Homeदेश-समाजमेरठ में दलित छात्रा की हत्या के नाम पर क्यों खराब किया गया माहौल?...

मेरठ में दलित छात्रा की हत्या के नाम पर क्यों खराब किया गया माहौल? SSP अविनाश पांडे के नेतृत्व में कैसे UP पुलिस ने अपराधियों का किया पर्दाफाश: समझें- ललिता हत्याकांड की आड़ में हो रही कैसी राजनीति

मेरठ में दलित युवती ललिता गौतम की हत्या के नाम पर प्रदर्शन की आड़ में हंगामा करने की साजिश को SSP अविनाश पांडेय और उनकी टीम ने फेल किया है। लेकिन सोशल मीडिया पर SSP की कार्रवाई की आलोचना की जा रही है।

उत्तर प्रदेश में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अविनाश पांडेय का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में अविनाश पांडेय सड़क पर इकट्ठा हुए दलितों को डाँटकर हटा रहे हैं और फिर पुलिस वैन में बंद एक दलित शख्स पर थप्पड़ बरसा रहे हैं। बताया गया कि ये लोग प्रदर्शनकारी थे, जो मई 2026 में ललिता गौतम की हत्या के विरोध में सड़क पर जमा हुए थे।

इस वीडियो को हथियार की तरह इस्तेमाल कर समाजवादी पार्टी (सपा), कॉन्ग्रेस जैसे विरोधी दलों से लेकर ‘एक्स’ पर समाज का उद्धार करने का ढोंग करने वाले वामपंथियों और लिबरलों ने भी उत्तर प्रदेश की पुलिस और सरकार को जमकर घेरा। हवा उड़ाई गई कि उत्तर प्रदेश में दलितों की आवाज दबाई जा रही है, ऐसे में चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ जैसे दलित नेता भी खुलकर विरोध में उतर गए।

लेकिन इस वीडियो के पीछे की कहानी क्या है? या SSP ने ऐसा बर्ताव क्यों किया? यह किसी ने जानने की कोशिश नहीं की है। उल्टा लोगों ने इसे सिर्फ ‘ब्राह्मण SSP का दलितों पर अत्याचार’ की तरह पेश किया। पर हम आपको हकीकत बताएँगे। बताएँगे कि SSP के इस रिएक्शन की वजह क्या रही और यह भी कि आखिर इन लोगों की माँगे क्या थीं और कैसे यह ‘प्रदर्शन’ एक सोची-समझी साजिश थी।

अखिलेश यादव से लेकर चंद्रशेखर आजाद ने की राजनीति, एक्स का समाज-सुधारक गैंग हुआ एक्टिव

इससे पहले वीडियो पर विपक्ष की राजनीति और वामपंथियों की ‘चिंता’ पर नजर डाल लेते हैं।

सबसे पहले उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मेरठ SSP की कार्रवाई को निंदनीय बता दिया। इसी के साथ उन्होंने इस घटना के संदर्भ में सीधे सीएम योगी ने निशाना बनाते हुए कहा, “जब प्रदेश-प्रमुख ही सरेआम एक मृतक की माँ के साथ असंवेदनशील होने का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे तो उनकी पुलिस से कोई उम्मीद करना बेमानी है। घोर निंदनीय।”

कॉन्ग्रेस ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस ने बीजेपी की डबल इंजन सरकार में सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा, “मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम की निर्मम हत्या ने फिर से भाजपा की डबल इंजन सरकार के महिला और दलित सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन सरकार इंसाफ देने के बजाय आवाज उठाने वालों पर ही लाठी-थप्पड़ बरसा रही है।”

और जहाँ दलित के नाम पर सरकार को घेरने की बात हो तो आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद का नाम तो सामने आना अनिवार्य है ही। चाहे चंद्रशेखर ने दलित युवती की हत्या के बाद परिजनों को संवेदनाएँ न दी हों, लेकिन जब दलित युवती के नाम पर सरकार और प्रशासन के खिलाफ बोलने की आई तो चंद्रशेखर आजाद आगे आ गए।

अब चंद्रशेखर को अपने ‘भाइयों’ की याद आ गई है और वीडियो रिलीज कर बीजेपी सरकार को धमकी दे रहे हैं- “मेरे लोग इसका जवाब वोट से देंगे और इतने धीरे से देंगे की ऐसी चोट लगेगी आपको कि चोट के निशान भी बहुत दूर से लगेंगे।” यही नहीं अब मामला तूल पकड़ने के बाद चंद्रशेखर आजाद मेरठ में ललिता गौतम के परिवार से मिलने भी रवाना हो चुके हैं।

