पेपर लीक मामले में छात्रों के नाम पर महीनों तक सियासत चमकाने और अंततः वहाँ पूरी तरह फेल रहने के बाद कॉन्ग्रेस ने अब संसद के मॉनसून सत्र से पहले अपनी राजनीति को जीवित रखने के लिए एक नया तमाशा खड़ा करने की कोशिश शुरू कर दी है। अयोध्या के राम मंदिर चंदा चोरी केस को लेकर अब कॉन्ग्रेस की नींद टूटी है, जब उस मामले पर जाँच अपने अंतिम दौर में पहुँच चुकी है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संयुक्त पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। ध्यान देने वाली बात है कि इन्होंने मॉनसून सत्र से ठीक पहले ये चिट्ठी लिखी है, ताकि इस सत्र में भी देश के बाकी मुद्दों को साइड कर इस संवेदनशील मुद्दे पर हंगामा खड़ा कर सकें।
"Your silence now in the face of such a crime is unacceptable. It is your duty to ensure accountability and restitution."
— Congress (@INCIndia) July 19, 2026
Congress President Shri @kharge and LoP Shri @RahulGandhi wrote a letter to PM Modi demanding an independent and comprehensive investigation into the… pic.twitter.com/naLVTH8aFH
राजनीतिक लाभ के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था पर चोट
यह कोई पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने का प्रयास किया हो, लेकिन इस बार उसने सीधे तौर पर करोड़ों राम भक्तों की श्रद्धा को अपने सियासी एजेंडे का मोहरा बना लिया है। पीएम मोदी को लिखे गए पत्र में राहुल गाँधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “आप राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हजारों करोड़ रुपए की चोरी से वाकिफ हैं। जिन लाखों श्रद्धालुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई, श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ दान की थी, वो इस चोरी से खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।”
पेपर लीक मामले में सरकार को घेरने में नाकाम रहने के बाद जनता का ध्यान भटकाने और देश का सियासी पारा गरमाने के लिए कॉन्ग्रेस ने जानबूझकर इस संवेदनशील विषय को चुना है। चिट्ठी के जरिए कॉन्ग्रेस ने न केवल सरकार पर हमला बोला है बल्कि हमेशा की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) को भी लपेटे में ले लिया है।
पत्र में विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उन्होंने खुद सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर संसद में इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी लेकिन इसके सदस्यों की नियुक्ति में पक्षपात किया गया। राहुल और खरगे ने पत्र में साफ तौर पर लिखा है, “ये सार्वजनिक रूप से सभी को पता है कि ट्रस्ट के सदस्य RSS, VHP और उनसे जुड़े संगठनों से जुड़े हैं। इसके कलंकित पूर्व महासचिव भी आपके करीबी सहयोगी रहे हैं।”
इस तरह के बयानों से यह साफ झलकता है कि कॉन्ग्रेस का वास्तविक मकसद किसी जाँच से ज्यादा वैचारिक रूप से जुड़े संगठनों की छवि को धूमिल करना है।
क्या है कॉन्ग्रेस की बेवजह की 3 मुख्य माँगे? सीएम योगी पहले गठित कर चुके हैं SIT
अपनी राजनीति को धार देने के लिए कॉन्ग्रेस ने इस मामले में तीन बड़ी माँगें सामने रखी हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपनी ‘चुप्पी’ तोड़ने को कहा है। पत्र में लिखा गया है, “इतने बड़े अपराध के सामने आपकी मौजूदा चुप्पी बर्दाश्त से बाहर है। जवाबदेही और नुकसान की भरपाई तय करना आपका फर्ज है।”
इसके साथ ही दोनों नेताओं ने सीधे तौर पर माँग उठाई है कि वे तुरंत ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र और व्यापक जाँच का आदेश दें जिसमें नकद, सोना और चाँदी सहित सभी चढ़ावों का प्रबंधन भी शामिल होना चाहिए। इतना ही नहीं कॉन्ग्रेस नेताओं ने कहा है कि इस जाँच के नतीजे और ट्रस्ट के खाते पूरी तरह सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
ऐसा इसलिए ताकि हर श्रद्धालु को यह पता चल सके कि उनके चढ़ावे का इस्तेमाल कैसे किया गया है और इस पूरे मामले में जो भी लोग जिम्मेदार पाए जाएँ, उनके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना उन्हें सख्त रूप से जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। बता दें कि मामला संज्ञान में आने के बाद यूपी की योगी सरकार ने 13 जून 2026 को ही SIT का गठन किया था।
