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गुजरात में मकबूल-मुबारक ने हिंदू श्मशान भूमि को कब्जाने के लिए परिजन को दफनाया, जाँच के बाद HC ने कब्रिस्तान में कराया शिफ्ट: 4 साल पहले भी की थी हरकत

मुस्लिम परिवार ने गुजरात हाईकोर्ट को बताया कि कब्रिस्तान खाली था। जाँच करने पर पता चला कि वहाँ जगह है। जिसके बाद कोर्ट ने मुस्लिम परिवार को कब्रिस्तान में शव को दफनाने का आदेश दिया। 10 दिन बीत जाने पर प्रशासन ने कब्रिस्तान में शव को दफनाया

भावनगर के गरियाधर जिले के एक गाँव में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब एक मुस्लिम व्यक्ति के शव को हिंदू श्मशान घाट के पास विवादित भूमि में दफना दिया गया। गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए शव को स्थानांतरित करने का आदेश दिया।

मुस्लिम परिवार ने कोर्ट के आदेश के बावजूद जब कब्र को नहीं हटाया, तो 27 जुलाई 2026 को अधिकारियों ने कड़ी सुरक्षा के बीच शव को विवादित भूमि से हटाकर कब्रिस्तान में स्थानांतरित कर दिया ।

आखिर मामला क्या है?

यह पूरा विवाद 11 जून 2026 को शुरू हुआ। गरियाधर तालुका के रूपावती गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति की मृत्यु हो गई। उसके बाद परिजनों ने शव को गाँव के कब्रिस्तान में नहीं दफनाया, बल्कि हिंदू श्मशान घाट के पास एक विवादित जमीन में दफना दिया

हालाँकि गाँव के कब्रिस्तान में पर्याप्त जगह मौजूद था, लेकिन श्मशान घाट से सटे जमीन पर उसे सुपुर्द ए खाक किया गया। इस पर स्थानीय हिंदू ग्रामीणों ने आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि जानबूझकर गाँव की शांति भंग करने के लिए ये किया गया।

ग्रामीणों के विरोध की वजह से मामला गरियाधर तालुका पुलिस स्टेशन तक पहुँचा। ग्रामीणों ने शव को हटाने का अनुरोध किया। इसी बीच, सरपंच की शिकायत के आधार पर गरियाधर पुलिस स्टेशन में मकबूल, मुबारक, रजाक, अल्ताफ आदि के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 196, 298, 301, 11 और 189 के तहत मामला दर्ज किया गया।

ग्राम पंचायत ने मुस्लिम परिवार को नोटिस जारी कर यह स्पष्टीकरण माँगा कि गाँव में कब्रिस्तान होने के बावजूद विवादित भूमि का उपयोग क्यों किया जा रहा है। नोटिस में यह भी कहा गया कि यदि पंचायत को संतोषजनक उत्तर नहीं मिला, तो शव को विधिवत तरीके से कब्रिस्तान में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

इसी बीच मुस्लिम पक्ष ने विवादित भूमि को मुस्लिम कब्रिस्तान के रूप में मान्यता देने के लिए पालीताना के डिप्टी कलेक्टर के समक्ष याचिका दायर की थी, लेकिन यह याचिका खारिज कर दी गई। इसके विरोध में मुस्लिम परिवार ने गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया और ग्राम पंचायत के नोटिस और डिप्टी कलेक्टर के फैसले को चुनौती दी।

मुस्लिम पक्ष ने कहा कि कब्रिस्तान फूलों से भरा हुआ है। इस पर कोर्ट ने जाँच का आदेश दिया, लेकिन यह दावा झूठा निकला। याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालय के समक्ष दावा किया कि पुराने वडोदरा राज्य के गायकवाड़ी राजस्व अभिलेखों के अनुसार, विवादित भूमि का कुछ हिस्सा पहले दफनाने के काम आता था, लेकिन बाद में वह उल्लेख हटा दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा कब्रिस्तान भरा हुआ था, इसलिए उन्हें विवादित भूमि पर दफन करना पड़ा।

इन दलीलों के बाद, उच्च न्यायालय ने राजस्व और पंचायत विभागों को घटनास्थल की जाँच करने का आदेश दिया। जाँच के बाद उच्च न्यायालय को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया कि गाँव का आधिकारिक मुस्लिम कब्रिस्तान लगभग 700 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है, जो एक चारदीवारी से घिरा हुआ है और इसका लगभग आधा हिस्सा अभी भी खाली है।

इस रिपोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के दावे को गलत साबित कर दिया और यह भी स्पष्ट कर दिया कि कब्रिस्तान में पर्याप्त जगह उपलब्ध होने के बावजूद, शव को विवादित भूमि पर स्थित हिंदू श्मशान घाट के पास दफनाया गया था। इसलिए न्यायालय ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

पहले भी विवादित जमीन पर दफनाने का मामला सामने आया था

जाँच में पता चला कि रूपावती गाँव में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है। करीब तीन-चार साल पहले 2021-22 में, इसी परिवार ने अपने एक मृत सदस्य को इसी विवादित जमीन पर दफनाया था। उस समय भी स्थानीय हिंदू समुदाय ने विरोध जताया था।

विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिस की मौजूदगी में दोनों समुदायों के लोगों के बीच एक बैठक हुई, जिसके बाद शव को निकालकर मूल कब्रिस्तान में ले जाया गया। यह लिखित गारंटी भी दी गई कि भविष्य में श्मशान घाट के पास किसी भी स्थान पर कोई दफन नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद हाल ही में ऐसी ही एक घटना हुई थी।

अदालत ने शव को हटाने का आदेश दिया, लेकिन 10 दिनों तक कोई कार्रवाई नहीं होने के बाद प्रशासन ने शव को कब्रिस्तान में दफनाने की काम किया।

इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने मुस्लिम परिवार की याचिका खारिज करते हुए कहा कि जब मुस्लिम समुदाय के लिए आधिकारिक कब्रिस्तान उपलब्ध है और वहाँ पर्याप्त जगह है, तो सार्वजनिक या विवादित भूमि पर मनमाने ढंग से कब्र को दफन नहीं किया जा सकता।

पहले की घटनाओं का हवाला देते हुए न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम परिवार ने शव को स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती नहीं दी थी और अब चार साल बाद फिर वे अपनी मर्जी से विवादित भूमि पर कब्र को दफन कर फैसले का उल्लंघन कर रहे हैं।

अपने आदेश में अदालत ने कहा कि अगर कब्रिस्तान थोड़ा दूर होता या परिवार वहाँ नहीं पहुँच पाता, तो अदालत इस पर विचार करती, लेकिन यहाँ प्रशासन की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि ऐसी कोई स्थिति नहीं थी, इसलिए इस तरह के दफन की अनुमति नहीं दी जा सकती।

गुजरात हाईकोर्ट ने 13 जुलाई 2026 को याचिकाकर्ताओं को आदेश दिया कि परिवार 10 दिनों के भीतर शव को कब्रिस्तान में दफन करें। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि परिवार निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्रवाई नहीं करता है, तो राज्य सरकार और पंचायत व्यवस्था न्यायालय के आदेश को लागू कर सकती है।

न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि यदि शव को ले जाना आवश्यक हो, तो यह पूर्ण धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ और मृतक की गरिमा का ध्यान रखते हुए किया जाना चाहिए।

उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी याचिकाकर्ता मुस्लिम परिवार ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद 27 जुलाई 2026 को गरियाधर के पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुँचकर शव को विवादित स्थल से हटाकर कब्रिस्तान में स्थानांतरित कर दिया। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की गई।

उच्च न्यायालय के निर्देश के मुताबिक स्थानीय प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग की। शव को विवादित स्थल से निकालकर रूपावती गाँव के मूल कब्रिस्तान में सभी रीति-रिवाजों के साथ दफनाया गया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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