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हिमाचल में पेट्रोल-डीजल महँगा, अर्थव्यवस्था का बँटाधार कर कॉन्ग्रेस की सुक्खू सरकार लाई नया Cess: जानें- क्या है ‘विधवा और अनाथ उपकर’

60 पैसे प्रति लीटर का पैसा पेट्रोल पंप मालिक की कमाई नहीं है और न ही यह सामान्य पेट्रोल-डीजल VAT का हिस्सा है। यह अलग 'Orphan and Widow Cess' है, जिसे राज्य सरकार ने वेलफेयर स्कीम के लिए जनता पर लगाया है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का नया अनाथ एवं विधवा उपकर (Orphan and Widow Cess) लागू किया है। राज्य कर एवं उत्पाद शुल्क विभाग द्वारा मंगलवार को अधिसूचना जारी करने के बाद यह नया उपकर 11 अगस्त की मध्यरात्रि से लागू हो गया। इससे राज्य में ईंधन की कीमतें बढ़ गई है।

सरकार के मुताबिक, उपकर से एकत्रित राजस्व विधवाओं और अनाथों के लिए बनाए गए कल्याण कोष में जाएगा। 12 अगस्त से बिक्री पर इसका असर दिखने लगा है। राज्य की विपक्षी पार्टी बीजेपी का कहना है कि एक के बाद एक सुक्खू सरकार ने जनता पर बोझ डाल दिए हैं। एक तरफ सुक्खू सरकार ने हजारों करोड़ों का कर्ज ले लिया है, वहीं दूसरी तरफ लगातार नए-नए टैक्स लगाकर जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।

सरकार ने यह नया उपकर क्यों लगाया?

हिमाचल सरकार ने मार्च 2026 में Himachal Pradesh Value Added Tax (Amendment) Bill, 2026 विधानसभा में पारित कराया था। इसके जरिए वैट एक्ट में नई धारा 6-ए जोड़ी गई। कानून में सरकार को पेट्रोल और हाई स्पीड डीजल पर अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक उपकर लगा कर विधवाओं और अनाथों की देखभाल के लिए कोष बनाना था ताकि इनलोगों को आर्थिक सहायता दी जा सके।

सरकार का तर्क है कि हिमाचल में अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं के लिए पहले से कई योजनाएँ चल रही हैं, लेकिन इनके लिए स्थायी और समर्पित रेवेन्यू स्रोत नहीं था। इसलिए अलग ‘वेलफेयर फंड’ बनाने का प्रावधान किया गया।

कानून में साफ लिखा है कि यह अनाथों और विधवाओं के कल्याण पर खर्च होगा। फिलहाल सरकार 60 पैसे प्रति लीटर के हिसाब से उपकर लेगी। आने वाले समय में धीरे धीरे उसे बढ़ाया जा सकता है, क्योंकि विधानसभा ने ₹5 प्रति लीटर तक उपकर लगाने पर सहमति दे दी थी।

सरकार ने 60 पैसे प्रति लीटर की दर निर्धारित की है, यानी 50 लीटर पेट्रोल भराने पर लगभग ₹30 अतिरिक्त टैक्स और 50 लीटर हाई स्पीड डीजल भरवाने पर ₹30 अतिरिक्त पैसे देने पड़ रहे हैं। ये उपकर उन टैक्सों से अलग है जो पहले से ही हिमाचल की जनता से वसूले जा रहे थे। यह पैसा उपभोक्ता को फ्यूल प्राइस के साथ जोड़ कर वसूला जा रहा है।

हिमाचल सरकार को कितना फायदा होगा?

राज्य कोष को इससे फायदा होगा। दरअसल सरकार को प्रति लीटर ₹0.60 मिलेगा। यानी राज्य में एक साल में पेट्रोल और HSD की कुल बिक्री 100 करोड़ लीटर हुई तो इससे राज्य को 100 करोड़ × ₹0.60 = ₹60 करोड़ का सीधा फायदा होगा।

अगर बिक्री 150 करोड़ लीटर हुई तो सरकार को 150 करोड़ × ₹0.60 = ₹90 करोड़ का फायदा होगा। इसी तरह 200 करोड़ लीटर की बिक्री होने पर ₹120 करोड़ का फायदा सीधे सरकार को होगा। अर्थात वास्तविक सरकारी आय राज्य में होने वाली कुल पेट्रोल + HSD बिक्री पर निर्भर करेगी।

डीलरों की चिंता

ये पैसा पेट्रोल पंप के माध्यम से ही लिया जाएगा क्योंकि कानून कहता है कि cess ‘एट द प्वाइंट ऑफ फर्स्ट सेल इन द स्टेट’ लगाया जाएगा। कानून के मुताबिक ऑयल कंपनी से पेट्रोल पंप डीलर और फिर कस्टमर तक जाता है पेट्रोल-डीजल। इसलिए cess डीलर से लिया जाएगा और डीलर आम जनता से वसूलेगा, लेकिन डीलर पर अप्रत्यक्ष रूप से इसका प्रभाव पड़ सकता है।

डीलरों की चिंता है कि हिमाचल से फ्यूल अगर दूसरे राज्यों मसलन पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ जैसे में सस्ता मिलता है तो सीमावर्ती क्षेत्रों की जनता पड़ोसी राज्यों में जाकर अपना वाहन की टंकी फुल करवाएगी। ऐसे में उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है।

