देश में छात्रों और बेरोजगार युवाओं के नाम पर शुरू हुआ ‘कॉकरोच आंदोलन’ अब अपने मूल उद्देश्यों से भटकता दिख रहा है। जिन युवाओं ने रोजगार, निष्पक्ष परीक्षाओं और शिक्षा सुधारों को लेकर आवाज उठाई थी, उनके मंच पर अब राजनीतिक दलों का कब्जा, वैचारिक जंग और आपत्तिजनक नारों का बोलबाला हो चुका है।
देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों (खासकर सीजेआई) की टिप्पणियों के विरोध में युवाओं ने सांकेतिक रूप से ‘कॉकरोच’ (कीड़ा) शब्द को अपने आत्मसम्मान से जोड़कर एक डिजिटल अभियान शुरू किया, तो देखते ही देखते इसने पूरे देश में तूल पकड़ लिया। सड़कों पर छात्र कॉकरोच के मास्क पहनकर और हाथ में अपनी डिग्रियाँ लेकर उतरे। उनका कहना था कि यदि रोजगार माँगने वाले युवाओं को व्यवस्था ‘कीड़ा-मकोड़ा’ समझती है, तो वे इसी पहचान के साथ सरकार से जवाब माँगेंगे।
इनकी शुरुआती माँगें थी-
- NEET-UG और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई धाँधली व पर्चा लीक मामलों पर सख्त कार्रवाई
- केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की जवाबदेही और सुधार के साथ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा
- पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और युवाओं के लिए गारंटीकृत रोजगार के अवसर
लेकिन जैसे-जैसे यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर से निकलकर राज्यों की राजधानियों और प्रमुख शहरों तक फैला, इसकी दिशा पूरी तरह बदल गई। सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पीछे छूट गई और सड़कों पर सियासी दलों के कार्यकर्ताओं ने जमकर सियासी रोटियाँ सेंकी। जो आज भी जारी है।
कॉकरोचों के नाम पर राजनीतिक दलों ने सेंकी सियासी रोटियाँ
महाराष्ट्र, गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, केरल और मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में हुए इन प्रदर्शनों में छात्रों की उपस्थिति कम होती गई और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बैनर ज्यादा दिखाई देने लगे।
महाराष्ट्र में मुंबई से लेकर पुणे, नागपुर और संभाजीनगर तक प्रदर्शन
महाराष्ट्र में आंदोलन की तीव्रता सबसे अधिक देखी गई, जहाँ छात्र संगठनों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के कैडर भी सड़कों पर उतर आए। महाराष्ट्र के मुंबई, पुणे, छत्रपति संभाजीनगर, नागपुर जैसे शहरों में महाविकास आघाड़ी दल में शामिल एनसीपी-एसपी, शिवसेना-UBT के साथ ही वामपंथी छात्र संगठन, किसान संगठन भी इसमें शामिल हो गए।
मुंबई में राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और युवा सेना (UBT) के कार्यकर्ताओं ने मुंबई विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर विरोध-प्रदर्शन किया। पुलिस ने परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए हल्का बल प्रयोग किया।
खुद शिवसेना-यूबीटी के नेता उद्धव ठाकरे मैदान में उतरे और उन्होंने मंच से प्रदर्शन की कमान संभाली। पार्टी ने सार्वजनिक तौर पर सीजेपी का समर्थन किया है।
सत्तेला चिकटलेला ‘गोचीड’ आपल्याला खेचून काढावाच लागेल. pic.twitter.com/PMzuHEKYkI
— ShivSena – शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) July 20, 2026
यहाँ शिवसेना-यूबीटी के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ की, जिसके बाद मुंबई पुलिस ने कार्रवाई भी की। इस हंगामे के दौरान 70 से अधिक लोगों को डिटेन भी किया गया था, जिसमें अधिकाँश छात्र बताए गए, हालाँकि शिवसेना-यूबीटी के नेताओं ने उन्हें पुलिस की हिरासत से छुड़ा लिया। वहीं, पार्टी ने दावा किया कि 150+ लोगों को डिटेन किया गया था।
दादर चैत्यभूमी येथे आंदोलनासाठी आलेल्या दीडशेहून अधिक विद्यार्थ्यांना पोलिसांनी ताब्यात घेतले.
— ShivSena – शिवसेना Uddhav Balasaheb Thackeray (@ShivSenaUBT_) July 20, 2026
माहीम पोलीस ठाण्यात धाव घेत शिवसेना (उद्धव बाळासाहेब ठाकरे) पक्षाने विद्यार्थ्यांची सुटका करून त्यांना दिलासा दिला. pic.twitter.com/9nJdCyH2qS
मुंबई और महाराष्ट्र में एनसीपी-शरद पवार की पार्टी ने भी जमकर हंगामा किया।
— Nationalist Congress Party – Sharadchandra Pawar (@NCPspeaks) July 21, 2026
एनसीपी-शरद पवार ने खुलकर सीजेपी का समर्थन भी किया।
मुंबई विद्यापीठाच्या प्रवेशद्वारावर सनदशीर आणि शांततापूर्ण मार्गाने आंदोलन करणाऱ्या राष्ट्रवादी युवक काँग्रेस शरदचंद्र पवार पक्षाचे मुंबई अध्यक्ष ॲड. अमोल मातेले आणि त्यांच्या सहकाऱ्यांवर पोलिसांकडून झालेल्या अमानुष कारवाईचा आम्ही तीव्र शब्दांत निषेध करतो.
