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‘गुरुजी के गढ़’ में बेटा आगे और बहू पीछे, दुमका की राजनीति में लम्बे समय बाद शिबू का ‘चौका’

दुमका और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के रिश्ते का अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि वो इस लोकसभा क्षेत्र से 8 बार सांसद रह चुके हैं। 1980 में यहाँ से पहली बार जीतने वाले सोरेन को 2019 में भाजपा के सुनील सोरेन ने चित कर दिया था।

81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा की तस्वीर अगले कुछ घंटों में पूरी तरह साफ हो जाएगी। अब तक के रूझानों में झामुमो-कॉन्ग्रेस-राजद को गठबंधन को भाजपा पर स्पष्ट बढ़त दिख रही है। राज्य की राजनीति के सबसे पुराने धुरंधर पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के घर के हालात जाने बिना इन नतीजों का विश्लेषण अधूरा रह जाएगा। हालाँकि, पिछले कुछ चुनावों की तरह ‘गुरुजी’ इस बार उतने सक्रिय नहीं रहे। उन्होंने कुछेक रैलियॉं ही की। आइए, जानते हैं क्या है ‘गुरुजी के गढ़’ दुमका का चुनावी हालचाल।

दुमका से ख़ुद झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन मैदान में थे। पिछले चुनाव में उन्हें भाजपा की डॉक्टर लुइस मरांडी ने पटखनी दी थी। झारखण्ड भाजपा महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष रहीं लुइस मरांडी ने रघुवर मंत्रिमंडल में कई अहम मंत्रालय भी सँभाले। दुमका और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के रिश्ते का अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि वो इस लोकसभा क्षेत्र से 8 बार सांसद रह चुके हैं। 1980 में यहाँ से पहली बार जीतने वाले सोरेन को 2019 में भाजपा के सुनील सोरेन ने चित कर दिया था।

हालाँकि, इससे झारखंड अथवा दुमका की राजनीति में शिबू सोरेन की हस्ती कम नहीं हो जाती। हाँ, उनकी सक्रियता कम होने और स्वास्थ्य ख़राब होने की वजह से उनका प्रभाव ज़रूर धीरे-धीरे कम हो गया। दुमका की सभी 6 विधानसभा सीटों के परिणाम व ट्रेंड्स पर एक नज़र डालिए:

दुमका: झामुमो
शिकारीपाड़ा: झामुमो
नाला: झामुमो
जामताड़ा: कॉन्ग्रेस
सारठ: भाजपा
जामा: भाजपा

जैसा कि आप देख सकते है, 4 सीटों पर झामुमो गठबंधन आगे चल रहा है, वहीं 2 सीटों पर भाजपा बढ़त बनाए हुए है। जामा से हेमंत की भाभी सीता सोरेन काँटे की टक्कर में पीछे चल रही हैं। यहाँ से झामुमो अध्यक्ष शिबू सोरेन की बहू व पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन चुनावी मैदान में थीं। हेमंत सोरेन दुमका के अलावा साहिबगंज के बड़हेट से भी चुनावी ताल ठोक रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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