पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के नेताओं की दबंगई और आपराधिक कारनामों पर कानून का शिकंजा कसना शुरू हो गया है। उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी विधानसभा क्षेत्र से TMC के पूर्व विधायक सनत डे को पुलिस ने शनिवार (8 अगस्त) को गिरफ्तार कर लिया है।
सनत डे पर इलाके में संगठित रूप से जबरन वसूली का सिंडिकेट चलाने, अवैध रूप से लोगों की जमीनों पर कब्जा करने, साल 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद हुए भीषण राजनीतिक खून-खराबे और बीजेपी कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमलों में शामिल होने के गंभीर आरोप हैं।
Naihati, West Bengal: Former TMC MLA from Naihati, Sanat Dey, has been arrested by Naihati police on charges of various acts of corruption pic.twitter.com/bFiBI9TuiA
— IANS (@ians_india) August 8, 2026
पुलिस की कई टीमें लंबे समय से सनत डे की तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही थीं। आखिरकार शनिवार (8 अगस्त 2026) को पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर उत्तर 24 परगना के दत्तपुकुर इलाके में एक ठिकाने पर दबिश देकर उसे धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद उसे नैहाटी थाने लाया गया और फिर बैरकपुर उपमंडलीय अदालत में पेशी के लिए ले जाया गया।
दत्तपुकुर के गुप्त ठिकाने से नाटकीय गिरफ्तारी और पुलिस स्टेशन पर फूटा जनआक्रोश
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सनत डे के खिलाफ नैहाटी और आसपास के थानों में पिछले कई महीनों से रंगदारी, मारपीट और डराने-धमकाने की दर्जनों शिकायतें पेंडिंग थीं। जब पुलिस की टीमों ने उनके घर और संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू की तो वे पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए थे। लेकिन शनिवार की सुबह दत्तपुकुर में पुलिस ने घेरकर गिरफ्तार कर लिया।
जैसे ही सनत डे को पुलिस गाड़ी में बैठाकर नैहाटी थाने लेकर पहुँची, वहाँ का माहौल पूरी तरह गरमा गया। लंबे समय से उनके अत्याचारों से पीड़ित स्थानीय लोग और बीजेपी कार्यकर्ता थाने के बाहर जमा हो गए।
जब पुलिस उसे गाड़ी से उतारकर अंदर ले जा रही थी, तो भीड़ ने ‘चोर-चोर’ के जोरदार नारे लगाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। सनत डे के खिलाफ इलाके में गुस्सा इतना गहरा था कि कुछ महीने पहले जब वो नैहाटी के विजयनगर में एक दफ्तर का उद्घाटन करने पहुँचे थे, तो जनता ने उस पर सरेआम अंडे फेंके थे और काले झंडे दिखाए थे।
2021 की खूनी पोस्ट-पोल वायलेंस और बीजेपी कार्यकर्ताओं पर बर्बर अत्याचार
पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद राज्यभर में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा जो हिंसा की गई थी, सनत डे को नैहाटी क्षेत्र में उसका मुख्य सूत्रधार माना जाता है। चुनाव खत्म होते ही बीजेपी के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के घरों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया, दुकानें लूटी गईं और परिवारों को बेघर कर दिया गया।
बीजेपी महिला मोर्चा की स्थानीय नेता जिनिया चक्रवर्ती ने सनत डे की गिरफ्तारी पर बताया कि केवल बीजेपी से जुड़े होने के कारण 2021 के चुनावों के बाद उनके घर पर TMC के गुंडों ने कई बार हमला किया और तोड़फोड़ की।
इलाके के दर्जनों बीजेपी कार्यकर्ताओं को अपनी जान बचाने के लिए महीनों तक जंगलों और दूसरे राज्यों में छिपकर रहना पड़ा था। सनत डे पर आरोप है कि उसने नैहाटी में विरोध की हर आवाज को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग किया और विपक्षी कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे दर्ज कराए।
बिना निवेश का धंधा: वसूली का सिंडिकेट और जमीन हड़पने का समानांतर साम्राज्य
नैहाटी और बैरकपुर का औद्योगिक इलाका लंबे समय से TMC के सिंडिकेट राज का शिकार रहा है। सनत डे पूर्व राज्य मंत्री पार्थ भौमिक का बेहद करीबी माना जाता था और वो पहले नैहाटी नगरपालिका का अध्यक्ष भी रह चुका हैं। पार्षद से लेकर विधायक बनने तक के अपने सफर में उसने इलाके में गुंडागर्दी और वसूली का एक बड़ा ताना-बाना तैयार कर लिया था।
बीजेपी नेता देबर्घ्य घोष और स्थानीय निवासियों का कहना है कि सनत डे का मुख्य काम ही व्यापारियों, बिल्डरों और आम लोगों से गुंडा टैक्स वसूलना था। विधायक बनने के बाद उसका यह अवैध कारोबार कई गुना बढ़ गया था।

जो कोई भी उसे रंगदारी देने से इनकार करता, उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया जाता था या उसके निर्माण कार्य को रोक दिया जाता था। इलाके में यह बात आम थी कि नैहाटी में कोई भी ईंट बिना सनत डे के कट (कमीशन) के नहीं रखी जा सकती थी।
2024 का उपचुनाव और 2026 में जनता का करारा जवाब
सनत डे की राजनीतिक पृष्ठभूमि देखें तो जब 2024 में पार्थ भौमिक बैरकपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर सांसद बने, तो नैहाटी विधानसभा सीट खाली हो गई। इसके बाद हुए उपचुनाव में TMC ने सनत डे को टिकट दिया और वह विधायक चुना गया। हालाँकि विधायक बनने के बाद भी उसके रवैये में कोई बदलाव नहीं आया।
लेकिन जनता के सब्र का बाँध आखिरकार टूट गया। हाल ही में संपन्न हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में नैहाटी की जनता ने सनत डे को पूरी तरह से नकार दिया। बीजेपी उम्मीदवार सुमित्रो चटर्जी ने उन्हें 10000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी।
TMC की सत्ता खिसकते ही और चुनावी नतीजों में हार मिलते ही सनत डे का राजनीतिक संरक्षण खत्म हो गया, जिसके बाद पीड़ित लोग खुलकर सामने आने लगे और पुलिस को कानूनी शिकंजा कसना पड़ा।
कमर में रस्सी बाँधकर घुमाना काफी नहीं, मिले कठोरतम सजा- मंत्री अर्जुन सिंह
सनत डे की गिरफ्तारी पर नोआपाड़ा से विधायक और राज्य सरकार के मंत्री अर्जुन सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पुलिस प्रशासन का धन्यवाद किया। अर्जुन सिंह ने साफ शब्दों में कहा, “सनत डे नैहाटी में मुख्य रूप से अवैध वसूली करने वाले व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं। विधायक बनते ही उनका यह बिना निवेश वाला धंधा और तेजी से फलने-फूलने लगा था।”
अर्जुन सिंह ने आगे कहा, “उन्हें गिरफ्तार करके पुलिस ने सही कदम उठाया है, लेकिन सिर्फ गिरफ्तार कर लेना या कमर में रस्सी बाँधकर कोर्ट ले जाना ही काफी नहीं होगा। नैहाटी की जनता ने जो अत्याचार झेला है, उसके लिए सनत डे को अदालत से कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। नैहाटी के लोग अपने ऊपर हुए अत्याचारों को कभी माफ नहीं करेंगे।”
सनत डे की गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के शासनकाल में जिस तरह से दबंगई, कट-मनी कल्चर और चुनावी हिंसा को बढ़ावा दिया गया, अब कानून का डंडा उन सभी नेताओं पर चलना शुरू हो गया है। नैहाटी की जनता अब राहत की साँस ले रही है और उम्मीद कर रही है कि दशकों से चला आ रहा सिंडिकेट राज अब पूरी तरह खत्म होगा।


