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पहले बनी मस्जिद, फिर बढ़ी मुस्लिम आबादी और उसके बाद बदल गया हिंदू बहुल इलाके का नाम: पाटन में ‘झापटपरा’ हो गया ‘इस्लामपुरा’, पढ़ें ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट

इलाके में जैसे-जैसे मुस्लिम आबादी बढ़ी और डेमोग्राफी बदली, वैसे-वैसे नाम बदलना शुरू हुआ और सरकारी दस्तावेजों तक नया इस्लामी नाम पहुँच गया। स्थानीय हिंदू अब इस मामले में कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने भी जाँच की माँग की है।

गुजरात के पाटन जिले में एक हिंदू इलाके का नाम मुस्लिम आबादी ने ही बदल दिया। जानकारी के मुताबिक, पाटन जिले के हारीज वार्ड नंबर 4 के एक इलाके का नाम झापटपरा था, जिसे बदलकर अब ‘इस्लामपुरा’ कर दिया गया है। यहाँ तक कि स्थानीय लोगों के सरकारी दस्तावेजों में भी अब इलाके का नाम ‘इस्लामपुरा’ लिखा जा रहा है। इलाके में बदलती डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) की चिंता के बीच हाल ही में हिंदू संगठनों ने यह शिकायत उठाते हुए मामलातदार को आवेदन पत्र सौंपा था।

जाँच के लिए ऑपइंडिया जब मौके पर पहुँची, तो इस मामले में और भी जानकारियाँ सामने आईं। यह हकीकत भी बाहर आई कि इलाके में जैसे-जैसे मुस्लिम आबादी बढ़ी और डेमोग्राफी बदली, वैसे-वैसे नाम बदलना शुरू हुआ और सरकारी दस्तावेजों तक नया इस्लामी नाम पहुँच गया। स्थानीय हिंदू अब इस मामले में कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। हिंदू संगठनों ने भी जाँच की माँग की है।

झापटपरा में 80 से लेकर 80 साल से रह रहे परिवारों ने ऑपइंडिया को बताया कि इलाके का नाम बरसों से ‘झापटपरा’ ही चला आ रहा है और पुराने दस्तावेजों में भी यही नाम देखने को मिलता है।

एक स्थानीय निवासी ने बताया, “हमारे बाप-दादाओं के समय से झापटपरा नाम चल रहा है। लेकिन अब दस्तावेजों में नाम बदल गया है। कोई नया दस्तावेज बनाने जाए, नया आधार कार्ड बनाए तो अब ‘इस्लामपुरा’ लिखा हुआ आता है। ऐसा क्यों हुआ, यह हमें नहीं पता।”

स्थानीय लोग कह रहे हैं कि उनके इलाके का एक ही नाम है और वह है झापटपरा। इस्लामपुरा नाम पहले कहीं था ही नहीं, लेकिन पिछले 10-12 सालों में जैसे ही मुस्लिम आबादी बढ़ी, वैसे ही यह नया नाम घुसा दिया गया।

मस्जिद बनते ही बढ़ने लगी आबादी, फंडिंग कहाँ से आई?

स्थानीय लोगों के अनुसार, साल 2011 में इलाके में मुस्लिम परिवारों के सिर्फ 20-25 घर थे। ये सभी मजदूरी का काम करते हैं। लेकिन कुछ समय पहले यहाँ एक मस्जिद का निर्माण किया गया। साथ ही एक मदरसा भी बना।

इलाके के हिंदुओं का एक सवाल यह भी है कि जो मस्जिद बनाई गई थी, उसके लिए इतनी फंडिंग कहाँ से आई। क्योंकि मस्जिद के निर्माण तक जितने परिवार रहते थे, उनमें से किसी की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वे लाखों रुपये इकट्ठे करके इतनी बड़ी इमारत बना सकें। स्थानीय लोगों और संगठनों को आशंका है कि मस्जिद निर्माण के लिए बाहर से भी फंडिंग आई हो सकती है।

इस मस्जिद के बनने के बाद धीरे-धीरे मुस्लिम घर बढ़ने लगे और आज लगभग 200 से 300 के करीब मुस्लिम परिवार इस इलाके में रहते हैं।