लेकिन रास्ते में जब पुलिस अधिकारियों ने उनकी गाड़ी को रोका, तब जो धमकी चंद्रशेखर ने पुलिस को दी उसे लेकर कोई आपत्ति नहीं उठा रहा है। बल्कि चंद्रशेखर के फेसबुक पर पिछले घंटों में शेयर किए गए एक वीडियो में थ्री स्टार पुलिस अधिकारी हाथ जोड़ते दिख रहा है और चंद्रशेखर सीधा उनका नाम लेकर उन्हें उंगली दिखाकर धमका रहे हैं। इस वीडियो को चंद्रशेखर के समर्थक छाती चौड़ी कर शेयर कर रहे हैं और पुलिस को ‘कमजोर’ के रूप में पेश कर रहे हैं।

उधर, राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने कहा कि पीड़ित और न्याय माँगने वाले दोनों ही दलित समाज से हैं इसीलिए प्रशासन ने अन्याय किया। भारती ने कहा, “जब तक दलित, पिछड़े और आदिवासियों को उनकी आबादी के हिसाब से भागीदारी नहीं होगी, उनका प्रतिनिधित्व नहीं होगा, तब तक ऐसे SSP आते रहेंगे और वंचित दोहरे अन्याय का शिकार होते रहेंगे!”

मेरठ SSP की कार्रवाई पर सिर्फ राजनीति ही नहीं हुई, बल्कि ‘एक्स’ का समाज-सुधारक गैंग भी एक्टिव हो गया। एक ओर यह गैंग खुलेआम जातिवाद फैलाने लगा कि ब्राह्मण को दलित पर हाथ नहीं उठाना चाहिए था, वहीं कुछ लोगों ने ललिता गौतम केस को बिना जाने पुलिस के दमनकारी रवैये और लोकतंत्र में आवाज उठाने पर रोक को लेकर रोना रोया।

इसमें कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने भी टिप्पणी की और वीडियो का विश्लेषण करते हुए मेरठ SSP अविनाश पांडेय को ‘पागल’ बता डाला और उन्हें सस्पेंड करने की माँग की। सौरव ने कहा, “जैसा कि इस वीडियो से साफ है, IPS अफसर अविनाश पांडेय मानसिक रूप से बीमार हैं। उन्हें मदद की जरूरत है। इलाज चलने तक उन्हें सस्पेंड कर देना चाहिए। वरना, वे समाज और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बने रहेंगे।”

वहीं एक्स पर ‘समाजवादी’ लक्ष्मण यादव लिखते हैं, “वर्दी जनता की सुरक्षा और न्याय के लिए मिली है, उसकी आवाज़ कुचलने के लिए नहीं। योगी सरकार बताए – न्याय माँगने वालों पर डंडा क्यों?”

आखिर इतना हौआ बन क्यों रहा है? क्या SSP को सुरक्षा व्यवस्था संभालने की इजाजत नहीं है या उनके गुस्से भरे अंदाज से लोगों को परेशानी है? और जातिवाद की राजनीति करने वाले भी पीछे नहीं हटे। इसे जानने के लिए सबसे जरूरी है पूरा मामला जानना और उससे भी जरूरी है दूसरा पक्ष यानी पुलिस का पक्ष सुनना।

क्या है ललिता गौतम की हत्या का पूरा मामला?

सबसे पहले जानते हैं कि आखिर जिस मामले को लेकर इतना हौआ बन रहा है, वह आखिर है क्या? तो बता दें कि यह मामला दो महीने पुराना है। जब 15 मई 2026 को मेरठ के टीपी नगर थाना क्षेत्र के गंगा एन्क्लेव की रहने वाली बीए फाइनल ईयर की छात्रा ललिता गौतम कॉलेज में परीक्षा देने के लिए घर से निकली थी, लेकिन देर शाम तक वापस नहीं लौटी।

परिजनों ने अपने स्तर पर खोजबीन करने के बाद अगले दिन 16 मई 2026 को टीपी नगर थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने तलाश की तो मेरठ के ही रोहटा थाना क्षेत्र के उपसिया गाँव के पास एक गन्ने के खेत में ललिता का शव अर्धनग्न और क्षत-विक्षत हालत में बरामद हुआ।

अब पुलिस ने हत्या के पीछे की वजह और आरोपितों की खोज के लिए इलाके के सीसीटीवी खंगाले, जिसें ललिता को आखिरी बार अंकुश नाम के युवक के साथ बाइक पर जाते देखा गया। पुलिस ने अंकुश को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके बाद पुलिस ने केस का खुलासा कर दिया।

