Homeदेश-समाजमार गिराए गए अमर दुबे का पिता 5 साल बाद जिंदा गिरफ्तार, विकास दुबे...

मार गिराए गए अमर दुबे का पिता 5 साल बाद जिंदा गिरफ्तार, विकास दुबे का था राइट हैंड

कानपुर के बिकरु गॉंव में 3 जुलाई को हुए शूटआउट के दौरान अमर दुबे ने ही सीओ को गोली मारने के बाद उसके पैर पर कुल्हाड़ी से वार किया था। अमर को हमीरपुर में 8 जुलाई की सुबह यूपी एसटीएफ और हमीरपुर पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान मार गिराया था।

गैंगस्टर विकास दुबे के राइट हैंड अमर दुबे को पुलिस ने 8 जुलाई को मार गिराया था। इसके बाद पुलिस के हाथ उसका पिता संजीव दुबे भी लग गया। संजीव 5 साल से गायब था और परिवार वालों का कहना था कि वह मर चुका है।

लेकिन संजीव दुबे पिछले पाँच साल से गुमनामी की जिंदगी जी रहा था। दरअसल गुरुवार (9 जुलाई, 2020) को बिकरू गाँव में पुलिस ने एक ऑपरेशन चलाया था। बेटे के एनकाउंटर की खबर सुनने के बाद संजीव दुबे अपने ठिकाने से बाहर निकला। इसकी सूचना खबरी ने तत्काल पुलिस को दी। मौके पर मौजूद पुलिसवालों ने उसे गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद पता चला परिवारवालों ने ही पुलिस से बचाने के लिए उसके झूठे मौत की खबर फैलाई थी।

खबरों के अनुसार एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि संजीव दुबे उर्फ संजू पर 12 आपराधिक मामले चौबेपुर थाना में दर्ज थे। इनमें हत्या की कोशिश, ज़मीन पर कब्जा करना, उगाही और लूट जैसे मामले थे। 7 साल पहले वह एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया था। हादसे में सिर्फ उसका पैर कटा था।

कुछ दिन बाद उसने परिजनों से पुलिस को अपनी झूठी मौत की खबर देने को कहा और अंडरग्राउंड हो गया। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ चल रहे सारे केस बंद कर दिए।

गौरतलब है कि कानपुर के बिकरु गॉंव में 3 जुलाई को हुए शूटआउट के दौरान अमर दुबे ने ही सीओ को गोली मारने के बाद उसके पैर पर कुल्हाड़ी से वार किया था। अमर को हमीरपुर में 8 जुलाई की सुबह यूपी एसटीएफ और हमीरपुर पुलिस ने एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान मार गिराया था।

अमर दुबे मध्य प्रदेश की सीमा में घुस कर फरार होने की कोशिश में लगा था। पुलिस ने उसे सरेंडर करने का भी मौका दिया था। इसके बावजूद उसने पुलिस पर फायरिंग कर दी थी, जिसमें 2 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे।

वारदात के बाद मध्य प्रदेश की सीमा पर यूपी पुलिस की सख्ती और वाहनों की चेकिंग को देखते हुए उसने वहाँ जाने का विचार त्याग दिया। इसके बाद वो हमीरपुर के मौदहा में अपने एक सम्बन्धी के यहाँ जाने की फ़िराक़ में था लेकिन एसटीएफ को उसके इरादों की भनक लग गई। उसके पास से एक बैग और एक ऑटोमॅटिक फायर आर्म बरामद हुआ था।

अमर दुबे के ऊपर 25,000 रुपए का इनाम रखा गया था। 2-3 जुलाई की रात अमर दुबे अपने आका विकास दुबे के घर में ही मौजूद था और पुलिस पर हमले की साजिश रचने और गोलीबारी करने में शामिल था।

अमर दुबे अपनी धाक जमाने के लिए दिखावे का शौक़ीन था और बंदूकें लेकर महँगी गाड़ियों के साथ फोटो क्लिक करवाता था। अमर और उसके साथी बिल्हौर के सीओ देवेंद्र मिश्र को घसीट कर विकास दुबे के मामा प्रेम कुमार पांडे के घर में ले गए और गोलियों से भून दिया था। मिश्र पर धारदार हथियार से भी वार किए थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -