक नई क्रांतिकारी युद्ध को जन्म दे दिया जाता।”
इस वीडियो के साथ भरत ने लिखा, “आप सभी ये देखिये की कैसे बिहार का CM और बिहार सरकार के प्रशासन का कुछ गदहवा सब सा** SDM वा के इशारे पर कैसे मेरा एनकाउंटर करना चाहता है और सुनने में आ रहा है की अब बाहर से टीम आएगी और वो भी पूरी तैयारी के साथ मेरा एनकाउंटर करने के लिए तो सा** अब कई भेड़िए मिलकर एक शेर का शिकार करेगा रे तो सा** आ जाओ तुमलोगो के साथ अब शिकार शिकार ही खेला जाएगा।”
भरत ने लोगों से अपील करते हुए आगे लिखा, “आप सभी ये देख लिजिए की ऐसा युद्ध करने में अपना बहुत कुछ कैसे खो देना पड़ता है और अभी तो ये सिर्फ शुरुवात है अभी आगे समाज और देश के लिए अपना बहुत कुछ त्याग देना पड़ेगा क्यूँकि किसी भी देश में ऐसे ही कोई क्रांति नहीं आती।”
यह खबर जब सोशल मीडिया पर फैली तो उसने अपने फेसबुक पेज पर भी इससे जुड़े की लिंक्स शेयर किए। वहीं, भोजपुर पुलिस ने भी देर रात X पर एक पोस्ट कर इस घटना की जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि भरत मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) है।
भोजपुर पुलिस ने कहा, “शाहपुर थाना को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति हथियार लेकर घूम रहा है ।इस सूचना के सत्यापन हेतु जब शाहपुर थाना की पुलिस टीम संबंधित व्यक्ति के घर पहुँची , तब यह तथ्य सामने आया कि वह व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वथ है। उसे तत्काल उचित इलाज और देखरेख के लिए मेंटल हॉस्पिटल भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।”
पुलिस ने बताया कि भरत के पास मौजूद हथियार को बरामद करने और उसे नियंत्रण में लेने के लिए पुलिस टीम द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
इसके बाद आई 17 जून की तारीख। 17 जून को सुबह-सुबह भरत तिवारी ने फेसबुक पर लाइव आकर कहा कि पुलिस उसे पागल साबित करके उसे ले जाना चाहती है। इस वीडियो में वह अपनी तुलना भगत सिंह के भी करता नजर आया। वीडियो में कह रहा है, “इन लोगों को अपना पागलपन दिखाते हैं और इन लोगों को दौड़ा-दौड़कर मारते हैं।” इसके बाद वीडियो में वह घर के बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों पर गोली चलाता भी नजर आया।

वीडियो में वह लगातार पुलिसकर्मियों को मारने की धमकी देता रहा। साथ ही, उसने इस पोस्ट में लिखा, “देश के इस क्रांतिकारी युद्ध में बिहार पुलिस पे गोलियाँ बरसाईं गई और उसके बाद इन सभी का मैं एनकाउंटर करने निकला तो ये सब सा** दुम दबा के भाग गया।” उसने वायरल वीडियो में दावा किया कि उसे पुलिस ने घर के भीतर ही बंद कर दिया है।
कुछ देर बाद भरत तिवारी घर से बाहर निकला और फिर एक बार पुलिसकर्मियों को एनकाउंटर की धमकियाँ देने लगा। वो लगातार पुलिसकर्मियों को गालियाँ देता रहा और उन्हें ठोकने की बात कहता रहा। इसके बाद उसने खुद को विक्षिप्त बताए जाने पर पुलिस को खूब उल्टा-सीधा कहा।
उसने फेसबुक पर लिखा, “अरे सा** बिहार का CM, बिहार पुलिस का सिस्टम और पुरे बिहार का गँजेड़ी सिस्टम सा** तु सब कौन सा नशेड़ी है रे, सा** तुम सभी मुझे सिर्फ पागल ही क्यूँ बोल रहा है उसके साथ वो सभी बातें भी बोलो जो एक क्रांतिकारी योद्धा के लिए समय समय पर इस देश में बोला जाता है।”
‘एनकाउंटर’ के दिन भरत के साथ क्या-क्या हुआ?