पुलिस ने पुख्ता सबूतों और पूछताछ के आधार पर बताया कि अंकुश और ललिता के बीच पिछले 3 साल से प्रेम संबंध थे। पुलिस के मुताबिक, घटना वाले दिन भी दोनों साथ ही थे। हत्या के पीछे की वजह बताते हुए पुलिस ने कहा कि अंकुश ने ललिता के मोबाइल में दूसरे लड़के के साथ चैट और फोटो देखे थे, जिसके बाद दोनों के बीच खूब झगड़ा भी हुआ था। इसी लड़ाई पर अंकुश ने गुस्से में आकर ललिता की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव को खेत में फेंक दिया।

पुलिस ने अंकुश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इसके अलावा सबूत मिटाने में मदद करने के आरोप में निशांत और अंकित नाम के दो और युवकों को गिरफ्तार किया गया। यहाँ तक मामले में पुलिस की कार्रवाई से ललिता गौतम का परिवार संतुष्ट था।

परिवार को भड़काने और प्रदर्शन की साजिश

लेकिन पुलिस का कहना है कि कुछ ‘अराजक तत्वों’, जिनमें अमरोहा के दिग्विजय सिंह और रवि गौतम, ने मृतका के परिजनों को भड़काया। इसके बाद परिवार माँग करने लगा कि ललिता गौतम की हत्या की दूसरे पहलुओं से भी जाँच होनी चाहिए। मृतका के पिता ने तर्क दिया कि कोई भी अकेला व्यक्ति इतनी बड़ी वारदात को अंजाम नहीं दे सकता, इसमें कोई और लोग शामिल हैं जिन्हें पुलिस बचा रही है।

अब इन्हीं आरोपों को लेकर 08 जुलाई 2026 को मृतका के परिजनों और भारी संख्या में भीड़ कलेक्ट्रेट के बाहर सड़क पर जमा हो गई। पुलिस ने कहा कि मृतका के परिजनों को ज्ञापन सौंपने के बहाने भीड़ जुटाई गई थी और उस भीड़ ने सड़क को जाम कर दिया। पुलिस और प्रशासन के समझाने के बावजूद प्रदर्शनकारी हटने को राजी नहीं हुए और उल्टा अराजकता फैलानी शुरू कर दी। इस पर SSP अविनाश पांडेय पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुँचे और भीड़ को खदेड़ दिया।

पुलिस के इसी लाठीचार्ज की वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुईं और सुरक्षा व्यवस्था संभालने की इस कार्रवाई को ‘अत्याचार’ का नाम दिया गया। बाद में SSP अविनाश पांडेय ने इस पूरे प्रदर्शन की जाँच कर खुलासा किया कि इस हंगामे के पीछे न्याय की माँग नहीं थी, बल्कि माहौल बिगाड़ने की साजिश थी। पुलिस ने साजिशकर्ताओं के नामों का भी खुलासा कर दिया है।

पुलिस वैन में मेरठ SSP ने शख्स पर क्यों बरसाए थप्पड़ और वह कौन था?

अब प्रदर्शन में पुलिस के लाठीचार्ज की वीडियो तो पूरे सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और प्रोपेगेंडा गढ़ने वाले लोगों ने इससे अपना कंटेन्ट भी बना लिया। इन्हीं वायरल वीडियो में एक वीडियो मेरठ SSP अविनाश पांडेय की पुलिस वैन में घुसकर एक शख्स पर थप्पड़ बरसाने की भी थी। इस वीडियो की भी खूब आलोचना की गई। लेकिन उस वीडियो पर किसी ने बात नहीं की जिसमें वही शख्स पुलिस वैन में फाँसी का फंदा बनाकर पुलिस को आत्महत्या करने की धमकी दे रहा है।

वीडियो में दिख रहा शख्स रवि गौतम है। वह पुलिसवालों को धमकी दे रहा है, “मैं वकील हूँ। मैं मरूँगा।” इसी धमकी के बाद पुलिसवालों ने बल प्रयोग का इस्तेमाल किया था। SSP अविनाश पांडेय ने बताया कि पुलिस वैन में रवि गौतम के फंदा लगाने के बाद स्थिति को संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया। तभी उन्होंने तीखे तेवर में प्रदर्शनकारियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि सड़क किसी के पिताजी की नहीं है और विरोध का तरीका बिल्कुल गलत है।

बात करें रवि गौतम की, तो यह नोएडा का रहने वाला है, जो अपनी राजनीति चमकाने मेरठ तक पहुँच गया। यह ‘युवा शक्ति दल’ नाम के संगठन का राष्ट्रीय अध्यक्ष है। यह भी बताया जा रहा है कि रवि गौतम पहले आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर आजाद का साथी हुआ करता था, लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए। अब दोनों अलग-अलग पार्टी बनाकर दलितों के नाम पर राजनीति करते हैं। यही वजह है कि हंगामा होने के बाद मेरठ पहुँचे चंद्रशेखर आजाद ने मृतका के परिवार से मिलने की तो इच्छा जताई लेकिन रवि गौतम की गिरफ्तारी पर कुछ नहीं बोले।