व्यावसायिक वाहन तो पहले ही दूसरे राज्यों में फ्यूल लेकर आएँगे। इनमें बड़े बड़े ट्रक, टैक्सी और दूसरे कॉमर्शियल वाहन होंगे। ये ही आम तौर पर डीजल खरीदते हैं। ऐसे में डीजल डीलरों की कमाई पर इसका असर पड़ेगा। इसके अलावा चूँकि डीलर को ही ये टैक्स भी जमा करना है तो उनको अपने अकाउंट, बिलिंग और टैक्स से जुड़े मामलों पर ज्यादा ध्यान देना होगा। यही वजह है कि डीलरों ने उपकर की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया है और इसके उपयोग के संबंध में अधिक स्पष्टता की माँग की है।

उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा असर

उपभोक्ता को 60 पैसे प्रति लीटर सीधे जेब से देने के अलावा भी कई मोर्चों पर महँगाई का सामना करना पड़ेगा। राज्य में ट्रांसपोटेशन का खर्चा बढ़ने पर वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी। माल ढुलाई का खर्च भी तो जनता ही देगी। इतना ही नहीं प्राइवेट गाड़ियों पर लागत बढ़ेगा। व्यावसायिक वाहनों के रेट बढ़ जाएँगे। इससे जनता पर बोझ तो बढ़ेगा ही।

हिमाचल सरकार को इससे क्या रणनीतिक फायदा है?

सरकार को एकमुश्त पैसे फंड के रूप में मिलेंगे। सरकार सामान्य बजट से पैसा निकालने के बजाय एक अलग रिवेन्यू स्ट्रीम बना सकती है। चूँकि पेट्रोल- डीजल की बिक्री साल के बारह महीने, 24 घंटे होती है इसलिए एक अच्छा खासा रेवेन्यू की उम्मीद रहेगी। इन सबमें सबसे अहम है राजनीतिक तौर पर विपक्ष के सवालों का जवाब देना।

दरअसल हिमाचल की कॉन्ग्रेस सरकार गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है। सरकारी कर्मचारियों को वेतन और पेंशन देने में भी दिक्कतें पेश आ रही है। ऐसे में विधवाओं और अनाथ बच्चों के नाम पर जनता से ही पैसे लेकर सरकार एक ‘इमेज’ बनाने की कोशिश करेगी।

कॉन्ग्रेस के सुक्खू सरकार की माली हालत यह है कि वह चुनावी वादे पूरी करने की स्थिति में नहीं है। मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता, पुरानी पेंशन योजना की बहाली, सरकारी नौकरियाँ और कई सब्सिडी आधारित योजनाएँ धरी की धरी रह गई।

राजस्व घाटा अनुदान बंद होने पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, मंत्रियों और विधायकों के वेतन में 20 से 50 फीसदी कटौती करने का लिया था। इसका विरोध हुआ तो उन्होने प्रशासनिक और मंत्री-विधायकों के वेतन को बहाल कर दिया।

राज्य के किसान और मजदूर भी सड़कों पर उतर आए हैं। किसानों को बीज-खाद की दिक्कत है, तो मजदूर काम के घंटे बढ़ाने और उसके पैसे नहीं देने पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में जनता में विश्वास पैदा करने के लिए सरकार ने नई रणनीति बनाई है।

बीजेपी कर रही है विरोध

लेकिन विपक्ष लगातार जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने पर सरकार के कदम का विरोध कर रहा है। मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने विधानसभा में भी इसका विरोध किया था और इसे जनता पर अतिरिक्त बोझ बताया था। बीजेपी की दलील थी कि पहले से महँगे फ्यूल पर एक और उपकर लगा कर क्यों जनता पर महँगाई का बोझ डाला जा रहा है।

विपक्ष के नेता जय राम ठाकुर ने विधवाओं और अनाथों के नाम पर कर लगाकर राजस्व बढ़ाने की सरकार की कोशिश की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल पड़ोसी राज्यों की तुलना में अधिक महँगे हो सकते हैं, जिससे आम लोग बॉर्डर पार कर दूसरे राज्यों से फ्यूल ले सकते हैं। इसका असर राज्य की कमाई पर भी पड़ेगा।

इसके अलावा विपक्ष ने यह सवाल भी उठाया कि अगर सरकार को वेलफेयर स्कीम के लिए पैसा चाहिए तो वह सामान्य बजट से क्यों नहीं देती। विधानसभा में BJP विधायकों ने इस मुद्दे पर विरोध किया था और सदन का वॉकआउट भी किया था।

बीजेपी का कहना है कि जब से सुक्खू सरकार सत्ता में आई है, जनता पर बोझ बढ़ता गया है। पहले डीजल पर वैट बढ़ाकर कीमतें बढ़ाईं और अब फिर से डीजल व पेट्रोल के दाम बढ़ा दिए गए हैं। बिजली-पानी पर दी जाने वाली सब्सिडी बंद कर दी गई। राशन डिपो में मिलने वाली सब्सिडी बंद है। HRTC बसों में किराया बढ़ाया और स्टाम्प ड्यूटी 500% तक बढ़ा दी गई। एक तरफ सुक्खू सरकार ने हजारों करोड़ों का कर्ज ले लिया है, वहीं दूसरी तरफ लगातार नए-नए टैक्स लगाकर जनता की जेब पर डाका डाला जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश सरकार कहना है कि केंद्र भी फ्यूल पर बड़े cesses लगाता है, तो राज्य क्यों न लगाए और हिमाचल सरकार ने तो मात्र 60 पैसे से शुरुआत की है। अब भविष्य में ये 60 पैसा बढ़ कर 5 रुपए तक जा सकता है, इस पर तो विधानसभा पहले ही मोहर लगा चुकी है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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