इसके बाद 17 जून 2026 को करीब सुबह 9 बजे भरत एक बार फिर फेसबुक पर लाइव आया और इस बार वह एक खुले मैदान में पुलिस के सामने खड़ा था। फेसबुक पर मौजूद करीब 15 मिनट के इस वीडियो में वो लगातार पुलिसकर्मियों को धमकाता और उन पर बंदूक तानता नजर आया। वह वीडियो में बंदूक दिखाकर पुलिसकर्मियों को भाग जाने की बात कहता रहा।
इस वीडियो एक पुलिसकर्मी की बात का जवाब देते हुए उसने कहा, “किस चीज का सरेंडर, यहाँ तो युद्ध होगा। या तो तुम या मैं। तुमने पागल क्यों बोला।” इसके बाद उसने पुलिसकर्मियों पर गोली भी चला दी। जिसे इस वीडियो में 2:25 मिनट के बाद देखा जा सकता है।
इस वीडियो के बाद भरत एक आखिरी बार फिर फेसबुक पर लाइव आया। करीब 3:45 मिनट के इस वीडियो में उसने कहा कि पुलिस उसकी माँगे मानने को तैयार हो गई है और उसकी बात मुख्यमंत्री तक पहुँचाई जाएगी। भरत ने लाइव वीडियो में कहा कि उसे अब हथियार डालने में कोई दिक्कत नहीं है।
उसने अपनी माँग बताते हुए कहा, “कोई भी नेता, मंत्री, विधायक और कोई भी अधिकारी समाज के साथ झूठा वादा नहीं करेगा। अगर करेगा तो उसे किसी भी हाल में पूरा करना होगा। नहीं करेगा तो मेरे जैसे लोगों को हथियार उठाना पड़ेगा।”
उसने कहा कि अब माँग पूरी होने और समाज में बदलाव आने की संभावना दिख रही है तो वह हथियार रखने जा रहा है। इसके बाद उसने वहाँ मौजूद पुलिसकर्मियों के पास अपना हथियार फेंक दिया।

इस हथियार को फेंकने के बाद उसके एनकाउंटर की खबर आई। इसकी भी दो अलग दावे हैं, एक दावा पुलिस का है और वहाँ मौजूद लोगों का। भोजपुर पुलिस ने शाम करीब 4 बजे X एक पोस्ट में भरत तिवारी की मौत की जानकारी दी।
पुलिस ने लिखा, “9 बजे पुलिस को सूचना मिली की भरत भूषण तिवारीहाथ में पिस्टल लहराते हुए हवाई फायरिंग कर रहा है। पुलिस व STF द्वारा उससे लगातार आत्मसमर्पण करने के लिए कहा गया लेकिन वह पिस्टल से रुक-रुककर फायरिंग करता रहा। जब जवान उसकी तरफ बढ़े तो उसने पुलिस पर सीधे फायरिंग कर दी। जिसके बाद पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की और शख्स के पैर में गोली लगी। इलाज के दौरान पटना के PMCH में उसकी मौत हो गई।”
लेकिन वहाँ मौजूद लोगों का कुछ और दावा है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा, “भरत तिवारी ने हम लोगों के सामने हथियार फेंका, जिसके बाद पुलिसवालों ने दौड़कर उन्हें पकड़ लिया। इसके बाद कुछ दूर तक उन्हें ले गए और उन्हें गोली मार दी। हम लोगों ने देखा था कि उन्हें तीन गोलियाँ मारी गई है। अब डॉक्टर 5 गोली लगने की बात कह रहे हैं, तो भरत तिवारी को रास्ते में पुलिसवालों ने 2 और गोली मारी होगी।”
इस मुठभेड़ पर सवालों के बीच लोग आक्रोशित हो गए और 18 जून 2026 को भरत के शव को हाईवे पर रखकर हंगामा किया गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने एनएच-922 जाम कर दिया था और इसके बाद खूब बवाल हुआ, पुलिस को लाठी तक चलानी पड़ी।
अब मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि इस हंगामे को लेकर दो FIR दर्ज की गई हैं जिनमें एक में भरत के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपित बनाया गया है। उन पर हथियार रखने और सरकारी काम में बाधा डालने जैसे आरोप लगाए गए हैं। वहीं, हंगामे-सड़क जाम को लेकर 14 नामजद सहित 50 से अधिक अज्ञात लोगों पर दूसरी FIR दर्ज की गई है।
इस मामले में भरत तिवारी की माँ सुमन देवी ने भी आवेदन देकर माँग की है कि शाहपुर थानाध्यक्ष समेत एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। उनका कहना है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था।
CM सम्राट ने दिए न्यायिक जाँच के आदेश
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर तो हंगामा मचा ही, बिहार ने राजनीति में भी खूब बवाल मचा हुआ है। घटना पर हंगामा बढ़ने के बाद शाहपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार मलाकार समेत कई सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है।
कई नेता भरत तिवारी के घर पहुँच रहा है और परिवार के साथ संवेदनाएँ जता रहे हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार को घेरते हुए कहा कि यह फर्जी एनकाउंटर है और पुलिस ने पहले भी कई बार जाति देखकर एनकाउंंटर किए हैं।
खुद BJP और उसके सहयोगियों की तरफ से भी सवाल उठाए गए। JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि इस मामले की जाँच वरिष्ठ अधिकारी से कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। बिहार में BJP के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी इस एनकाउंटर पर सवाल उठाए।
लगातार सवालों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शनिवार (20 जून 2026) को इस मामले में जाँच का ऐलान कर दिया। उन्होंने X पर लिखा, “पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जाँच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जाँच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जाँच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ जांच सुनिश्चित करना है।”
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में दिनांक 17.06.2026 को हुई पुलिस मुठभेड़ की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच हेतु उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा न्यायिक जांच कराने का निर्णय लिया गया है। न्यायिक जांच का उद्देश्य घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्षता एवं…
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) June 20, 2026
क्रांतिकारी या अपराधी: कौन था भरत, लोगों और उसकी सोशल मीडिया से क्या पता चला?