वहीं SSP अविनाश पांडेय ने भी रवि गौतम की आपराधिक कुंडली सबके सामने लाकर रख दी है। उन्होंने बताया कि रवि गौतम के खिलाफ गाजियाबाद में तीन और गौतमबुद्ध नगर में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। इनमें SC/ST एक्ट का मुकदमा भी शामिल है और वह अमरोहा से जिला बदर है।

मेरठ पुलिस ने प्रदर्शन में हंगामे को बताया ‘सोची-समझी साजिश’

08 जुलाई 2026 को कलेक्ट्रेट पर हुए हंगामे में मेरठ पुलिस ने रवि गौतम समेत 7 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें गढ़मुक्तेश्वर का अंकित कुमार, नोएडा का अरविंद कुमार, मेरठ का ऋतिक कुमार, मुरादाबाद का नवनीत कुमार, मेरठ का हिमांशु सिद्धार्थ और परीक्षितगढ़ का लवि उर्फ शवि शामिल हैं।

इसी के साथ पुलिस ने 13 नामजद समेत 50 लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया था। नामजद आरोपितों में रवि गौतम, सुशील गौतम, हिमांशु सिसोदिया, सागर लिसाड़ी, लवी प्रधान, बिजेंद्र गौतम, रितिक जाटव, मोहित जाटव, हेमंत प्रधान, संजय, विजेंद्र सूद, दिग्विजय भाटी और अजय कुमार शामिल हैं।

वहीं SSP अविनाश पांडेय ने हंगामे की पुलिस, LIU और अन्य एजेंसियों से विस्तृत जाँच भी करवाई। जाँच में मिले ऑडियो, वीडियो, सीसीटवी फुटेज और सोशल मीडिया क्लिप के आधार पर पुलिस के हाथ कई सुराग लगे। पुलिस ने बताया कि कुछ अराजक तत्व भीड़ को लगातार उकसाने और प्रदर्शन को उग्र बनाने की रणनीति पर काम कर रहे थे।

पुलिस ने साजिशकर्ताओं में रवि गौतम और दिग्विजय भाटी का नाम लिया। दिग्विजय भाटी अमरोहा का रहने वाला है, जिसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) समेत 9 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। SSP अविनाश पांडेय ने बताया कि दिग्विजय भाटी अमरोहा से जिला बदर है।

मेरठ SSP अविनाश पांडेय की आलोचना नहीं, तारीफ होनी चाहिए

तो अब समझ आ गया होगा कि मेरठ SSP अविनाश पांडेय ने प्रदर्शनकारियों पर तीखे तेवर क्यों अपनाए और पुलिस वैन में घुसकर थप्पड़ क्यों बरसाए। रवि गौतम ने खुदकुशी करने का ढोंग कर प्रदर्शन को उग्र बनाने की कोशिश की, लेकिन मेरठ पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे रोक दिया। अगर ऐसा नहीं होता, तो इस प्रदर्शन का अंजाम बहुत बुरा हो सकता था। ठीक वैसा ही, जैसा इसकी साजिश रची गई थी। लेकिन मेरठ पुलिस की सजगता और सक्रियता ने मेरठ की कानून-व्यवस्था को संभाले रखा।

सोशल मीडिया पर मेरठ SSP अविनाश पांडेय को कोसते और उनके गुस्से की आलोचना करते हुए आपको कई लोग मिल जाएँगे, लेकिन उनकी अगुवाई में मेरठ की सुरक्षा व्यवस्था की तारीफ करते आपको शायद ही कोई मिलेगा। उन्होंने पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना काम किया, प्रदर्शन के पीछे छिपे अराजक तत्वों की पहचान की और उन्हें उनकी सही जगह, यानी जेल, भेज दिया। ऐसे में अविनाश पांडेय की तारीफ होनी भी चाहिए।

कुल मिलाकर, यह पूरा प्रकरण प्रदर्शन के नाम पर राजनीति चमकाने वाले नेताओं का उदाहरण था और उदाहरण उत्तर प्रदेश की सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था का भी। प्रदर्शन का उद्देश्य अपनी माँगें रखना होता है, न कि लोगों को भड़काकर सड़कें जाम करना और न ही खुदकुशी करने का ढोंग कर पुलिस पर दबाव बनाना। ये सभी चीजें किसी भी प्रदर्शन को हिंसा में तब्दील कर सकती हैं। मेरठ पुलिस ने समय रहते इसे रोक दिया, क्योंकि पहले भी देखा गया है कि दिल्ली दंगे हों या किसान आंदोलन, हर जगह इसी तरह के पैतरों का इस्तेमाल कर हिंसा भड़काने की कोशिश की गई थी।

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