इस टीम की अध्यक्षता लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत (IAS) को दी गई थी। उनके साथ पुलिस स्तर पर जाँच की जिम्मेदारी आईजी रेंज किरन एस (IPS) को सौंपी गई थी, जो मामले के आपराधिक पहलू और सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों की भी जाँच कर रहे थे।
वहीं, वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को दान राशि, ऑडिट और सभी वित्तीय प्रक्रियाओं की तकनीकी जाँच की जिम्मेदारी दी गई थी।
आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर: राहुल गाँधी
प्रधानमंत्री को आधिकारिक पत्र भेजने के साथ ही राहुल गाँधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस मुद्दे को लेकर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने लिखा, “प्रधानमंत्री जी, श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की – वहाँ हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है। ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था।”
प्रधानमंत्री जी,
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) July 19, 2026
श्री राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की – वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है।
ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।
तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक… pic.twitter.com/HJ4flHrks1
उन्होंने लिखा, “इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है। तत्काल स्वतंत्र जाँच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए। आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।”
हालाँकि कॉन्ग्रेस इस मामले में जिस प्रकार का तमाशा खड़ा करने की कोशिश कर रही है, उसकी हवा पहले ही निकल चुकी है क्योंकि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस अनियमितता की भनक लगते ही बेहद मुस्तैदी दिखाई थी। यूपी सरकार ने पिछले महीने 13 जून को ही इस पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया था।
सोशल मीडिया पर उड़ीं अफवाहों का सच आ चुका है सामने
अपनी जाँच के दौरान SIT ने सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों पर चल रही उन खबरों का भी बारीकी से संज्ञान लिया था, जिनमें करोड़ों के चढ़ावे और बहुमूल्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप सीधे ट्रस्ट पर लग रहे थे। इसमें मुख्य रूप से तीन बड़ी खबरें थीं।
पहली खबर इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के उत्तर भारत के प्रमुख अनुराग रस्तोगी और सराफा एसोसिएशन द्वारा 38kg और 22 Kg से ज्यादा की चाँदी की ईंटें दान करने और उनके गायब होने से जुड़ी थी। दूसरी खबर विश्व सिंधी सेवा समाज के अध्यक्ष राजू मंडवानी द्वारा बिना रसीद के 200Kg चाँदी की ईंटें भेंट करने के दावे की थी।
तीसरी खबर मुंबई के व्यवसायी अनिल विश्वकर्मा के चाँदी के हार और चरण पादुकाओं को लेकर थी। ऑपइंडिया के पास मौजूद SIT रिपोर्ट के अनुसार, जब ट्रस्ट के बही-खातों और रिकॉर्ड का मिलान किया तो पाया कि सराफा संगठनों की चाँदी को तय प्रक्रिया के तहत गलाकर बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा गया है।
वहीं सिंधी समाज और मुंबई के व्यवसायी का सारा सामान भी ट्रस्ट की सुरक्षित अभिरक्षा में मिला। इस तरह सोशल मीडिया के ट्रस्ट पर लगाए आरोप पूरी तरह झूठे साबित हुए, लेकिन SIT ने यह जरूर कहा कि भविष्य में ऐसी अफवाहों से बचने के लिए प्रबंधन व्यवस्था को और मजबूत तथा जवाबदेह बनाने की सख्त जरूरत है।
ऐसे में जब राज्य सरकार पहले ही कड़े कदम उठा चुकी है, तब कॉन्ग्रेस द्वारा पीएम मोदी की सीधी दखल की माँग करना और पत्र का आखिरी हिस्सा, “आपकी सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी पारदर्शिता और तेजी से काम करते हैं” लिखना केवल अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने का जरिया मात्र दिखाई देता है।