भरत को लेकर दो तरह की चर्चाएँ हैं एक वर्ग भरत में अपराधी देख रहा है जो हथियार लेकर सोशल मीडिया से कथित क्रांति करना चाहता था तो वहीं एक वर्ग के लिए वो हमेशा मदद करने वाला शख्स है। भरत की फेसबुक पोस्ट देखने से एक बात तो साफ है कि उसे सरकार और सिस्टम के खिलाफ भयंकर गुस्सा था और उसने कई आपत्तिजनक बातें भी लिखी हैं।
पिछले कुछ दिनों से वह लगातार सोशल मीडिया पर आक्रामक बातें लिख रहा था। वो देश में एक क्रांतिकारी युद्ध छेड़ने और एक नई तरह की सोच की बातें कर रहा था। लोगों की मदद के लिए किए गए उसके कई पोस्ट में भी आपत्तजनक और आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया गया है। 15 जून 2026 को एक फेसबुक पोस्ट में उसने देश में क्रांतिकारी युद्ध छेड़ने और जगदीशपुर के SDM का एनकाउंटर करने की बात कही थी।
इस पोस्ट में भरत ने लिखा, “बिहार के CM और पूरे सिस्टम को मेरा ये संदेश है की 2 दिनों में मुझे बता दो की सभी घोषणाओं और सभी विकास के कार्यों को किया जाएगा या नहीं। अगर 2 दिनों में मुझे ये पता नहीं चलता है कि सभी विकास के कार्यों को करवाया जाएगा या नहीं तो फिर उसके बाद इस देश में क्रांतिकारी युद्ध करने की घोषणा कर दी जाएगी और उसका समय भी बता दिया जाएगा और उसमें सबसे पहले जगदीशपुर के SDM का एनकाउंटर कर दिया जाएगा।”
इस पोस्ट में उसने लिखा, “अभी मेरी जैसा मैं कर रहा हूँ तो उसको देख कर…गद्दारों और देशद्रोहियों को बहुत मजा आ रहा है। खासकर इस देश को जो इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहते हैं। ऐसे लोग ज्यादा खुश ना हों क्यूंकि जिस दिन सा** तुम सभी का ऐसे कुछ भी इलाज करने का मुझे सिर्फ एक भी मौका मिल गया तो सा** तुम जैसे लोगों का वो हाल करूँगा की तुम्हारी रूह तक काँप उठेगी”
12 जून 2026 के एक पोस्ट में उसने प्रशासन से लोगों की मदद करने की अपील की और इसी पोस्ट में बेहद आक्रामक भाषा का भी इस्तेमाल किया गया। उसने लिखा, “जवईनिया गाँव के असहाय और मजबूर लोगों को बसाने के लिए उस गड्ढे वाले स्थान पर 1 से 2 दिनों में मिट्टी नहीं डाला गया…तो उसके बाद बिहार के सिस्टम में बैठा कोई भी सा** लुच्चा और लफंगा यहाँ आ गया तो उस सा* छपरी का एनकाउंटर कर दिया जाएगा”

इसी मामले को लेकर उसने 7 जून 2026 को लिखा, “गड्ढे वाले स्थान पर मिट्टी नहीं भरा गया है। 2,4 दिन मैं और देख लेता हूँ नहीं तो साला जो बोली से नहीं मानेगा तो उसको गोली खाकर जरुर मान जाना चाहिए। हाँ, SDM सा* का एनकाउंटर तो होगा।” वो पिछले दिनों से लगातार इस मुद्दे को उठा रहा था।
6 जून को एक अन्य विषय पर उसने लिखा, “आप सभी लोगो से मैं बताना चाहता हूँ बिलौटी गाँव में जो जवनिया गाँव के लोगो को बसाने का निर्णय लिया गया है और इस क्रम में जो जो विकास के कार्य यहाँ होने वाले थें तो उसमें सबसे पहले एक कार्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार होते हुए पाया गया है जो की ये सरकारी चापा कल (हाथी पांव चापा कल) का कार्य है।”
उसने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी पोस्ट भी शेयर की हैं। बाढ़ प्रभावित गाँवों की मदद से जुड़े कई पोस्ट भी भरत की फेसबुक प्रोफाइल में नजर आते हैं। नीतीश कुमार की विदाई पर भरत ने लिखा, “बिहार में छपरीबाज CM का अंत हुआ और अब आने वाला CM छपरीबाज होगा की नहीं ये तो आने वाला समय खुद बता देगा।”