आबादी जैसे ही बढ़ी, वैसे ही मुस्लिमों ने पहले आपस में इलाके को ‘इस्लामपुरा’ कहना शुरू किया और उसके बाद सरकारी दस्तावेजों में भी यही लिखवाना शुरू कर दिया। इसके बाद स्थानीय हिंदुओं के दस्तावेजों में ही ‘झापटपरा’ की जगह ‘इस्लामपुरा’ ने ले ली। इसके अलावा इलाके की मौजूदा आबादी में से ज्यादातर लोगों के बाहरी राज्यों (गुजरात से बाहर के राज्यों) के होने की जानकारी मिली है।

पुराने दस्तावेजों और पालिका के रिकॉर्ड में चल रहा है ‘झापटपरा’

ऑपइंडिया ने स्थानीय लोगों के पास जाकर जब उनके सरकारी दस्तावेज देखे, तो पता चला कि 70-80 साल के बुजुर्गों के बरसों पहले बने दस्तावेजों में ‘झापटपरा’ लिखा हुआ था और ‘इस्लामपुरा’ का कहीं कोई जिक्र नहीं था। लेकिन बाद में जो दस्तावेज बने या अपडेट हुए, उनमें ‘इस्लामपुरा’ कर दिया गया और ‘झापटपरा’ गायब हो गया। एक नहीं बल्कि कई व्यक्तियों के दस्तावेजों में यही पैटर्न देखने को मिला है।

जबकि नगरपालिका के आधिकारिक दस्तावेजों में कहीं भी ‘इस्लामपुरा’ नहीं लिखा गया है और हर जगह ‘झापटपरा’ नाम ही चल रहा है।

इस दौरान मस्जिद के पास एक मुस्लिम व्यक्ति भी मिला। आबिद नाम का यह शख्स ऑपइंडिया से बातचीत में स्वीकार करता है कि इलाके का नाम झापटपरा है, लेकिन अब यह इस्लामपुरा के रूप में जाना जाता है। हालाँकि साथ ही वह कहता है कि उसे ज्यादा जानकारी नहीं है कि नाम किस तरह बदला, लेकिन इलाके में मुस्लिमों के रहने के कारण इसे ‘इस्लामपुरा’ के तौर पर जाना जाता है।

स्थानीय हिंदुओं का कहना है कि आपस में मुस्लिम चाहे किसी भी नाम से इलाके को पुकारते हों, उससे आधिकारिक तौर पर नाम नहीं बदल जाता और सरकारी दस्तावेजों में उसे नहीं लिखा जा सकता। वहीं एक व्यक्ति ने बताया कि उनके इलाके में पहले मुस्लिमों के कुछ ही घर थे, लेकिन अब वे बढ़ गए हैं। जिसके कारण हिंदू घर बेचकर जा रहे हैं। उन्होंने इलाके में ‘अशांत धारा’ (डिस्टर्बड एरिया एक्ट) लागू करने की भी माँग की।

यहाँ देखें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट

साजिश रचने वालों के खिलाफ की जाए कार्रवाई: विश्व हिंदू परिषद

इस पूरे मामले में हिंदू संगठनों ने कानूनी कार्रवाई की माँग की है। हारीज नगर विश्व हिंदू परिषद के मंत्री रवि प्रजापति ने कहा, “हमने एक हफ्ते पहले मामलातदार को आवेदन पत्र सौंपकर इलाके के सभी लोगों के दस्तावेजों में सुधार करके इलाके का नाम फिर से झापटपरा करने की माँग की है। साथ ही जिन अधिकारियों या स्थानीय मुस्लिमों ने साजिश के तहत इलाके का नाम बदलने की कोशिश की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। आवेदन पत्र में हमने भी ऐसी ही माँग की है।”

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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લિંકન સોખડિયા
લિંકન સોખડિયા
Journalist | Editor | Multimedia Producer Bridging the gap between ground reality and digital storytelling. Specializing in hard-hitting regional news, investigative reports, and high-impact digital media production.

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