— Nationalist Congress Party – Sharadchandra Pawar (@NCPspeaks) July 21, 2026
शांततेत घोषणा देणाऱ्या… pic.twitter.com/yglMQyGiX9
छत्रपति संभाजीनगर के क्रांति चौक पर छात्रों, स्थानीय वकीलों और विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर रास्ता जाम (चक्का जाम) कर दिया। यहाँ पुलिस के साथ धक्का-मुक्की हुई और यातायात घंटों बाधित रहा।
इसके अलावा नागपुर में जिला कलेक्टरेट कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की गई, जबकि लातूर में छात्रों ने सांकेतिक रूप से डिग्रियाँ जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
FTII पुणे में भी प्रदर्शन
पुणे में फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट आफ इंडिया (FTII) के छात्र संघ ने कैंपस के भीतर और बाहर मार्च निकाला और सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल व CJP की माँगों का समर्थन किया।
Students from the Film and Television Institute of India (FTII) held a demonstration on campus in Pune to voice their grievances over ongoing educational policy shifts and administrative disputes. Raising slogans against the central government, the student body demanded the… pic.twitter.com/TOXmF7TKtP
— Pune Mirror (@ThePuneMirror) July 20, 2026
गुजरात में भी खूब हुई सियासत
गुजरात के अहमदाबाद, बड़ौदा में आम आदमी पार्टी (AAP) युवा मोर्चा, स्थानीय नेताओं ने सरकार विरोधी हाई-वोल्टेज ड्रामा करते हुए गिरफ्तारियाँ दी हैं।
अहमदाबाद में लॉ गार्डन और एलिस ब्रिज के पास ‘संसद चलो’ मार्च और सोनम वांगचुक के समर्थन में विरोध प्रदर्शन कर रहे 150 से अधिक छात्रों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई बिना अनुमति के इकट्ठा होने और धारा 1 के तहत निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के कारण की गई थी।
दिल्ली में कॉन्ग्रेस और AAP में श्रेय लेने की होड़
दिल्ली में राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के साथ ही मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रदर्शन की कमान संभाली और पीएम आवास तक मार्च किया। हालाँकि इसका आम आदमी पार्टी ने तीखा विरोध किया।
𝐖𝐞 𝐬𝐭𝐚𝐧𝐝 𝐰𝐢𝐭𝐡 𝐬𝐭𝐮𝐝𝐞𝐧𝐭𝐬, 𝐚𝐧𝐝 𝐰𝐞 𝐰𝐢𝐥𝐥 𝐟𝐢𝐠𝐡𝐭 𝐮𝐧𝐭𝐢𝐥 𝐞𝐯𝐞𝐫𝐲 𝐬𝐭𝐮𝐝𝐞𝐧𝐭 𝐠𝐞𝐭𝐬 𝐣𝐮𝐬𝐭𝐢𝐜𝐞. pic.twitter.com/4Jn5VsL8nj
— Congress (@INCIndia) July 21, 2026
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और नेता संजय सिंह ने राहुल गाँधी पर सरकार का एजेंट होने का आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के कहने पर राहुल गाँधी इस तरह के प्रदर्शन में शामिल हुए हैं।
CJP के धरने को कमजोर करने के लिए मोदी जी ने @RahulGandhi को अपने आवास पर धरने पर बिठा दिया।
— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) July 21, 2026
आजाद समाज पार्टी के चंद्रशेखर और उनके समर्थकों ने मचाया हंगामा
दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हिंसा के मामले में सांसद चंद्रशेखर आजाद पर बड़े आरोप लगे हैं। चंद्रशेखर के साथ 8000 से 10000 लोग जय सिंह रोड पर इकट्ठा होकर संसद जाने की कोशिश कर रहे थे। पब्लिक के लिए रास्ता ब्लॉक कर दिया था। चंद्रशेखर के समर्थकों ने कॉपरेटिव सोसाइटी की टाइल पत्थर तोड़कर हमला किया, काँच की बोतलों से हमला किया, जूतों से हमला किया, पत्थर मारे।
जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के साथ ही AISA ने भी ताना था टेंट
जंतर-मंतर पर लंबे समय से कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले लोगों को बुलाया जा रहा था, तो दूसरी तरफ उस प्रोटेस्ट को संभालने की जिम्मेदारी AISA जैसे वामपंथी स्टूडेंट यूनियन ने उठा रखी थी। ताकि CJP के प्रदर्शन में राजनीति भी जमकर की जा सके और प्रदर्शन को गैर-राजनीतिक भी साबित किया जा सके। हालाँकि वांगचुक के साथ ही आईसा के भी 3 मेंबर्स भूख हड़ताल पर बैठे थे, लेकिन सोनाम के मोर्च से हटने के बाद वो सामने आए। अभी तक वो अपेक्षाकृत लो-प्रोफाइल तरीके से पूरे प्रदर्शन को मैनेज करने वाले रोल में रहे। ये अलग बात है कि ‘डफली गैंग’ के एक्सपोज होने के साथ ही दोनों का कनेक्शन भी एक्सपोज हो गया था।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का CJP को खुला समर्थन, प्रदर्शन में शामिल होने का ऐलान