इससे पहले के कई फेसबुक पोस्ट में उसने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए इसी तरह की आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। वह नीतीश कुमार सरकार की नीतियों की लगातार आलोचना करता रहा था।
11 सितंबर 2025 के एक पोस्ट में उसने लिखा, “आप सभी लोगो को एक सूचना देना था की मैं समाज और देश के लिए जो एक क्रांतिकारी युद्ध लड़ रहा हूँ, उस लड़ाई में मुझे एक और नया युद्ध शामिल करने का मौका मिलने वाला था लेकिन अब कुछ-कुछ छपरी CM और उसके लोग मुझे समझने लगे हैं की इसका आगे का प्लान क्या हो सकता है।” इसमें उसने लिखा कि उसकी जमीन पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा है।
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भरत तिवारी का आपराधिक इतिहास भी था। मार्च 2025 में भरत तिवारी के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने, मारपीट करने, गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने तथा पुलिस पदाधिकारी के साथ दुर्व्यवहार को लेकर केस दर्ज किया गया था। आरोप था कि भरत ने पुलिस पदाधिकारी की वर्दी का कॉलर पकड़ लिया था और उनके साथ धक्का-मुक्की की थी।
पुराने फेसबुक पोस्ट दिखाने पर भरत की सिस्टम से नाराजगी साफ नजर आती है और उसने कई बार आक्रामक भाषा का भी इस्तेमाल किया है। लेकिन दूसरी तरफ कई लोगों के लिए वह एक मदद करने वाला हीरो था।
दैनिक भास्कर से बिलौटी गाँव के पास के बाढ़ प्रभावितों में शामिल एक शख्स ने कहा, “भरत तिवारी हम लोगों के लिए भगवान जैसे थे। वे रोज आते थे, देखते थे कि चापाकल में पानी आ रहा है या नहीं। लाइट आई या नहीं।” एक अन्य महिला ने कहा, “भरत तिवारी हम लोगों के लिए सब कुछ थे, वे हम लोगों के लिए भगवान जैसे थे। हम लोग उन्हें भगवान जैसा मानते भी थे।”
अंजलि नामक उस महिला ने कहा, “भरत तिवारी ने अपने गले में पहने हुए महावीरी लॉकेट को बेचकर पिस्टल खरीदी थी। ये बात उनकी माँ ने हम लोगों को बताया था। वारदात के दिन पुलिसकर्मियों की 50 से अधिक संख्या थी। 20 से अधिक गोलियाँ चली थी लेकिन भरत तिवारी ने सिर्फ तीन गोलियाँ चलाई थी, वो भी दो जमीन पर और एक हवाई फायरिंग की थी।”
एक अन्य शख्स का कहना है कि भरत तिवारी पागल या मेंटल होता तो हम लोगों की भलाई के बारे में क्यों सोचता और स्कूल खुलवाने या बिजली-पानी की व्यवस्था की बात क्यों करता। उन्होंने कहा, “प्रशासन उन्हें पागल घोषित करने में जुटा था, इसलिए भरत तिवारी ने हथियार उठाया था। भरत तिवारी हम लोगों के लिए मसीहा थे।”
बताया जाता है कि वो लगातार बाढ़ के पानी में समा गए घरों को लेकर आवाज उठाता रहता था। जवइनियां गाँव की दिक्कतों को लेकर वह लगातार जिला प्रशासन से मुलाकात करता और गाँव में बिजली, पानी की स्थिति ठीक करने की चर्चा करता रहता।
भरत तिवारी के विषय में लोगों की राय और पुलिस की थ्योरी, दोनों एक दूसरे के बिल्कुल विपरित हैं। सोशल मीडिया खँगालने पर दिखता है कि उसकी भाषा आक्रामक थी और वो एनकाउंटर करने और गोली मारने जैसी बाते लिखता था। वहीं, दूसरी और सोशल मीडिया पर ऐसी बातें भी हैं जिसमें वो लोगों के मुद्दा सड़क, गाँव, पानी, बिजली की बातें उठा रहा है। भरत नायक है या खलनायक है, उसकी हत्या हुई या पुलिसकर्मियों ने बचवा में गोली मारी ये तो अब न्यायिक जाँच ही बताएगी।