पश्चिम बंगाल के कोलकाता, जादवपुर में तृणमूल छात्र परिषद (TMCP), CPIM समर्थित संगठनोंने केंद्रीय एजेंसियों के खिलाफ नारेबाजी और राजनीतिक बयानबाजी करते हुए प्रदर्शन किए।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने दिल्ली में CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च को अपना खुला समर्थन दिया है। उन्होंने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि उनकी पार्टी इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़ी है और जरूरत पड़ने पर वे खुद भी प्रदर्शन में शामिल होंगी।
कर्नाटक में भी प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प
बेंगलुरु में वामपंथी छात्र संगठनों और CJP समर्थकों ने फ्रीडम पार्क में रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों की पुलिस के साथ बहस हुई जब उन्होंने राजभवन की ओर मार्च करने का प्रयास किया। कॉन्ग्रेस शासित पुलिस ने इन प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचला और तुरंत इन्हें तितर-बितर करने में देरी नहीं लगाई।
केरल में पुलिस कार्रवाई और वॉटर कैनन का प्रयोग
केरल के तिरुवनंतपुरम और कोच्चि में CPM-समर्थित छात्र संगठनों (SFI और DYFI) ने प्रदर्शन को अपने वैचारिक एजेंडे की दिशा में मोड़ने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने जब सचिवालय की ओर बढ़ने की कोशिश की और सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़े, तो स्थिति हिंसक हो गई।
केरल की कॉन्ग्रेस सरकार ने इन प्रदर्शनों को बेदर्दी से कुचलने में कोई देरी नहीं की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर वॉटर कैनन (जल बौछार) और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया, जिससे कई कार्यकर्ता घायल हुए।
#WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala: Police used water cannons to disperse the SFI workers demanding the resignation of Union Education Minister Dharmendra Pradhan over the issue of the NEET paper leak pic.twitter.com/eaa0DPdKlj
— ANI (@ANI) July 20, 2026
गोवा में NGO लॉबी ने निकाला कैंडल लाइट मार्च
गोवा में गैर-सरकारी संगठन (NGO) ‘उजवाड’ के बैनर तले राजधानी पणजी में एक कैंडललाइट मार्च निकाला गया। मार्च में शामिल लोगों ने शिक्षा क्षेत्र में फैली कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के मामलों पर सरकार की खिंचाई की।
MP में भी CJP के नाम पर सरकार विरोधी प्रदर्शन
देश के कई अन्य राज्यों की तरह ही मध्य प्रदेश के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। कहीं राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता छात्र बनकर प्रदर्शन करते नजर आए, तो कहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने व्यवस्था सुधार के नाम पर मोर्चा संभाला। मध्य प्रदेश में राजधानी भोपाल से लेकर खरगोन जिले तक ये प्रदर्शन हुए।
दरअसल, आगामी स्थानीय और राज्यस्तरीय चुनावों को देखते हुए विपक्षी दलों को छात्रों का यह गुस्सा एक तैयार वोट बैंक की तरह दिखा। NSUI, समाजवादी छात्र सभा और SFI जैसे संगठनों ने आंदोलन के मंचों पर कब्जा कर लिया, जिससे आम और गैर-राजनीतिक छात्र धीरे-धीरे किनारे होते चले गए।
जो आंदोलन कभी देश भर के करोड़ों बेरोजगार और प्रताड़ित छात्रों की बुलंद आवाज बनकर उभरा था, वह आज राजनीतिक रैलियों और टीवी बहसों का महज एक मसाला बनकर रह गया है। नेताओं ने इस मंच का इस्तेमाल एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने और राजनीतिक रोटियाँ सेकने के लिए तो खूब किया, लेकिन नतीजा यह रहा कि छात्र आज भी वहीं खड़े हैं हाथ में अपनी डिग्रियाँ लिए, अगली परीक्षा की तारीख और एक पारदर्शी तंत्र के इंतजार में।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में छात्र आंदोलनों का भटकना कोई नई बात नहीं है। जब भी युवाओं का कोई स्वतःस्फूर्त आंदोलन खड़ा होता है, राजनीतिक पार्टियां उसमें अपना फायदा ढूँढने लगती हैं। ‘कॉकरोच आंदोलन’ भी उसी सियासत का शिकार हो गया।


